MP Scam: मध्यप्रदेश में बड़ा घोटाला, अधिकारियों के साथ किसान भी आरोपी

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MP Scam: बलराम तालाब के नाम पर डकार लिए करोड़ों रुपए

MP Scam
भोपाल स्थित आर्थिक प्रकोष्ठ विंग मुख्यालय

भोपाल। मध्य प्रदेश का नाम घोटालों (MP Scam) की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहा है। व्यापमं घोटाला (MP Vyapam Scam), ई—टेंडर घोटाले (MP E-Tender Scam) के बाद अब ताजा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला बलराम तालाब योजना (Balram Lake Scheme Fraud) का है। यह योजना केंद्र की निधि से प्रदेश में संचालित हो रही थी। इस योजना की नोडल एजेंसी कृषि विभाग (MP Agriculture Scam) थी। यह योजना प्रदेश में भू—जल स्तर सुधारने के लिए शुरु की गई थी। इसका फायदा किसानों को सीधे मिलना था। लेकिन, इस महत्वकांक्षी योजना में सरकारी अफसरों की बुरी नजर पड़ गई। बलराम तालाब खोदने के नाम पर अफसरों ने करोड़ों रुपए डकार (MP Agriculture Officer Scandale) लिए। फर्जीवाड़े में अफसरों ने किसानों को भी शामिल किया। यह घोटाला सबसे पहले देवास के तत्कालीन कलेक्टर ने पकड़ा था। जिसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई थी। सरकार ने मामले को आपराधिक मानते हुए जांच रिपोर्ट आर्थिक प्रकोष्ठ विंग (MP Economic Offense Wing) को कार्रवाई के लिए भेज दी थी।

भाजपा सरकार में हुआ था घोटाला

मामले की जांच कर रही आर्थिक प्रकोष्ठ विंग (MP EOW) ने बलराम तालाब घोटाले के मामले में अलग—अलग दो एफआईआर दर्ज की है। हालांकि दोनों मामलों में आरोपी लगभग एक जैसे ही है। जांच ईओडब्ल्यू की उज्जैन (Ujjain EOW News) इकाई ने की थी। यह घोटाला वर्ष 2011—2012 और 2014—2015 के बीच अंजाम दिया गया। उस वक्त प्रदेश में भाजपा की सरकार हुआ करती थी। देवास कलेक्टर (Dewas DM Committee) ने 2015 में इस घोटाले की जांच करने का निर्णय लिया था। जिसकी रिपोर्ट भाजपा सरकार में सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दी गई थी। प्रदेश में कमल नाथ (Former CM Kamal Nath) सरकार बनते ही इस घोटाले को आगे की कार्रवाई के लिए ईओडब्ल्यू (Bhopal EOW News) को सौंप दिया गया था।

एक जिले में तीन करोड़ से अधिक का घोटाला

बलराम तालाब घोटाले (MP Balram Talab Ghotala) की जांच के लिए देवास के तत्कालीन कलेक्टर ने 6 विकास खंड के लिए 32 जांच दल बनाए थे। इन जांच दलों ने 2037 बलराम तालाब का भौतिक और कागजातों का परीक्षण किया था। जांच केवल देवास कलेक्टर ने शुरु कराई थी। जबकि कई अन्य जिलों में भी बलराम तालाब योजना लागू थी। देवास के 6 विकास खंड में हुई जांच में से 1539 का परीक्षण किया गया। अभी भी 444 बलराम तालाबों का परीक्षण (MP Fake Lake Case) होना बाकी है। जांच दल में शामिल हेमंत जैन (Hemant Jain), सरोज प्रजापति (Saroj Prajapati) समेत कई अन्य को शामिल किया गया था। जांच में पाया गया कि 359 तालाब मौके पर मिले ही नहीं। यह तालाब कागजातों में बन गए थे।

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इतनी राशि का घोटाला

आर्थिक प्रकोष्ठ विंग (MP EOW News) ने इस मामले में 21 सितंबर को अलग—अलग दो एफआईआर दर्ज की है। इसमें जालसाजी, दस्तावेजों की कूटररचना, साजिश के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पहली एफआईआर में घोटाला (Madhya Pradesh Scam) करीब दो करोड़ 85 लाख रुपए का बताया गया है। जबकि दूसरी एफआईआर में यह घोटाला करीब 8 लाख रुपए का माना गया है। जांच देवास के टोंकखुर्द और सोनकच्छ विकासखंड़ की हुई थी। इस घोटाले में देवास स्थित कृषि विभाग के सात अफसरों (MP Agriculture Corrupt Officer) को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा एक एफआईआर में 350 से अधिक किसानों को भी आरोपी माना गया है। इन किसानों ने सरकारी योजना में मंजूर राशि को पाने की लालच में सरकारी अफसरों के साजिश में शामिल रहे। हालांकि इस पूरे मामले को सरकार ने काफी दबाकर रखा है।

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यह है वह साजिश करने वाले लोग

ईओडब्ल्यू ने एक एफआईआर में देवास के तत्कालीन उप संचालक विजय अग्रवाल (Vijay Agrawal), तत्कालीन सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी त्रिलोक चंद्र धावनिया (Trilok Chandra Dhavaniya), तत्कालीन भूमि संरक्षण सर्वे अधिकारी आबिद अली (Abid Ali), तत्कालीन विकास अधिकारी तेज सिंह ठाकुर (Tej Singh Thakur), तत्कालीन भूमि संरक्षण सर्वे अधिकारी कैलाश चौहान (Kailash Chouhan), तत्कालीन भूमि संरक्षक बबलू पिता बृद्धराम शाक्य (Bablu Shakya) और तत्कालीन भूमि संरक्षण सर्वे अधिकारी दुर्गेश नंदनी उईके (Durgesh Nandani Uike) को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा एफआईआर में 351 बलराम तालाब योजना के हितग्राहियों को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत उज्जैन ईओडब्ल्यू (Ujjain EOW News) के पास जनवरी, 2016 में जांच के लिए पहुंची थी।

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यह है दूसरी एफआईआर के आरोपी

ईओडब्ल्यू ने इस मामले में दूसरी एफआईआर भी दर्ज की है। जिसमें गबन, जालसाजी समेत पूर्व की एफआईआर की ही धाराएं लगाई है। आरोपियों में विजय अग्रवाल, त्रिलोक चंद्र, अमुत सिंह यादव, सहदेव गुजरे, कैलाश चौहान, बबलू शाक्य, मांगीलाल नारायण, सीताराम, बद्री लाल, शिव सिंह भागीरथ, ज्योति कुंवर नरेन्द्र सिंह, कमला बाई, जगदीश, मानसिंह, जगादीश गोविंद, सूरज सिंह के अलावा गांव के सरपंच और अन्य को आरोपी बनाया गया है। इस एफआईआर (MP Scandale FIR) में बताया गया है कि घोटाला करीब आठ लाख 11 हजार रुपए का है। हालांकि एफआईआर दर्ज करने में ईओडब्ल्यू को काफी वक्त लगा। जिसकी वजह उसने दस्तावेजों की जांच करने में लगे वक्त को बताया है।

दूसरे जिलों में भी घोटाला

ईओडब्ल्यू को जांच में पता चला है कि बलराम योजना के तहत बनाए गए तालाबों में मनरेगा की मजदूरी भी दी गई। इस संबंध में दस्तावेज जुटाए जा रहे है। इसके अलावा मामले के आरोपी अफसरों की संपत्ति संबंधित जानकारी भी जुटाई जा रही है। ईओडब्ल्यू को शक है कि यह घोटाला केवल देवास जिले तक सीमित नहीं है। इसमें कई दूसरे जिले के कृषि विभाग के अफसर भी शामिल है। इनमें से कई अफसर अभी भी मलाईदारों पदों पर तैनात है। यह वह अफसर है जो जांच को प्रभावित भी कर सकते है। इसलिए एक गोपनीय रिपोर्ट सरकार को भेजी जा रही है। ताकि ऐसे अफसरों के खिलाफ नकेल कसी जाए।

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