MP Mandi Scam: सोयाबीन तेल कंपनी के मालिक को बचा ले गए अफसर

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MP Mandi Scam: सात साल पुराने डेढ़ दर्जन से अधिक फर्जी आदेशों के मामले में दर्ज हुई एफआईआर

MP Mandi Scam
भोपाल स्थित आर्थिक प्रकोष्ठ विंग मुख्यालय

भोपाल। सोयाबीन तेल कंपनियों के एक बड़े घोटाले (MP Mandi Scam) के मामले में गुपचुप एफआईआर दर्ज की गई है। यह घोटाला (MP Mandi Ghotala) सात साल पुराना है। जिसको अंजाम देने के लिए डेढ़ दर्जन से अधिक फर्जी सरकारी आदेश (MP Fake Order Case) निकाले गए थे। यह घोटाला मध्य प्रदेश (MP Corruption News) के ग्वालियर ईओडब्ल्यू इकाई (Gwalior EOW News) ने दर्ज किया है। जबकि इसको अंजाम दो मंडियों में दिया गया था। इन मंडियों में हुए घोटाले को करीब एक करोड़ रुपए का बताया जा रहा है। जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में तीन ट्रेडिंग कंपनियों को आरोपी बनाया है। जबकि सोयाबीन (MP Soyabean Ghotala) तेल उत्पादन से जुड़ी कई कंपनियों को बचाने के लिए नाम छुपाया जा रहा है।

ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा

इस मामले की शिकायत राज्य सरकार से की गई थी। जिसकी गूंज विधानसभा में भी गूंजी थी। कृषि विभाग ने मई, 2016 में जांच के आदेश दिए थे। जिसको सामान्य प्रशासन विभाग ने ईओडब्ल्यू के पास जून, 2016 में अगली कार्रवाई के लिए भेजा था। मामला जुलाई, 2013 में जारी हुए डेढ़ दर्जन से अधिक आदेशों का था। इस आदेश में कई फर्म को मंडी फीस (MP Mandi Fees Scam) पर छूट दिया गया था। जिसका गलत तरीके से कई फर्म ने इस्तेमाल किया। इस आदेश की वजह से सरकार को करीब एक करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ था। सूत्र बता रहे हैं हालांकि इसको राजनीतिक दबाव में कम आंका गया है।

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यहां हुआ फर्जीवाड़ा

ईओडब्ल्यू को जांच करने के आदेश 2016 में मिल गए थे। लेकिन, मामले को चार साल तक लटकाया गया। अब मुकदमा दर्ज तो कर लिया गया है लेकिन, तथ्यों को उजागर करने से ईओडब्ल्यू भी बच रहा है। घोटाला दतिया (Datiya Mandi News) के भांडेर मंडी समिति और शिवपुरी (Shivpuri Mandi News) के बदरवास कृषि उप मंडी में अंजाम दिया गया। जांच में ईओडब्ल्यू ने सचिव दिनेश श्रीवास्तव (Dinesh Shrivastav), सहायक उप निरीक्षक प्रहलाद सिंह धाकड़ (Prahalad Singh Dakad), भरत सिंह तोमर (Bharat Singh Tomar), भांडेर मंडी सचिव करम बीर सिंह सरन (Karam Veer Singh Saran) और गोपाल सिंह कुशवाह (Gopal Singh Kushwaha) सहायक उप निरीक्षक को आरोपी बनाया गया है। इस मामले में मैसर्स अनिल कुमार देवेन्द्र कुमार, गणेश ट्रेडिंग कंपनी और मैसर्स संजना ट्रेडर्स को आरोपी बनाया गया है।

रसूखदारों को ऐसे बचाने के आरोप

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File Photo

गणेश ट्रेडिंग कंपनी का मालिक मोहन लाल गुप्ता (Mohan lal Gupta) है। इसी तरह मैसर्स संजना ट्रेडर्स भांडेर का मालिक धर्मेन्द्र साहू (Dharmendra sahu) है। ईओडब्ल्यू ने अन्य लिखकर रसूखदारों को बचा लिया है। जबकि जांच में यह साबित पाया गया है कि एग्रो साल्वेट प्रायवेट लिमिटेड (Agro Solvet), लक्ष्मी साल्वेट देवास (Laxmi Solvet Dewas) और रुचि सोया इंडस्ट्रीज (Ruchi Soya Industries) के नाम के भी फर्जी आदेश जारी हुए थे। ऐसे ही कई अन्य फर्म के नाम ईओडब्ल्यू ने अपनी एफआईआर में छुपा लिए हैं। सूत्रों के अनुसार यह घोटाला केवल दो मंडियों का नहीं है। इसी तरह का फर्जीवाड़ा दूसरी मंडियों में भी किया गया था।

ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा

ईओडब्ल्यू ने जांच के नाम पर सिर्फ कृषि विभाग (MP Agriculture Scam) की रिपोर्ट को आधार बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया। कृषि विभाग की जांच में यह साबित हो गया था कि 08 जुलाई, 2013 को यह फर्जी आदेश जारी किए गए थे। ईओडब्ल्यू यह पता नहीं लगा पाई कि आदेश किस व्यक्ति ने बनाए थे। कृषि विभाग ने जांच में पाया था कि मंडी के सहायक उप निरीक्षकों ने सोयाबीन की फसल के परिवहन का भौतिक सत्यापन नहीं किया। वहीं मंडी सचिवों ने इस लापरवाही पर मौन साधे रखा। ईओडब्ल्यू ने जालसाजी (MP Agriculture Fraud Case), दस्तावेजों की कूटरचना समेत अन्य धारा में प्रकरण दर्ज किया है।

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