Vyapam Return’s : दिल्ली में दो डॉक्टरोें की तलाश में एसटीएफ ने दी दबिश

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फर्जी मूल निवासी बनाकर गांधी मेडिकल कॉलेज से हासिल की थी एमबीबीएस की डिग्री, एसटीएफ ने दर्ज किए तीन मुकदमे

Vyapam Return's
मध्यप्रदेश एसटीएफ मुख्यालय

भोपाल। व्यापमं रिटर्न्स (Vyapam Return’s), हैरान मत होईए। यह बिलकुल सच है। बंद पिटारे से यह जिन्न फिर निकल आया है। इस ताजा तीन एफआईआर ने तत्कालीन भाजपा सरकार की उन नेताओं की नींंदे उड़ा दी है जो इस केस से दखल रखते हैं। जानते स्पेशल टास्क फोर्स (Special Task Force) के अफसर भी है। लेकिन, अफसरों का दावा है कि अभी मामले दर्ज हुए हैं। जांच में बहुत सारी परतें उजागर होगी। वह जनता के सामने लाई भी जाएगी। फिलहाल हमें मामले की जांच करने का थोड़ा समय दीजिए। इधर, इस ताजा तीन एफआईआर के बाद एसटीएफ (STF) की टीम दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। यह टीम दिल्ली (Delhi Doctor) के निजी अस्पतालों में पदस्थ दो डॉक्टरों की तलाश में हैं। इन डॉक्टरों ने मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Citizenship) का मूल निवासी बताकर भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी।

मध्यप्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh Police) में एडीजी एसटीएफ अशोक अवस्थी (ADG Ashok Avasthi) ने पत्रकारों को बताया कि स्पेशल टास्क फोर्स (MP STF) ने तीन एफआईआर दर्ज की है। यह एफआईआर मध्यप्रदेश राज्य कोटे (MP State Kota) की सीटों को गलत तरीके से हासिल करने के मामले में हैं। पहली आरोपी सीमा पटेल (Dr Seema Patel) है जिसने 2004 में पीएमटी परीक्षा पास की थी। दूसरा आरोपी विकास अग्रवाल (Dr Vikas Agrawal) है जिसने 2005 में पीएमटी परीक्षा पास की थी। तीसरा आरोपी सीताराम शर्मा (Dr Sitaram Sharma) है जिसने 2009 में परीक्षा पास की है। सीमा पटेल ने सागर (Sagar) का मूल निवासी प्रमाण पत्र बनाया था। इसी तरह विकास अग्रवाल ने टीकमगढ़ (Tikamgarh) और सीताराम शर्मा ने मुरैना (Morena) का निवासी बताकर प्रमाण पत्र बनाया था। एडीजी ने बताया कि मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) मूल निवासी प्रमाण पत्र की स्कूटनी कई लेवल पर होती है।

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Vyapam Return's
अशोक अवस्थी, एडीजी, स्पेशल टास्क फोर्स

एसटीएफ (Madhya Pradesh STF) उन सभी लेवल पर बरती गई लापरवाही का पता लगा रही है। यह तीनों ने भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (Gandhi Medical College Bhopal) से डिग्री हासिल की है। एसटीएफ को प्राथमिक पड़ताल में मालूम हुआ है कि इन तीनों आरोपियों ने मध्यप्रदेश को छोड़कर दूसरे राज्यों से हाईस्कूल और हायर सेकेंड्री की परीक्षाएं पास की है। ऐसी दशा में उनका मध्यप्रदेश मूल निवासी होना संदेह पैदा करता है। एसटीएफ ने इस मामले में धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना का मुकदमा दर्ज किया है।

ऐसे दर्ज हुआ मामला
एडीजी ने बताया कि इस संबंध में गृह मंत्री बाला बच्चन (Home Minister Bala Bachhan) के कार्यालय से सितंबर, 2019 में पत्र प्राप्त हुआ था। जिसके बाद एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू की थी। इससे पहले गृह मंत्री विधानसभा में कह चुके थे कि ऐसे मामले जिनकी जांच सीबीआई (Bhopal CBI) ने नहीं की है वे नए सिरे से जांच के लिए एसटीएफ (#MP STF) को सौंपी जाएगी। सूत्रों ने बताया कि इस मामले की एक आरोपी सीमा पटेल (Dr Seema Patel) दमोह अस्पताल में नौकरी में तैनात है। उसका चयन पीएससी के माध्यम से हुआ। नौकरी से लेकर डिग्री मिलने में उसको राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हुआ। जांच के बाद वह सारे खुलासे होंगे। यानि एक बार फिर सुगबुगाहट है कि प्रदेश में फिर से राजनीतिक भूचाल आएगा।

क्या है व्यापमं घोटाला पार्ट-1
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh Scam) का यह बहुचर्चित व्यापमं घोटाला (Vyapam Ghotala) 2013 में इंदौर (Indore) से उजागर हुआ था। इंदौर क्राइम ब्रांच ने इस मामले में जगदीश सागर (Jagdish Sagar) की गिरफ्तारी की थी। जिसके बाद इसमें व्यवासायिक परीक्षा मंडल के अफसर सीके त्रिवेदी (CK Trivedi), नितिन मोहिन्द्रा(Nitin Mohindra), पंकज त्रिवेदी(Pankaj Trivedi), अजय सेन(Ajay Sen) गिरफ्तार हुए थे। इन चारों की गिरफ्तारी इंदौर क्राइम ब्रांच से मध्यप्रदेश एसटीएफ (#Madhya Pradesh Special Task Force) को मामला सौंपे जाने के बाद हुई थी। इन चारों ने एक—एक करके आधा दर्जन से अधिक प्रतियोगी और सरकारी नौकरी के लिए आयोजित परीक्षाओं में धांधली करने की बात स्वीकारी थी।

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जिसके बाद एसटीएफ ने पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा (Former Minister Laxmikant Sharma), उनके ओएसडी ओपी शुक्ला (OP Shukla), खनन कारोबारी सुधीर शर्मा (Sudhir Sharma), कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना (Sanjeev Saxena) समेत कई बड़े रसूखदारों को एक—एक करके गिरफ्तार किया था। उस वक्त तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान (Former CM Shivraj Singh Chouhan) की सरकार हुआ करती थी। बाद में यह मामला सु्प्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। इसमें उन्हीं मामलों को दर्ज किया गया जिसमें प्रकरण एसटीएफ या फिर दूसरे थाने में दर्ज था। ताजा विवेचना को लेने से सीबीआई ने इनकार कर दिया था। इसलिए स्पेशल टास्क फोर्स मध्यप्रदेश राज्य कोटे के गलत इस्तेमाल की जांच नए सिरे से कर रहा है। इस मामले में कई निजी कॉलेजों के मालिक भी फंसते नजर आ रहे हैं।

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