Exclusive News: लिफ्ट हादसे में संचालक के खिलाफ आखिरकार प्रकरण दर्ज

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Exclusive News: सागर प्लाजा के चार पार्टनर, हर फ्लोर का ओनर अलग, इसलिए संचालक के बयानों पर जुड़ेंगें अन्य साझेदारों के नाम

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल।आखिरकार दस दिन लंबी जांच के बाद सागर प्लाजा में हुए लिफ्ट हादसे के मामले में भोपाल (Exclusive News) शहर की एमपी नगर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। जिसमें अभी आरोपी सिर्फ लिफ्ट संचालक को बनाया गया है। दरअसल, पूरे प्लॉजा के हर फ्लोर का ओनर अलग—अलग व्यक्ति हैं। लिफ्ट संचालक की गिरफ्तारी के बाद दर्ज होने वाले बयान पर पुलिस सागर प्लाजा के अन्य संचालकों के नाम एफआईआर में जोड़ने का निर्णय लेगी। बहरहाल, इस प्रकरण में अभी अन्य धाराएं जुड़ना भी तय हो गया है।

एक दशक पूर्व लगी थी लिफ्ट

सागर प्लाजा (Sagar Plaza) में लिफ्ट एक दशक पूर्व लगाई गई थी। लिफ्ट क्लासिक एलिवेटर कंपनी (Classic Elevator Company) की है। जिसका संचालन रमेश कुशवाहा (RameshKushwah) करते हैं। इसके बदले में उन्हें सालाना एक लाख रुपए का भुगतान किया जाता है। पुलिस का कहना है कि यह भुगतान राशि किस—किस साझेदार से उसे होता था यह पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा उसने लिफ्ट रखरखाव को लेकर किस तरह का एमओयू साझेदारों से किया था वह जब्त किया जा रहा है। इस मामले में नगरीय निकाय विभाग से भी लिफ्ट (Lift) इंस्टॉलेशन और उसके मानकों को लेकर पुलिस की तरफ से निकट भविष्य में पत्राचार किया जाएगा। अभी एमपी नगर (MP Nagar) थाना पुलिस ने इस मामले में 08 मई की  रात लगभग साढ़े आठ बजे प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले की जांच एसआई कुलदीप खरे (SI Kuldeep Khare) कर रहे थे।

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यह है घटना जिस पर भाई—भतीजावाद के लग रहे थे आरोप

एमपी नगर (MP Nagar) स्थित जोन—2 में सागर (सेज) प्लाजा  है। इसमें सागर बिल्डर (Sagar Builder) के अलावा कई अन्य कमर्शियल सेंटर के ऑफिस है। सागर बिल्डर का दफ्तर पहली मंजिल पर है। इसके बाद तीन अन्य मंजिलों पर अलग—अलग दफ्तर है। यहां लगी लिफ्ट (Lift) 29 अप्रैल की शाम लगभग साढ़े पांच बजे तीसरी मंजिल से सीधे बेसमेंट पर गिरी थी। जिसके कारण आस—पास सैकड़ों को लोगों को भूकंप के कंपन जैसा अहसास हुआ था। लिफ्ट में चीख—पुकार मच गई थी। काफी संघर्ष के बाद लिफ्ट के भीतर से पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी, सुशील कुमार त्रिपाठी, दिलीप सिंह भदौरिया, अनीता चौबे, प्रगति श्रीवास्तव और सादिया खान को बाहर निकाला गया था। लिफ्ट गिरने के कारण रिजवान अहमद सिद्दीकी (Rizwan Ahemad Siddiqi), सुशील त्रिपाठी (Sushil Tripathi) और सादिया खान (Sadiya Khan) के पैरों में फ्रैक्चर (Fracture) हुआ था। पुलिस का कहना है कि घायलों की मेडिकल रिपोर्ट आने पर फ्रैक्चर होने की धाराएं बढ़ाई जाएगी।

लिफ्ट ऑपरेटर नहीं होने पर साझेदारों का फंसना तय

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एमपी नगर थाना, जिला भोपाल — फाइल फोटो

पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच (Exclusive News) में पता चला है कि जिस लिफ्ट से हादसा हुआ उसका आधिकारिक रुप से रखरखाव 3 अप्रैल को किया था। लिफ्ट में पांच लोगों के सवार होने की क्षमता थी। लेकिन, जिस दिन घटना हुई उस वक्त सात लोग सवार थे। पुलिस का कहना है कि अधिक वजन होने के कारण यह हादसा हुआ। नगरीय निकाय नियमों के अनुसार लिफ्ट लगाने से पूर्व संबंधित प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होता है कि वह निगरानी और उसे चलाने ऑपरेटर रखेगी। इस सरकारी शर्त का उल्लंघन किया गया। दरअसल, हादसे के वक्त ऑपरेटर था ही नहीं। यदि होता तो वह ओवरलोड होने से रोका जा सकता था। इसके अलावा ओवरलोड होने पर अलार्म सिस्टम लिफ्ट में इंस्टाल नहीं था। लिफ्ट कितनी पुरानी है इसकी भी रिपोर्ट तकनीकी शाखा से पुलिस मांगने जा रही है। इसमें सागर बिल्डर के बुरी तरह फंसने की आशंका से इंकार नहीं किया गया है।

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