Gujrat Political News: गुजरात में आम आदमी पार्टी के कारण राजनीतिक “डांडिया” शुरू

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Gujrat Political News: पूर्व गृहमंत्री के बेटे और मुख्यमंत्री की बेटी ने आप का दामन थामा, चुनाव पूर्व पार्टी को तगड़ा झटका

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गांधी नगर। कांग्रेस के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर घमासान जारी है। मुकाबले में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खडगे आमने—सामने हैं। इधर, राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत पैदल मार्च कर रहे हैं। वहीं गुजरात (Gujrat Political News) में आम आदमी पार्टी के कारण वहां भाजपा के साथ राजनीतिक डांडिया शुरू हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तीन महीने में चार बार दौरा कर चुके हैं। दो दिन पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी डेरा डाल दिया था। इस उठापटक के बीच कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के बच्चों को आम आदमी पार्टी ने अपने दल में शामिल कर लिया। मतलब साफ है कि भाजपा के बाद अब आप भी कांग्रेस को कमजोर करने में जुट गई है। जिसकी शुरूआत उसने गुजरात से कर दी है।

कद्दावर नेता थे रावल

गुजरात में इसी साल दिसंबर में विधानसभा चुनाव होना है। जिसके चलते अरविंद केजरीवाल के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के भी दौरे चल रहे हैं। इसी बीच गुजरात के पूर्व गृह मंत्री प्रबोध रावल (Prabodh Rawal) के पुत्र और कांग्रेस नेता चेतन रावल (Chetan Rawal) ने आप पार्टी का दामन थाम लिया। उन्होंने शनिवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। आप में शामिल होने के साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के जनोन्मुखी दृष्टिकोण से प्रभावित हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकारों के साथ ही कांग्रेस लोगों के मुद्दों को हल करने में नाकाम रही है। उनके पिता प्रबोध रावल 1980 के दशक में माधवसिंह सोलंकी (Madhav Singh Solanki) सरकार में राज्य के गृह मंत्री थे और वह दो बार कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष भी रहे थे।

सरकार का पुरूस्कार लौटा दिया था

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अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली

पूर्व मुख्यमंत्री छबीलदास मेहता की पुत्री नीता मेहता (Neeta Mehta) भी केजरीवाल से मुलाकात करने के एक दिन बाद आप में शामिल हो गईं। केजरीवाल शनिवार और रविवार को राज्य के दो दिवसीय दौरे पर थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वह दिल्ली में केजरीवाल (Gujrat Political News) के शासन और महंगाई के खिलाफ उनकी लड़ाई के कारण उनसे प्रभावित होकर आप में शामिल हो रही हैं। इसी तरह दलित लेखक सुनील जादव (Sunil Jadav) भी आप में शामिल हो गए। उन्होंने दावा किया है कि गुजरात की सरकार दलितों के साथ अस्पृश्यता को समाप्त करने में विफल रही है। उन्होंने 2017 में राज्य सरकार का पुरस्कार विरोधस्वरूप लौटा दिया था। उन्होंने कहा कि दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं करने देने, बारात में घोड़ी की सवारी नहीं करने देने या मूंछ रखने की अनुमति नहीं देने जैसे अत्याचार राज्य में बढ़ रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

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