Chhota Rajan : बड़ा राजन के साथ टिकट ब्लैक करते-करते ऐसे बना अंडरवर्ल्ड डॉन

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छोटे भाई को बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने दिया टिकट, एक बार फिर चर्चा में आया छोटा राजन

छोटा राजन और उसका भाई दीपक निकालजे

 

अंकुश मौर्य, विशेष संवाददाता । Chhota Rajan, नाम तो बहुत सुना होगा आपने। लेकिन क्या आप बड़े राजन (Bada Rajan) को जानते है ? जी हां छोटा राजन के ऊपर भी एक बड़ा राजन था, जिसकी पनाह में वो अंडरवर्ल्ड डॉन (Under World Don) बना। बड़ा राजन का असली नाम राजन महादेव नायर (Rajan Mahadev Nayer) था, जिसने राजेंद्र सदाशिव निकल्जे (Rajendra Sadashiv Nikalje) उर्फ छोटा राजन (Chhota Rajan) को टिकट ब्लैक करना सिखाया था। छोटा राजन के छोटे भाई दीपक निकल्जे (Deepak Nikalje) को बीजेपी-शिवसेना गठबंधन (BJP-Shiv Sena Ally) केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (Republican Party of India) ने विधानसभा चुनाव का टिकट दिया है। लिहाजा एक बार फिर छोटा राजन का नाम चर्चा में है।

फिल्मों की टिकट ब्लैक करता था छोटा राजन

छोटा राजन

1960 में मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में जन्में राजेंद्र सदाशिव निखालजे उर्फ छोटा राजन ने 19 वर्ष की उम्र में टिकट ब्लैक करने का धंधा शुरु किया था। एक जानकारी के मुताबिक छोटा राजन ने राजन महादेव नायर उर्फ बड़ा राजन की सह में सहकार टॉकीज के सामने टिकट ब्लैक करने का धंधा शुरु किया था। वहीं दूसरी जानकारी के मुताबिक टिकट ब्लैक करते समय छोटा राजन पुलिसवालों से भिड़ गया था। उसने पुलिसकर्मियों की लाठी से ही उनकी पिटाई कर दी थी। जिसके बाद उसकी बड़े राजन की गैंग में एंट्री हुई थी।

डॉन वरदराजन मुदलियार की मिली विरासत

1960 के दशक में एक युवा अच्छे काम की तलाश में मद्रास से मुंबई पहुंचा था। काफी तलाश करने के बाद भी जब उसे मन मुताबिक काम नहीं मिला तो वो कुली बन गया। इस दौरान उसकी पहचान शराब की तस्करी करने वाले गिरोह से हो गई। पैसे की भूख ने कुली बने युवा को शराब तस्कर बना दिया। अपराध की दुनिया में अंडरवर्ल्ड डॉन वरदराजन मुदलियार का ये पहला कदम था। शराब तस्करी करते-करते ही वो मुंबई के डॉन हाजी मस्तान तक पहुंचा। उस वक्त पूरी मुंबई पर हाजी मस्तान और करीम लाला का राज था। लेकिन वरदराजन को हाजी ने ऐसा वरदान दिया कि वो आधी मुंबई पर राज करने लगा। लेकिन एक पुलिस अधिकारी ने वरदराजन को मुंबई छोड़ने पर विवश कर दिया। तेजतर्रार पुलिस अधिकारी वाय सी पवार के टारगेट पर वरदराजन का गैंग था। मुदलियार ने पवार को खरीदने की कई कोशिशें की, लेकिन बात नहीं बनी। पुलिस एनकाउंटर में मुदलियार गैंग के एक के बाद एक गुर्गे मारे जा रहे थे। ऐसे हालातों में जान बचाने के लिए वरदराजन उर्फ वरदाभाई मुंबई छोड़कर मद्रास भाग गया। 1980 में वरदराजन के जाने के बाद राजन बंधुओं ने उसकी विरासत संभाली थी।

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वरदराजन मुदलियार

ऐसे दाउद का खास बना राजन 

बड़े और छोटे राजन ने वरदराजन के कामों को ही आगे बढ़ाया। तस्करी, जमीनें खाली कराना, लोगों को धमकाना और टेरर टैक्स वसूलने का काम करने लगे। मुंबई के बड़े इलाके में बड़ा राजन के गैंग गोल्डन गैंग का कब्जा हो गया था। इसी दौरान पुरानी रंजिश के चलते अब्दुल कुंजू नाम के बदमाश ने राजन नायर उर्फ बड़ा राजन की गोली मारकर हत्या करवा दी। जिसके बाद छोटे राजन ने बड़े की मौत का बदला लेने की कसम खा ली।  कुंजू की हत्या करने के लिए छोटा राजन की साजिश ने उसे दाउद तक पहुंचा दिया। छोटा राजन गैंग के हमले के बाद घायल कुंजू 25 अप्रैल 1984 को अस्पताल पहुंचा था। लेकिन पहले से ही वहां हाथ में प्लास्टर बांधे एक शूटर मौजूद था। जैसे ही कुंजू पहुंचा उसने फायरिंग शुरु कर दी। शूटर ने प्लास्टर के अंदर एके-47 छिपा रखी थी। हालांकि कुंजू कि किस्मत अच्छी थी, वो खिड़की से कूदकर भाग निकला। लेकिन छोटा राजन के इस स्टाइल ने दाउद को बहुत प्रभावित किया।

छोटा शकील की आंखों का कांटा बन गया राजन

दाउद और राजन

दाउद की गैंग में छोटा राजन की एंट्री होने के बाद वहां दो छोटे हो गए। एक छोटा शकील और दूसरा छोटा राजन। क्राइम स्टाइल के चलते छोटा राजन, दाउद की आंखों का तारा बन गया था। लेकिन इससे कभी दाउद का खास रहा छोटा शकील नाखुश था। वो किसी भी हाल में छोटा राजन को रास्ते से हटाना चाहता था। लिहाजा उसने साजिश रचना शुरु किया। मुंबई अंडरवर्ल्ड पर लिखी एम हुसैन जैदी की किताब डोंगरी टू दुबई के मुताबिक छोटा शकील ने दाउद को छोटा राजन के खिलाफ भड़काने की काफी कोशिश की। उसने ये साबित करने का प्रयास किया कि छोटा राजन पूरे धंधे को हथियाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन दाउद ने उसकी बातों पर भरोसा नहीं किया। उसी दौरान दाउद ने अपने भाई साबिर इब्राहिम कासकर की हत्या का बदला लेने का काम छोटा राजन को दे रखा था। छोटा शकील के पास यहीं एक मौका था छोटा राजन को नीचा दिखाने का। छोटा शकील ने दाउद से कहा कि भाई छोटा राजन को आपका बदला लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है, वो तो बस पैसा कमा रहा है और गैंग पर कब्जा कर रहा है। दाउद को ये बात खटक गई, उसने छोटा राजन से फोन पर बात की। मौका पाते ही छोटा शकील के जिगरी सौत्या ने कासकर का बदला लेने का काम उसे देने की पेशकश दाउद से कर दी और निकल पड़ा। कासकर के हत्यारों को सौत्या और छोटा शकील के लोगों ने मार गिराया। बस यहीं से दाउद और छोटा राजन के बीच दरार पैदा हो गई। मुंबई बम विस्फोट के बाद दाउद और छोटा राजन पूरी तरह अलग हो गए।

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 कई साल छिपता रहा छोटा राजन

बाली में गिरफ्तार राजन

दाउद गैंग से छोटा राजन की कहानी खत्म करने के बाद छोटा शकील उसकी हत्या कराना चाहता था। ये बात राजन को पता थी। लिहाजा वो दुबई से भाग निकला। वहां से वो काठमांडू होते हुए मलेशिया जा पहुंचा। उसने कई साल कंबोडिया, इंडोनेशिया और बैंकाक में गुजारे। इस दौरान उस पर हमले भी किए गए। 2015 में उसे इंडोनेशिया के बाली में गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद उसे भारत लाया गया। कोर्ट ने उसे पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या का दोषी पाया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस तरह छोटा राजन की कहानी खत्म हुई।

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