IPS DC Sagar: कोविड—19 और पंचतत्व

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अपने हेल्थ को लेकर संवेदनशील और शरीर सौष्ठव के कारण युवाओं के चर्चित चेहरे की शानदार कहानी

IPS DC Sagar Article
भारतीय पुलिस सेवा के अफसर डीसी सागर फेसबुक वॉल से साभार

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के आईपीएस डीसी सागर (IPS DC Sagar Article) अपने काम के कारण हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। वह जितना फील्ड में फोर्स के मनोबल को बूस्ट करते हैं उतने ही वह सामाजिक गतिविधियों में भी एक्टिव रहते हैं। उन्होंने हाल ही में कोविड—19 (Covid-19 Article) महामारी को लेकर विचार व्यक्त किए है। आपके यह विचार युवाओं को काफी फायदा पहुंचा सकते हैंं।

कोविड—19 और पंचतत्व

आज के परिवेष में वैश्विक महामारी कोविड—19 और मनुष्य के संरचनात्मक पंचतत्वीय अस्तित्व से युद्ध में मनुष्य की विजय के लिए मनुष्य को बचाव और उपचार के विशेष प्रयास किया जाना अनिवार्य है। यह पांच तत्व जिनसे मनुष्य और संपूर्ण पर्यावरण बना है। वह हैं आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी। इन पांच तत्वों को जिन्हें पंचभूत भी कहा जाता है, मनुष्य यदि आत्मसात करे तो वह अपने मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को सुदृण बनाने में सफल हो सकता है। सुदृढ़ स्वास्थ्य से तात्पर्य है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी सक्षम हो कि वह शरीर के संरचनात्मक प्रक्रिया को किसी भी आक्रामक संक्रमणकारी तंतु को अपने अंदर प्रवेश न करने दे और उसके आक्रमण को निर्मूल कर दे।

पंचतत्वों से ऐसे जुड़े!

कोविड-19 मनुष्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से जन्मी हुई वह महामारी है जिसके कारण मनुष्य की मृत्यू हो जाती है। इस मृत्यू का कारण कोरोना वायरस के मनुष्य के फेंफड़ों और श्वांस लेने की प्रक्रिया बाधित करना है। मनुष्य को इस प्रकार से संक्रमण से बचने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि शासन के पालन करने की महत्वपूर्ण सावधानियां बताई गयी है। जैसे हाथों को साबुन पानी से धोना, सेनेटाइज करना, चेहरे पर मास्क पहनना, सामाजिक दूरी और कोरोना से संक्रमण के लक्षण दिखने पर टेस्टिंग करवाना है। इसके अतिरिक्त मनुष्य को संक्रमण से बचने के लिए उसे स्वयं को हृष्ट—पुष्ट और निरोग रहना होगा। अतः मनुष्य को पंच तत्वों से निरंतर स्वयं को जीवंत संपर्क में रखते हुए लाभ प्राप्त
करना होगा।

ऐसे भी फैल सकता है कोरोना!

कोराना वायरस मानव शरीर में नाक के छिद्रों में मौजूद गोब्लेट सेल तथा सिलिएटेड सेल पर आक्रमण कर उन्हें क्षतिग्रस्त करता है। मानव शरीर के सेल्स के अंदर कोरोना वायरस मानव शरीर के प्रोटीन को माध्यम बनाकर प्रवेश करता है। चिकित्सकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रोटीन की मात्रा सबसे अधिक मनुष्य की नाक के अंदर ही होती है। इसलिए कोरोना वायरस इसी मार्ग से प्रवेश करता है। आंख की कोर्निया आंसुओं के डक्ट और मुंह से एवं आंताों की लाइनिंग से भी कोरोना वायरस का प्रवेश संभव है।

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क्या होता है कोरोना वायरस!

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कोरोना वायरस सांकेतिक चित्र

कोविड-19 का नामकरण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 फरवरी 2020 को किया था। जिसकी वजह कोरोना वायरस से उत्पन्न महामारी का उद्गम चीन के वुहान नामक शहर में दिसम्बर 2019 में हुआ था। आज यह एक विकराल भयावह प्राणघातक महामारी का रूप ले चुकी है। क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व व्यापी हो चुका है। कोविड-19 का प्रादुर्भाव कोरोना वायरस नोवल के मनुष्य के शरीर को संक्रमित कर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को ध्वस्त कर जीवन प्रक्रिया को समाप्त कर देता है। विशेषकर सांस लेने की प्रक्रिया को संक्रमित कर जीर्ण क्षीण कर देता है। अर्थात शरीर के फेंफड़ों से रक्त को आक्सीजन युक्त करने और आॅक्सीजन रिक्त रक्त को पुनः आक्सीजन युक्त करने की प्रक्रिया को निष्क्रिय कर देता है। जिसके फलस्वरूप मल्टी आर्गन फेलुअर हो जाने के कारण मनुष्य की मृत्यू होती है।

ऐसे बच सकते हैं आप!

वायरस जो कि एक आरएनए नामक प्रोटीन है वह मानव शरीर में बलात प्रवेश कर वहां के सेल्स को क्षतिग्रस्त कर कोरोना वायरस के परिवार को अनेक—अनेक संख्या में गुणात्मक रूप से प्रजनित करता है। इससे मनुष्य के शरीर के सामान्य रोग प्रतिरोधक गुण परास्त हो जाते हैं। सांस लेने की प्रक्रिया बाधित होकर प्राणों को समाप्त कर देती है। पंच तत्व से सृजित मानव शरीर को सुद्रढ और निरोग बनाये रखने के लिए पांचों तत्वों से निरंतर संपर्क बनाना चाहिए। मानव शरीर को जीवित रहने के लिए शुद्ध वायु, उष्मा, प्रकाश, शुद्ध जल और पृथ्वी से उत्पन्न वनस्पति की आवश्यकता होती है। इस प्रकार मानव शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को सशक्त बनाया जा सकता है। जिससे कि शरीर में उत्पन्न प्रतिपिंड जो कि रक्त के प्लाज्मा के अंदर होती है। वह मजबूती से किसी भी प्रकार के संक्रामक प्रतिजन को पहचान कर उससे युद्ध कर उसे ध्वस्त कर देता है।

यह खाने से मिलेगा फायदा!

साइंटिफिक इमेज

इसलिए पंचतत्वों के प्रति जागरुक रहते हुए जीवन को एक अनुशासनबद्ध शैली में जीना चाहिए। जिसके लिए संतुलित शुद्ध आहार जिसमें प्रचुर मात्रा में एंटी आॅक्सीडेन्ट विद्यमान हो जो मानव शरीर के लिए विनाशक फ्री-रेडीकल्स को उसमें प्रवेश न करने दें। संतुलित आहार से तात्पर्य है वह आहार जिसमें पर्याप्त मात्रा मेें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइडरेड, मिनरल आदि से युक्त आहार है। जैसे विभिन्न प्रकार की दालें, राजमा, दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, फल (पपीता, सेब आदि) आटा (गेंहू, मक्का आदि)। इनको पकाने की विधि में अल्प मात्रा में
घी (गाय, भैंस) अथवा अल्प मात्रा में तेल (सरसों, सूरजमुखी, आॅलिव आदि) वांछनीय है। यह सब महत्वपूर्ण तत्व पंचतत्वों (पृथ्वी,जल,वायु,आकाश तथा अग्नि) के प्रभुत्व से ही मनुष्य को सुलभ होते हैं। शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को उत्तरोत्तर विकसित करने के लिए पंचतत्व के अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व वायु का महत्व उल्लेखनीय है क्योंकि व्यायाम (प्राणायाम-योगा, जाॅगिंग, पैदल सैर, विभिन्न प्रकार के नृत्य, खेल एवं कसरत) से फेंफडों में रक्त के शुद्धिकरण की क्षमता का विकास होता है जो मानव के मनोकायिक (तन और मन) अवस्था को निरोग एवं ताजातरीन रखता है।

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जीवन को सफल बनाने के गुर!

मानव शरीर का अधिकांश भाग जल के अणुओं से बना है। अतः साफ सुथरे जल का प्रचुर मात्रा में सेवन और नियमित स्नान करने का संबंध भी स्वस्थ जीवन से है। जिसके मूल में सशक्त प्रतिपिंड कवच होता है। जिससे मनुष्य की प्रतिरक्षा प्रणाली अभेद बनी रहती है। मानव शरीर को आकाश में विद्यमान प्रकाश के स्त्रोत सूर्य से पर्यावरण में उष्मा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विटामिन-डी अनंत मात्रा में उपलब्ध होती है। पंचतत्व के अग्नि तत्व का मानव की संरचना से अत्यंत गहरा संबंध है। जैसे भोजन को पकाकर खाना और मृत्यू उपरांत पंचतत्व में ही विलीन हो जाना। पंचतत्व से निर्मित मानव शरीर की प्रतिपिंड सुरक्षा कवच यदि विकसित
होंगी तो कोविड-19 के वायरस प्रतिजन को नष्ट कर शरीर में प्रवेश नहीं करने देगी जिससे मानव शरीर निरोग और स्वस्थ बना रहेगा। इस प्रकार यह कहना अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा कि मानव शरीर के संरचनात्मक श्रृष्टि के मूल मेें पंचतत्व प्रेरणा का अक्षुण्ण स्त्रोत है। हमारे देश के वैदिक शास्त्रों में और पाश्चात्य दर्शन शास्त्रों में भी पंचभूत को सृष्टि का आधार स्वीकार किया गया है। जिसे महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने महाकाव्य रामचरित मानस में इस प्रकार कहा है – छिछि जल पावक गगन समीरा। पंच रचचि अछि अधम सरीरा।।

दिनेश चंद्र सागर
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक,
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय

उक्त रचना और विचार लेखक के हैं। शीर्षक बनाकर कंटेंट को सरल तरीके से समझने के लिए लिखा गया है।

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