Court Order : फर्जी हितग्राही बनकर डाक विभाग के खाते से रकम निकालने वाले दोषी करार

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Court Orderसीबीआई अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में सुनाई चार साल की सजा, भिंड के डाक घर के मामले में आया फैसला

भोपाल। भोपाल जिला अदालत में सीबीआई के स्पेशल जज आलोक अवस्थी ने भ्रष्टाचार के एक मामले में (Court Order) अपना फैसला सुनाया है। मामला एक योजना में फर्जी हितग्राही बनकर डाक विभाग के खातों से रकम निकालने का है। इस मामले में सीबीआई ने जांच करने के बाद एफआईआर दर्ज की थी। अदालत ने दोषी तीन आरोपियों को सजा के साथ—साथ 80 हजार रुपए के जुर्माना चुकाने की भी सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार यह गड़बड़ी सितंबर, 2010 से अक्टूबर, 2012 के बीच अंजाम दी गई थी। मामला भिंड के पोस्ट आफिस का था। जिसमें भोपाल सीबीआई को जांच के बाद शिकायत दी गई थी। सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की जिसके बाद लंबी सुनवाई चली। इस मामले में सबसे पहले फर्जीवाड़ा डाक विभाग मुख्यालय ने पकड़ा था। जिसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सीबीआई को भेजी गई थी। जिसके बाद इस मामले में सीबीआई ने जुलाई, 2013 में मामला दर्ज किया था। करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद यह (Court Order) फैसला आया है। सीबीआई की तरफ से मनफूल विश्नोई और कमाल उद्दीन ने अदालत में दोषियों के खिलाफ पैरवी की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद सब पोस्ट मास्टर रहे बृजमोहन शर्मा, मेल कैरियर संत कुमार शर्मा और अखिलेश शर्मा को दोषी माना। दोषियों ने डाक विभाग के दस्तावेज में हेर—फेर किए थे। यह हेराफेरी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत करीब सवा दो लाख रुपए की रकम निकालने के लिए की गई थी। इसके लिए 21 फर्जी हितग्राही बनाए गए थे। जिसके लिए दोषियों ने पे—स्लिप और लेजर फर्जी बनाए थे। सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा सीबीआई ने जालसाजी, दस्तावेजों की कूटरचना समेत अन्य मामले में सभी को दोषी पाया। अदालत का फैसला आने के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

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