Bhopal Job Fraud: फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचे तो पुलिस को सूचना देने की बजाय भगाया, यकीन दिलाने मंत्री निवास में ले जाकर बातचीत का झांसा दिया तो मामला थाने पहुंचा

भोपाल। विधानसभा में नौकरी लगाने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया। जालसाज ने बकायदा फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया था। यह मामला भोपाल (Bhopal Job Fraud) शहर के श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र का है। इस मामले के पीड़ित नियुक्ति पत्र लेकर विधानसभा भी पहुंचे थे। लेकिन, मामला पुलिस को सौंपने की बजाय पीड़ितों को भगा दिया गया। इसके बाद जालसाज ने मंत्री निवास में ले जाकर बातचीत करने के बहाने बुलाया। वह उन्हें लेकर श्यामला हिल्स स्थित प्रोफेसर कॉलोनी में पहुंचा तो विवाद के बाद प्रकरण थाने पहुंच गया।
विधानसभा का फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया
श्यामला हिल्स (Shyamla Hills) पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 21 अप्रैल को जालसाजी, दस्तावेजों की कूटरचना समेत अन्य धाराओं में प्रकरण 69/26 दर्ज करके आरेापी को गिरफ्तार कर लिया है। आरेापी मोनू उर्फ मानवेंद्र तोमर (Monu@Manvendra Tomar) हैं। वह टीटी नगर (TT Nagar) स्थित पंचशील नगर (Panchshil nagar) इलाके का रहने वाला है। आरोपी को 22 अप्रैल की दोपहर जिला न्यायालय में पेश किया गया। उसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जा रहा है। इस संबंध में विशाल यादव पिता मुन्ना यादव उम्र 25 साल ने प्रकरण दर्ज कराया है। वह कमला नगर (Kamla Nagar) थाना क्षेत्र स्थित कोटरा सुल्तानाबाद में रहते हैं। विशाल यादव (Vishal Yadav) स्नातक हैं और पांच साल से आरोपी को पहचानते हैं। उन्होंने बताया कि नौकरी लगाने का सौदा पांच महीना पूर्व हुआ था। आरोपी ने नौकरी लगाने के नाम पर पौने दो लाख रुपए मांगे थे। एडवांस में पचास हजार रुपए और बाकी रकम नौकरी लगने के एक महीने बाद वेतन मिलने पर देना तय हुआ था। उसके झांसे में घनश्याम यादव (Ghanshyam Yadav) और अरबाज खान (Arbaz Khan) भी आ गए थे। उन्होंने भी आरोपी को एडवांस में 50-50 हजार रुपए दे दिए थे। रकम लेने के बाद उसने बकायदा विधानसभा (Vidhansabha) का प्रवेश पत्र और नियुक्ति पत्र देकर 21 अप्रैल को विधानसभा में जाकर नौकरी करने के लिए बोला था। ऐसा करने से पहले आरोपी को 21 अप्रैल की सुबह तीनों पीड़ितों ने फोन भी लगाया। तीनों को उसने माता मंदिर में भी बुलाया। यहां से वह चारों विधानसभा पहुंचे तो उन्हें भगा दिया। इसके बाद आरोपी बोला कि वह मंत्री निवास में लेकर चलता है। असली वजह सामने आएगी। लेकिन, विधानसभा अधिकारियों ने दस्तावेज को जाली बताकर भगाया था। इसलिए आरोपी की हरकतों पर पीड़ितों को शक हो गया था। प्रोफेसर कॉलोनी में तीनों पीड़ितों के साथ आरोपी की झूमाझटकी हो गई थी। तभी वहां पुलिस आ गई और उन्हें थाने ले जाया गया। यहां पहुंचने पर पूरा फर्जीवाड़े की कहानी सामने आ गई। एसीपी चंद्रशेखर पांडे (ACP Chandrashekhar Pandey) ने बताया कि अभी पूरा प्रकरण प्राथमिक विवेचना में हैं। कई तथ्यों का सामने आना बाकी है। इसलिए आरोपी से पूछताछ के लिए रिमांड मांगा जा रहा है।
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