Bhopal News: पीएम के जाते ही आदिवासियों को भूल गई भाजपा

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Bhopal News: एक—एक करके चौदह जनजातीय लोगों की थाने में दर्ज हुई गुमशुदगी

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प्रधानमंत्री इसी गेट से मंच में प्रवेश करेंगे। इससे पहले चप्पे—चप्पे पर चौकस नजर होगी। फाइल फोटो—टीसीआई

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में जनजातीय गौरव दिवस भोपाल (Bhopal News) में मनाया गया। इसके लिए सैंकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों को भोपाल लाया गया था। कार्यक्रम होने के पूर्व इन लोगों का शहर में शानदार तरीके से स्वागत किया गया। ढ़ोल—नगाड़ों की धुन में फूल बरसाते हुए स्वागत की तस्वीरें भी मैन स्ट्रीम मीडिया में दिखाई दी थी। लेकिन, कार्यक्रम संपन्न होते ही इन्हें बुलाने वाली भाजपा पार्टी के नेता उनकी सुध लेना भूल गए। हम यह बात यूं ही नहीं कह रहे। दरअसल, भोपाल के पिपलानी थाने में सोमवार को एक—दो नहीं पूरे 14 लोगों की गुमशुदगी दर्ज की गई। गुम हुए सभी लोग जनजातीय गौरव दिवस में भाग लेने आए थे।

यह बोलकर मामले को कर रहे हल्का

पिपलानी थाना पुलिस के अनुसार पहली गुमशुदगी 118/21 सोमवार रात लगभग सवा आठ बजे दर्ज की गई थी। इसके बाद आखिरी गुमशुदगी 15—16 नवंबर की दरमियानी रात लगभग पौने एक बजे दर्ज की गई। गुम हुए लोगों में शांति बाई 80 साल, बच्चू सिंह 60 साल, मुकुंदा आदिवासी 40 साल, वर्दा 55 साल, नाना बरेला 55 साल, मकना बारिया 40 साल, जागलाल भारती 55 साल, कमलेश 35 साल, सूरज सिंह 60 साल, मांगू 40 साल, बाजारु सिंह 40 साल, कमर सिंह 55 साल, गंगा दास 62 साल, सीताराम 40 साल और भैरव सिंह 40 साल है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इनके अलावा पांच अन्य गुमशुदगी दर्ज हुई है। जिसके संबंध में अभी मीडिया से जानकारी साझा नहीं की गई है। एएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि इनमें से अधिकांश लोग मिल गए है। यह व्यक्ति गलत बसों में सवार होकर अन्य जगहों पर पहुंच गए थे।

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व्यवस्थाओं की खुल गई पोल

थाना प्रभारी अजय नायर ने बताया कि आठ लोगों के घर पहुंचने की जानकारी मिल चुकी है। इस आयोजन की सफलता के लिए दिन—रात लगकर काम किया गया। छह हजार से अधिक पुलिस के अफसर और कर्मचारी तैनात थे। सैंकड़ों भाजपा कार्यकर्ता भी जुटे थे। लेकिन, आयोजन के बाद सुध नहीं लेने पर सभी अपने बगले झांक रहे हैं। इस मामले में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर (Lokendra Parashar) से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। हालांकि उन्होंने कई प्रयास करने के बावजूद फोन नहीं उठाया। यह बनी बात है कि यह बात मीडिया के सामने आते ही संगठन की किरकिरी होगी। इसलिए हर व्यक्ति पूरे मामले से बचता नजर आया।

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