MP Cop News: इनके कार्यकाल में डकैत कांपते थे सरकार ने ली थी इस काम में मदद,उम्र के आखिरी पड़ाव में जानिए नौकर क्यो निकला गद्दार

भोपाल। भारतीय पुलिस सेवा के पहले बैच के रिटायर्ड हरिवल्लभ मोहन लाल जोशी 05 मार्च को सौ साल की आयु पूरी करेंगे। वे मध्यप्रदेश पुलिस (MP Cop News) के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक भी हैं। उनके गौरव गाथा में ग्वालियर, भिंड और मुरैना में सक्रिय तीन सौ से अधिक डकैतों के आत्मसमर्पण कराने की योजना के चलते पहचान मिली थी। इस कोशिश के चलते जोशी को राष्ट्रपति का वीरता पदक भी मिल चुका है। उनके सम्मान में पुलिस ऑफिसर्स मैस में 05 मार्च को कार्यक्रम रखा गया है। इसके अलावा उन्हें सेवानिवृत्त आईपीएस एसोसिएशन भी भोजपुर क्लब में सम्मानित करेगा।
इसलिए सुर्खियों में आए
हरिवल्लभ मोहन लाल जोशी (IPS Harivallabh Mohanlal Joshi) का जन्म 5 मार्च, 1926 में राजस्थान (Rajasthan) के किशनगढ़ (Kishangarh) जिले में हुआ था। भारतीय पुलिस सेवा में आने से पूर्व उन्होंने समाचार पत्रों में भी नौकरी की है। उनका पहले बैच में 39 अधिकारी थे। चयन होने के बाद सितंबर, 1948 में उनकी पहली पोस्टिंग मिली थी। उनका चर्चित कार्यकाल उप पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर का रहा। इससे पहले वे मुरैना और भिंड में पुलिस अधीक्षक रह चुके थे। उनको पहचान डकैत छोटा नाथू गिरोह के सफाए के वक्त मिली थी। जोशी ने अपने कार्यकाल में इनकाउंटर की बजाय समर्पण पर ज्यादा ध्यान दिया था। इसलिए राज्य सरकार ने उन्हें 1981 में इसे प्रभावी तरीके से लागू करने की योजना बनाने का भी काम सौंपा था। जिसके बाद उन्होंने दस्यू उन्मूलन अधिनियम बनाया था।
दूसरे राज्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई
जोशी के कार्यकाल में समाजवादी सुधारक रहे जयप्रकाश नारायण (Jaiprakash Narayan) की मौजूदगी में दस्यू का समर्पण कार्यक्रम मुरैना जिले के जौरा में आयोजित हुआ था। उस वक्त उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली थी। उन्होंने दस्यू के पुर्नवास को ज्यादा प्राथमिकता दी थी। उनके आचरण को देखते हुए केंद्र सरकार ने उनकी सेवाओं का इस्तेमाल नगालैंड और मणिपुर में भी लिया था। मध्यप्रदेश पुलिस (MP Police) मुखिया की कुर्सी से उन्होंने मार्च, 1984 में विदाई ली थी। ऐसा करने से पहले जोशी ने राज्य पुलिस सेवा के कर्मचारियों को सेवाकाल के दौरान तीन पदोन्नति मिलने का रास्ता साफ करने कानून बनाया था। इसके अलावा जनता और पुलिस के बीच खाई पाटने के लिए उन्होंने ही थानों के उन्नयन पर काम किया।
पांच साल से टीवी देखना बंद
हरिवल्लभ मोहन लाल जोशी राजधानी के हबीबगंज स्थित अरेरा कॉलोनी (Arera Colony) में रहते हैं। जोशी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) में अध्ययन किया और अंग्रेजी में परास्नातक की डिग्री हासिल की। वे ‘गीता चिंतन’ के लेखक भी हैं तथा स्वामी विवेकानंद के व्याख्यानों का अनुवाद कर चुके हैं। उनके साथ 99 साल की उम्र में घर की देखरेख करने वाले नौकर ने प्रताड़ित किया था। जिसका मामला अप्रैल, 2025 में पुलिस थाने में पहुंचा था। वे आज भी समाचार पत्र पढ़ते हैं और कई पुस्तकों को वे पहले लिख चुके हैं। उन्होंने पांच साल से टीवी में समाचार देखना बंद कर दिया है।
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