MP Honey Trap Case : एक टारगेट पर आ गया था श्वेता का दिल, नाम के आगे बनाती थी हार्ट और लिप्स

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जांच एजेंसी के हाथ लगी डायरी ने उगले राज, हवाला से आती थी वसूली की रकम

MP Honey Trap Case
श्वेता जैन

भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित मामले (MP Honey Trap Case) में हर दिन नया खुलासा हो रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रहीं है, चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे है। अब एक डायरी (Dairy) सामने आई है। ये डायरी श्वेता स्वप्निल जैन (Shweta Jain) की बताई जा रही है। इस डायरी ने जो राज उगले है। उससे हनी ट्रैप (Honey Trap) गैंग के छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) कनेक्शन का खुलासा हुआ है, साथ ही ये बात भी सामने आई है कि हनी ट्रैप गैंग हवाला (Hawala) के जरिए रकम लेती थी। रिवेयरा टाउन (Riviera Town) में रहने वाली श्वेता जैन टारगेट (Target) को अपने हुस्न के जाल में फंसाती थी और फिर उसे हनीट्रैप (Honey Trap) का शिकार बना लिया जाता था। ब्लैकमेलिंग (Black Mailing) की पूरी रकम का रिकॉर्ड भी रखा जाता था।

हनीट्रैप का छत्तीसगढ़ कनेक्शन

शहद चखने का काम केवल मध्यप्रदेश के नेताओं, अधिकारियों और व्यापारियों ने ही नहीं किया है। श्वेता एंड कंपनी के जाल में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गोवा के नेता भी फंसे हुए थे। डायरी का खुलासा करने वाली न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक हनीट्रैप में फंसे छत्तीसगढ़ के रसूखदारों से हवाला के जरिए रकम वसूली गई थी। डायरी में सीजी हाउस नाम का कोडवर्ड मिला है। हनीट्रैप गैंग ने इस कोडवर्ड वाले शख्स से 3 करोड़ रुपए वसूले थे। हवाला के जरिए 2 करोड़ रुपए गोवा में और 1 करोड़ रुपए भोपाल में कलेक्ट किए गए थे।

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काम के हिसाब से हिस्से में बंटती थी रकम

चूंकि ग्राहकों को फंसाने की जिम्मेदारी श्वेता जैन की थी, लिहाजा उसका हिस्सा सबसे बड़ा था। हनीट्रैप में अहम भूमिका निभाने वाली श्वेता जैन वसूली गई रकम का 45 फीसदी हिस्सा रखती थी। सूत्रों के मुताबिक गैंग की सबसे छोटी सदस्य मोनिका यादव को 30 फीसदी और आरती को 15 फीसदी रकम मिलती थी। आरती का काम वीडियो शूट करने का था। खूफिया कैमरों के जरिए वो वीडियो बना लेती थी।

टारगेट पर आ गया था श्वेता का दिल

डायरी से हुए खुलासे के मुताबिक श्वेता जैन को एक टारगेट से प्यार हो गया था। हनीट्रैप में फंसाए गए एक आसामी पर श्वेता जैन का दिल आ गया था। लिहाजा डायरी में उसके नाम के आगे वो हार्ट और लिप्स का चित्र बनाती थी। डायरी में मेरा प्यार और पंछी जैसे कोडवर्ड भी मिले है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि ये कोडवर्ड किसके लिए इस्तेमाल किए गए थे। लजांच एजेंसी के हाथ लगी डायरी की द क्राइम इन्फो पुष्टी नहीं करता है। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की जांच के बाद ही कंफर्म हो सकेगा कि ये डायरी किसकी है।

तीन बार बदली एसआईटी

मध्यप्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े मामले की जांच में सरकार की छीछालेदर हो रही है। जांच के लिए गठित गई की गई एसआईटी में तीसरी बार बदलाव किया गया है। पहले आईपीएस डी श्रीनिवास वर्मा, उसके बाद संजीव शमी और अब राजेंद्र कुमार को कमान सौंपी गई है। साथ ही एसआईटी के अन्य सदस्यों को भी बदल दिया गया है। बार बार बदलती एसआईटी के पीछे अफसरों की आपसी जंग को वजह बताया जा रहा है।

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