मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बोले- दुखी मन से तीन साथियों को हटाया, ब्लैकमेल कर रहे थे

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राजस्थान में सियासी उठापटक जारी, राज्यपाल से मिले मुख्यमंत्री 

Rajasthan Politics
अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान

जयपुर। राजस्थान की सियासत (Rajasthan Politics) में भूचाल आ गया है। कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट (Sachin Pilot) को पदों से हटा दिया है। साथ ही उनके दो मंत्रियों को भी बर्खास्त कर दिया गया है। जिसके बाद पायलट का भी बयान सामने आया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं। साथ ही सचिन पायलट ने ट्विटर का प्रोफाइल भी बदल लिया है। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को मंत्रिमंडल से तीन सदस्यों को बर्खास्त करने की जानकारी दी। साथ ही गहलोत 104 विधायकों का समर्थन पत्र भी लेकर गए थे। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने समर्थन पत्र भी राज्यपाल को दे दिया है।

राज्यपाल से मिले गहलोत

राजभवन से बाहर निकलकर अशोक गहलोत ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान की सरकार को गिराने की साजिश रची। कांग्रेस विधायकों को गुमराह किया गया। गहलोत ने कहा कि कर्नाटक और मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान की सरकार को भी गिराना चाहा। विधायकों की खरीद फरोख्त की गई। इतिहास में पहली बार केंद्र में ऐसी सरकार आई है। जो धनबल के आधार पर राज्यों में जनता द्वारा चुनी गई सरकारें गिरा रही है। विधायकों को 20-25 करोड़ रुपए देकर खरीदा जा रहा है।  ऐसा करना लोकतंत्र के लिए खतरा है।

पायलट को पूरा मौका दिया

साथ ही गहलोत ने कहा कि जनता ने जिन विधायकों को 5 साल के लिए जिताया था, वो चुनाव में जाएंगे तो जनता ही पूछेगी कि इस्तीफा क्यों दिया। गहलोत का कहना है कि सचिन पायलट को पूरा मौका दिया गया। कल और आज बुलाई गई सीएलपी की बैठक में उनका और उनके समर्थकों का इंतजार किया गया। लेकिन सरकार को ही ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही है। दुखी मन से तीन साथियों को हटाया है।

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सुनिए क्या कहा गहलोत ने

गहलोत ने बताया कि बीते 6 महीने से आ बैल मुझे मार जैसी स्थिति बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बनने के बाद हर विधायक का काम किया। राजस्थान की सरकार कोरोना से लड़े या इन झगड़ों में पड़े। मुख्यमंत्री पर विश्वास नहीं था तो विधानसभा अविश्वास प्रस्ताव लाना था।

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