MP Cop Gossip : मध्यप्रदेश पुलिस विभाग के भीतर की खबरें

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MP Cop Gossip : रैकेट के मुखिया की पोल खोलने कॉल गर्ल थाने पहुंची, मोबाइल में रसूखदारों के वीडियो देखकर कुछ घंटों में हो गया खेल

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग के भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। इनमें कुछ बातें सार्वजनिक हो जाती  हैं बहुत कुछ दब जाती है। ऐसे ही बातों को हमारे नियमित कॉलम (MP Cop Gossip) में किस्सों को साझा किया जाता है। हम इसके प्रस्तुतीकरण में पूर्ण सावधानी भी रखते हैं। हमारा इरादा किसी व्यक्ति अथवा संस्था को कम या ज्यादा आंकना नहीं होता है। बस बताने के लिए राज उजागर करने का काम हमारी तरफ से किया जाता है।

बाबू समझे क्या…

पुलिस विभाग में एक वाहन वाली शाखा है। जिसको मोटर ट्रांसपोर्ट कहते हैं। यह लगभग हर जिले में होती है। इसको चलाने वाला मुखिया को काफी जानकार होना पड़ता है। मसलन किस वाहन पर किस चालक को किस व्यक्ति के लिए भेजा जा रहा है। यदि तीनों में से किसी भी बात में कमीपेशी हुई मतलब अफसर की खिंचाई होना तय है। इसी शाखा से जुड़े एक अफसर जिनकी विभाग में काफी पकड़ थी वे रिटायर हो गए। उनके जाने के बाद दूसरे अफसर आए हैं। उन्होंने एक महीने तक सिरा समझने का पूरा प्रयास किया। इस प्रयास में इतनी पसीना आया कि वे बीमार हो गए। इसलिए वे काफी अरसे से अवकाश पर चल रहे हैं। हमारा कहने का मतलब तो आपको पूरा—पूरा समझ आ ही गया होगा। जिन्हें समझाना होगा वे भी सतर्क हो गए होंगे।

होटल—होटल पर नहीं टला मामला

पिछले दिनों एक एफआईआर दर्ज की गई। इस घटना की शुरुआत होटल से हुई थी। फिर दूसरी होटल में कुटाई फिर सड़क पर संग्राम और नगर भ्रमण का भी पूरा चित्रण किया गया था। इस मामले में चौंका देने वाला मामला यह था कि यह दो जोन के बीच का मामला था। जिसके लिए बहुत बड़े—बड़े लोगों के फोन भी पहुंचे। इसके बाद ठीकरा किस व्यक्ति के सिर फोड़े वह तलाशा गया। नतीजतन हल भी निकला और नतीजे भी मिले। ठीकरा जिस पर फूटा उन थाना प्रभारी महोदय ने कलम ऐसी फंसाई कि जिन्हें फंसाना था वे बच गए और जिनसे बचना था वे भी खुश हो गए। इसे कहते है राजनीतिज्ञों के साथ राजनीति।

यकीन तब हुआ जब एफआईआर देखी…

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हमें इस बात पर यकीन नहीं था। इसलिए हमने एफआईआर बुलाई। वह भी दर्ज थी। लेकिन, मामला जिस अंदाज में पलटा गया वह सुनकर हम हैरान हैं। यह पूरा प्रकरण (MP Cop Gossip) एक ऐसे जिले का है जिसका नाम बदला गया है। उस जिले की एक कॉल गर्ल का उसके मुखिया से सीधे आमना—सामना हो गया। वह उसके खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए एक थाने पहुंच गई। उसने एक—एक करके कई वीडियो मोबाइल में दिखा दिए। जिसके बाद कई घंटियां बजने लगी और हड़कंप मचने लगा। दरअसल, वीडियो में दिखाई दे रहे कुछ चेहरे शक्तिशाली थे। फिर ज्ञान का फॉर्मूला चला और एक मुकदमा धारा 294 और 506 का दर्ज कर लिया गया। जबकि कॉल गर्ल जो बोल रही थी वह पूरी एफआईआर से गायब थी। उस युवती को उतना पड़ना लिखना भी नहीं आता है। अब वह खामोश है यह सोचकर कि उसको यहां—वहां भेजने वाला कितना पॉवरफूल हैं। हकीकत यह है कि उसके मुखिया से जुड़े लोग पॉवरफुल थे जो उसको तो बचा ही ले गए अपना भी दामन मोबाइल से साफ कर गए।

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