MP Scam News: कल्चर डायरेक्टोरेट विवादों में घिरता देख पुलिस पर दबाव का ‘चाबुक’ चला

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MP Scam News: पांच दिन चले रिमांड के दौरान राजकुमार पांडे से पूछताछ की बजाय खानापूर्ति करके उसे जेल वारंट पर रवाना किया

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। मध्यप्रदेश का संस्कृति संचालनालय (Directorate Of Culture) सिक्योरिटी एजेंसी के ठेके में क्या घिरा वह पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में आ गया। जिस कारण उसने दबाव का ‘चाबुक’ चलाया और जांच कर रही ​हबीबगंज (MP Scam News) थाना पुलिस को मौन की मुद्रा में आने पर मजबूर कर दिया। इस मामले के मुख्य आरोपी राजकुमार पांडे को ढ़ाई महीने बाद पांच दिन पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया था। जिसमें कई तथ्य निकलकर मीडिया में लीक हुए तो किरकिरी से बचने जांच अधिकारी से लेकर सारे अफसर बैकफुट में आ गए।

मामले को ठंडे बस्ते में डालने की मंशा

पुलिस सूत्रों के अनुसार राजकुमार पांडे (Advocate Rajkumar Pandey) के खाते का ट्रैक रिकॉर्ड निकलकर सामने आता तो उसमें कई रसूखदार बेनकाब होने का भय था। लेन—देन से जुड़े बैंक खाते मीडिया के रास्ते लीक होते तो कई सफेदपोश की किरकिरी होती। जिस कारण पुलिस पर दबाव डालकर मामले को ठंडे बस्ते में ले जाने का इशारा हुआ। जिसके बाद पांच दिन रिमांड पर लिए गए राजकुमार पांडे को दोबारा पूछताछ के लिए आवेदन ही नहीं लगाया गया। जबकि राजकुमार पांडे ने जो तथ्य बताए थे उसमें मेडम शुक्ला (Madam Shukla) को भी आरोपी बनाने का काम करके उसका आमना—सामना कराया जाना था। इसके अलावा बैंक खातों जिनमें करोड़ों रुपए की सरकारी राशि जमा हुई वह जिन अफसरों के हस्ताक्षर से जारी की गई उनसे भी पूछताछ होना थी। लेकिन, इन तमाम कवायदों से बचने मामले की जांच कर रहे एएसआई सुधाकर शर्मा (ASI Sudhakar Sharma) ने चुप्पी साध ली। हालांकि जिस तरह का फर्जीवाड़ा किया गया है उसमें जांच करने वाला अधिकारी एसआई स्तर का भी होना था। थाने के अफसरों ने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया। वहीं एएसआई सुधाकर शर्मा को इस तरह के फर्जीवाड़े का पूर्व में ज्यादा अनुभव भी नहीं हैं। इसलिए वे स्वयं भी इस बड़े घोटाले जिसमें कई सफेदपोश है उनके शामिल होने की संभावनाओं को जानने के बाद निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। जब उनसे इन आरोपों और प्रचलित जन भावनाओं पर स्थिति ​स्पष्ट करने के लिए संपर्क किया गया तो वे काफी तनाव मुद्रा में संवाद करते नजर आए। उन्होंने कई सवालों के जवाब में सिर्फ एक ही उत्तर दिया कि राजकुमार पांडे को जेल भेज दिया गया है। इसके बाद जांच का कोई विषय उनके सामने दिखाई नहीं दे रहा।

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क्या है पूरा मामला

अधिवक्ता राजकुमार पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने कल्चर डायरेक्टोरेट में कई फर्जी बिल पेश किए। सिक्योरिटी एजेंसी (Security Agency) के नए टेंडर जारी होने पर फर्जीवाड़ा सामने आया था। हबीबगंज (Habibganj) थाना पुलिस ने इस मामले में मार्च, 2026 में जालसाजी और दस्तावेजों की कूटरचना का प्रकरण दर्ज किया था। राजकुमार पांडे को गिरफ्तार करने के बाद ह​बीबगंज थाना पुलिस ने पांच दिन की रिमांड पर लिया था। राजकुमार पांडे के खिलाफ जालसाजी का दर्ज यह पहला मामला नहीं हैं। वे अधिवक्ता होने के बावजूद क्लासिक सिक्योरिटी एजेंसी (Classic Security Agency) चला रहे थे। उनके खिलाफ जानलेवा हमला, मारपीट, सरकारी आदेशों की अवहेलना, जालसाजी समेत दस प्रकरण पहले से दर्ज है। यह सारे मामले टीटी नगर, एमपी नगर, कमला नगर और हबीबगंज थाने में दर्ज है।

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