Bhopal News: सीसीटीवी फुटेज के साथ सुरक्षा देने वाली कंपनी ने पुलिस को सौंपा आवेदन,एक पखवाड़े के भीतर तीन स्थानों पर योजनाबद्ध तरीके से दिया वारदात को अंजाम,आधा दर्जन संदेहियों को हिरासत में लेकर चल रही पूछताछ,इस तकनीक पर अब तक पांच लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकाली

भोपाल। राजधानी में भारतीय स्टेट बैंक के ई-कॉर्नर सेंटर बदमाशों के निशाने पर थे। इन ई-कॉर्नर में नकदी निकालने के अलावा जमा करने की सुविधाएं होती हैं। अब तक एक दर्जन से अधिक वारदातें भोपाल (Bhopal News) शहर में अंजाम दी जा चुकी है। यह घटना भोपाल शहर के शाहपुरा थाना क्षेत्र में हुई है। यह पूरा मामला भारतीय स्टेट बैंक की आंतरिक पड़ताल के बाद निकलकर सामने आया है। जिसके बाद सुरक्षा प्रदान करने वाली कंपनी की तरफ से शाहपुरा थाने को आवेदन दिया गया।
जहां सिक्यारिटी गार्ड नहीं थे उस एटीम को बनाया निशाना
शाहपुरा (Shahpura) थाना पुलिस के अनुसार आरोपियों ने शाहपुरा इलाके की चार एटीएम में वारदात को करना कबूला है। जबकि कोर सिक्योरिटी सर्विस प्रायवेट लिमिटेड (Core Security Services Private Limited) ने यह संख्या एक दर्जन से अधिक बताई है। इस संबंध में कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक चौरिया (Vivek Chauriya) पिता स्वर्गीय किशोर चौरिया ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। वे सौरभ कॉलोनी (Saurabh Colony) में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बैंक को अभी तक की पड़ताल में करीब पांच लाख रुपए से ज्यादा की रकम निकलने की जानकारी मिली है। बैंक की तरफ से अभी भी पड़ताल जारी है। यह सारी वारदातें एक पखवाड़े के भीतर अंजाम दी गई है। आरोपियों ने अधिकांश उन एटीएम को निशाना बनाया जहां सिक्यारिटी गार्ड नहीं थे।
एटीएम की इस तकनीकी कमी का उठाते हैं फायदा
ई-कॉर्नर (E-Corner) जहां रकम जमा और निकाली जाती हैं उन्हें निशाना बनाने का काम नया नहीं हैं। बैंक की तरफ से जमा की जाने वाली मशीन में पैसा पूरा जमा किया जाता है। जैसे ही उसका शटर बंद होता है तो उसमें 20 सेकंड का समय लगता है। इसी दौरान मशीन से नोट वापस खींच लिए जाते हैं। यह मामला तब उजागर होता है जब मशीन में जमा रकम निकालने सुरक्षा कंपनी आती हैं। वहां जमा के मुकाबले मौजूदा राशि में अंतर पाने पर यह फर्जीवाड़ा कई बार उजागर हो चुका है।
अब तक इतनी संख्या
एटीएम मशीन में जाकर कैश ट्रैपिंग की सर्वाधिक 77 घटनाएं 2021 में प्रकाश आई थी। यह सारी वारदातें (Bhopal News) भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों में अंजाम दी गई थी। इस साल अब तक 13 प्रकरण पुलिस को पता चले हैं। जिसमें सर्वाधिक भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम (SBI ATM) को निशाना बनाया गया है। बैंक की तरफ से इस तकनीकी खामियों को पांच साल बाद भी दूर नहीं किया जा सका है।
सात जुलाई को हो सकता है खुलासा

पुलिस सूत्रों की माने तो इस प्रकरण से जुड़े आधा दर्जन युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह आरोपी बैंक की तरफ से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर हिरासत में लिए गए हैं। प्राथमिक पड़ताल में करीब पांच लाख रुपए की चपत इसी तकनीक को अपनाकर लगाने की बात सामने आ रही है। पुलिस इस संबंध में सात जुलाई को कुछ बिंदुओं पर खुलासा कर सकती है।
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