Bhopal Crime Trend: लोगों में लॉक डाउन का असर या फिर तीखी होती धूप की मार

मनोचिकित्सकों की अलग—अलग राय, हालात को लेकर चिंता जता रहे लोगों के लिए संवेदनशील समय

Bhopal Crime Trend
सांकेतिक चित्र

भोपाल। (Bhopal Crime News In Hindi) मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस (Madhya Pradesh Coronavirus News) के चलते लॉक डाउन चल रहा है। यह लॉक डाउन भोपाल, इंदौर और उज्जैन में ज्यादा सख्त है। कई इलाके क्वारेंटाइन चल रहे है। वहीं सैंकड़ों लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। इन सबके बावजूद मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही। वहीं मौत का आंकड़ा भी कम होने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच भोपाल (Bhopal Suicide Case) में एक सप्ताह के भीतर में आधा दर्जन से अधिक मामले आत्महत्या के आ गए। इन मामलों ने बहस (Bhopal Suicide Trend Debate) छेड़ दी हैं कि कहीं यह कोरोना के चलते घर में रहने वाले लोगों के धैर्य को कमजोर कर रहा है या फिर तीखी होती धूप का यह असर है। द क्राइम इंफो ने इस विषय पर शहर के दो मनोचिकित्सकों (Bhopal Psychiatrist Opnion Poll) की राय जानी। हालांकि दोनों विषय विशेषज्ञों की राय (Bhopal Suicide Trend Analytical News) अलग—अलग थी। लेकिन, यह बात समान थी कि अकेलापन जरुर व्यक्ति को आक्रामक रुख के लिए उकसाता है। इसके लिए कुछ सुझाव भी दिए गए हैं।

बैरागढ़ इलाके में 23 अप्रैल को अर्चना यादव (Archna Yadav Suicide Case) ने एक साल की बेटी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद छत से कूदकर आत्महत्या कर लिया था। इस घटना ने शहर को झकझोंर दिया था। पति मनोज यादव (Manoj Yadav) ने कहा था कि वह डिप्रेशन में चल रही थी। जिसका इलाज भी चल रहा था। लेकिन, वह दवा भी नहीं खाती थी। इस घटना के बाद गोविंदपुरा इलाके में महिला समेत दो व्यक्तियों ने तो शाहपुरा, कोलार और छोला मंदिर थाना क्षेत्र में फांसी (Bhopal Suicide Cases) के मामले हुए। मतलब साफ था कि यह घटनाएं सोचने को मजबूर कर रही थी कि आखिर क्या वजह है कि लोगों के धैर्य ने जवाब खो दिया है। इसकी हकीकत मालूम करने की कोशिश की गई। इसके लिए मनोचिकित्सक डॉक्टर कॉकोली राय (Dr Kakoli Rai) और डॉक्टर रुमा भट्टाचार्य (Dr Ruma Bhattacharya) से चर्चा की गई। इस चर्चा में यह सारी घटनाएं बताते हुए दोनों चिकित्सकों से एक जैसे ही सवाल पूछे गए। इसके जवाब दोनों चिकित्सकों ने अलग—अलग दिए।

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लोगों के व्यवहार में परिवर्तन

शहर में लॉक डाउन चल रहा है। वहीं गर्मी भी असर दिखा रही है। ऐसे में लोगों के व्यवहार (Bhopal Lock Down Behaviour) में परिवर्तन आना लाजिमी है। यह कहना है मनोचिकित्सक डॉक्टर कॉकोली राय का। उन्होंने कहा व्यक्ति में यह टेंडेंसी होती है कि वह वाहवाही सुने। यह हर आयु वर्ग में मिलती है। जैसे स्कूल जाने वाले बच्चे को टीचर, आफिस में बॉस से या फिर घर में आपस में यह होता है। लेकिन अभी ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। हर आयु वर्ग में उसके पेशे के अनुसार चैलेंज महसूस हो रहे हैं। यह चैंलेज उसके मन को आक्रामक बना रहे हैं। तनाव, परेशान और अवसाद में जिसने आक्रामकता को संभाल लिया वह निर्णय ले लेता है। लेकिन जो नहीं ले पाता वह घातक कदम उठाने लगता है। डॉक्टर कॉकोली राय ने कहा इस अवस्था को पोस्ट स्ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसआर्डर कहते हैं। ऐसे मरीज के लिए कोई बात करने वाला व्यक्ति होना चाहिए।

ब्रेन न्यूरो इनबैंलेस होना वजह
डॉक्टर रुमा भट्टाचार्य ने कहा कि कोई व्यक्ति जब सुसाइड करता है तो वह तनाव का आखिरी दौर होता है। उसमें  व्यक्ति चुनौतियों से निपटने की बजाय आत्मघाती कदम उठाने लगता है। डॉक्टर रुमा भट्टाचार्य ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान ही उनके पास व्यक्ति के आक्रामक होने के मामले आए है। इसमें एक व्यक्ति ने आत्महत्या के लिए पेट में चाकू मार लिया था। उसको बंसल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी तरह एक व्यक्ति पांचवे माले से कूदकर आत्महत्या के लिए पहुंच गया था। मनोचिकित्सक ने कहा कि लॉक डाउन या फिर गर्मी को इसकी वजह नहीं मान सकते। ऐसा होता तो इस अवस्था से शहर के कई लोग गुजर रहे हैं। आत्महत्या एक मानसिक बीमारी होती है। व्यक्ति को जब जीवन में अंधकार, ग्लानि, अफसोस या फिर घबराहट ज्यादा होने लगती है तो वह ऐसे कदम उठाता है।

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यह है सटीक उपाय

मनोरोगी कोई भी हो सकता है। दोनों चिकित्सकों ने बताया कि बात—बात में कोई चीज दोबारा करना जैसे उंगली बजना, चुटकी बजाना, पैर हिलाना भी एक तरह की विकृति हो सकती है। यह शुरुआती होती है जिसके बाद व्यक्ति अवसाद में घुसते चला जाता है। बीमारी से बचने का सबसे आसान तरीका है अधिक से अधिक बातचीत करें। अपनी समस्याएं दूसरों से शेयर करें। अकेला या फिर हताश महसूस होने जैसा लग रहा है तो वह दूसरों को बताए। लोगों से भी अपील है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी बात रख रहा है तो उसकी बात पर हंसने की बजाय उसको संबल प्रदान करें। ऐसे व्यक्तियों को हमेशा व्यस्त रहना चाहिए। घर की सफाई, किताब पढ़ना या इनडोर गेम खेलना सबसे अच्छा विकल्प है।

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