हाय रे गरीबी…भूख मिटाने के लिए मिट्टी खाते बच्चे, देश के हालात बयां करती मां का ‘सरेंडर’

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भुखमरी के आंकड़ों ने चौकाया था, सामने आ रहे भयावह परिणाम डरा रहे है

इस झोपड़ी में रहते थे बच्चे

तिरुवनंतपुरम। भुखमरी से जूझते देश के हालात को बयां करती ये खबर आपको झकझोर कर रख देगी। सोचने पर मजबूर करेगी, हम कहां पहुंच गए हैं। अक्टूबर में ही वैश्विक भूख सूचकांक (GHI) के आंकड़े सामने आए थे। 17 अक्टूबर को जारी की गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भुखमरी से जूझ रहे 117 देशों में भारत 102 वें स्थान पर हैं। रिपोर्ट ने चौंकाया था, लेकिन उसके भयावह परिणाम हमें डरा रहे हैं। देश के सबसे शिक्षित प्रदेशों में अव्वल केरल (Kerala) से सामने आई इस खबर ने हिला कर रख दिया है। सोचिए जब साक्षर प्रदेश में यह स्थिति हैं तो बाकि देश में क्या हाल होगा ?

तिरुवनंतपुर (Thiruvananthpuram) के कैथामुक्कू (Kaithamukku) में रेलवे ट्रेक के किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाले एक परिवार की गरीबी अचानक सुर्खियों में आ गई है। इसकी वजह एक मां का ‘सरेंडर’ है। 6 बच्चों का पेट भरने में नाकाम मां ने मजबूरी में अपने 4 बच्चे स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (State Council For Child Welfare) को सौंप दिए। गरीबी के भंवर में फंसे बच्चे पेट भरने के लिए मिट्टी खाकर पेट की आग बुझाते थे। काउंसिल ने किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समिति की मंजूरी के बाद चार बड़े बच्चों, जिनमें 7 व 5 साल के दो लड़के और 4 व 3 साल की लड़कियों की जिम्मेदारी ली।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी वो स्थानीय लोग हैं, जिन्होंने शनिवार को हेल्पलाइन नंबर 1517 पर कॉल कर परिवार की दुर्दशा के बारे में बताया, साथ ही बताया कि बच्चे इतनी बड़ी मुसीबत में हैं कि मिट्टी खाकर गुजारा कर रहे है। जिसके बाद काउंसिल की थानाल परियोजना, जो बच्चों को मुसीबत में सहायता प्रदान करती है, उसके जिम्मेदार अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम उस झोपड़ी में पहुंची, जहां परिवार रह रहा था।

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मौके का हाल बताते हुए अधिकारी दीपक ने कहा कि तिरपाल और फ्लैक्स से बनी झोपड़ी को किसी भी हाल में घर नहीं कहा जा सकता था। उसके अंदर मौजूद 6 बच्चों की मां स्टोव पर सिर्फ पानी उबाल रही थी। उसने कहा कि यदि सरकार ने बच्चों की जिम्मेदारी नहीं ली वे भूख से मर जाएंगे। बच्चों का पिता एक शराबी है जो दिहाड़ी मजदूर है।

बच्चों के भरण-पोषण न करने के बावजूद पिता उन्हें काउंसिल के हवाले करने को तैयार नहीं था। जबकि मां अपने बच्चों को तड़प-तड़प कर मरता नहीं देख सकती थी। लिहाजा चार बच्चों को काउंसिल के हवाले कर दिया गया। वहीं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के निर्देश पर महिला और उसके दो छोटे बच्चों को महिला मंदिर में शिफ्ट कर दिया गया।

परिवार की दुर्दशा सामने आने के बाद तमाम नेता सामने आ गए। तिरुवनंतपुरम के मेयर श्रीकुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिला को अस्थायी नौकरी देने का वादा किया। गरीबों के लिए बनाई गई मल्टियों में एक फ्लैट देने की बात कही, साथ ही कहा कि बच्चों की पढ़ाई का खर्च निगम उठाएगी।

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