Demonetization Effect: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के सबसे जबरदस्त फैसले के तीन साल पूरे

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आज ही के दिन प्रधानमंत्री ने ऐलान किया था कि पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट रात बारह बजे से लीगल टेंडर नहीं रहेंगे, पेट्रोल पंप पर एक हजार और पांच सौ रुपए का नोट बदलवाने के लिए 100—100 रुपए का पेट्रोल भरा रहा था शहर

Demonetization Effect
भारत सरकार की बंद हुई भारतीय मुद्रा के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी— फाइल फोटो

भोपाल। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के पहले कार्यकाल (First Term) के सबसे बड़े फैसले (Major Decisions) नोटबंदी (Demonetization) के 8 नवंबर को पूरे तीन साल हो जाएंगे। इसी दिन प्रधानमंत्री ने रात 8 बजे देश के नाम संबोधित संदेश (Prime Minister Briefing) में इस बात का ऐलान किया था। इस घोषणा के चंद मिनटों के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया था। हालात यह थे कि भोपाल शहर के नागरिक पांच और एक हजार रुपए के नोट लेकर कई पेट्रोल पंपों में जाकर 100—100 रुपए का पेट्रोल भरा रहे थे। एटीएम में कोई जाना नहीं चाह रहा था। बैंकों के बाहर नोट बदलने के लिए कई दिनों तक कतारें लगी रही। काम की आपाधापी के बीच रातीबड़ थाना क्षेत्र में एक बैंक अधिकारी की मौत भी हुई थी।

फैसले को लेकर 8 नवंबर को देशभर की मीडिया चैनल में पैनलिस्ट बैठकर डिबैट भी करेंगे। देश के आर्थिक जानकार देश के आर्थिक हालात पर नजर दौड़ाएंगे। इस फैसले को पूरे तीन साल हो गए हैं। लोग आज भी उस दिन को सोचकर सहम जाते हैं। कई घरों में आज भी पुराने नोट रखे हुए हैं। क्योंकि उन्हें बदले जाने की मियाद समाप्त हो चुकी है। इन सबके बीच फैसले से किसे फायदा और किसे नुकसान हुआ यह सच्चाई आज तक किसी के सामने नहीं आ सकी है। नोटबंदी का फैसला इतना गोपनीय था कि उसे सुनकर हर कोई हैरान हो गया था। प्रधानमंत्री ने इस फैसले के लिए तीन कारण गिनाए थे। उन्होंने कहा था कि इससे कालेधन (Black Money), भ्रष्टाचार और आतंकवाद (Terrorism) पर असर पड़ेगा। इन्हें परास्त करने के लिए प्रधानमंत्री ने यह कड़ा कदम उठाने का दावा किया था।

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आयकर ने छेड़ी थी मुहिम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का कहना था कि इस फैसले से अघोषित संपत्ति (Undisclosed Assets) का राज सरकार को पता चल जाएगा। इसके अलावा नोटबंदी से इंटरनेट बैंकिंग को बढ़ावा दिया जाना भी था। ताकि भ्रष्टाचार (Corruption) और कमीशन—दलाली जैसे सेक्टरों की कमर तोड़ी जा सके। इसमें मोदी सरकार बहुत हद तक कामयाब हो सकी है। इस फैसले से इंटरनेट बैंकिंग (Internet Banking) का चलन बढ़ गया है। फैसले के बाद रिजर्व बैंक (Reserve Bank Of India) ने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की है। जिसमें कहा गया है कि दशमलव 7 फीसदी नोट वापस नहीं आ सके हैं। नए नोट छापने में आरबीआई को करीब साढ़े 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का खर्च उठाना पड़ा था।

नेपाल सरकार को आज भी इंतजार
नोटबंदी के इस फैसले से भारत ही नहीं उसके पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान, नेपाल पर भी उसका असर पड़ा था। सबसे ज्यादा असर नेपाल (Nepal Government) को उठाना पड़ा। दरअसल, दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इसलिए दोनों देशों में नोट भी धड़ल्ले से चलते हैं। लेकिन, इस फैसले के कारण करोड़ों रुपए नेपाल रिजर्व बैंक (Nepal Reserve Bank) के पास आज भी जमा है। इन रकम को भारत सरकार ने वापस नहीं लिया है। इस बात को लेकर नेपाल सरकार कई बार भारत के सामने अपनी बात रख चुका है। इस मुद्दे पर भारत सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। यह बातचीत हाल ही में भोपाल नेपाल के नवनियुक्त राजदूत ने मीडिया से साझा की थी। उन्होंने कहा था कि नेपाल सरकार अभी भी नोट बदलने का प्रयास कर रही हैं। इस कारण नेपाल में अब 500 और 2000 रुपए के नए नोट का चलन भी नेपाल सरकार ने बंद कर दिया है। इस कारण भारत के कारोबारियों को उसका खामियाजा उठाना पड़ रहा है।

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