Bhopal News: डॉक्टरों की आंतरिक लड़ाई में पार्टी बन रही भोपाल पुलिस

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Bhopal News: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गैरहाजिर रहती है प्रभारी महिला चिकित्सक, सीएमओ के आदेश ने मैदानी पुलिस कर्मचारियों को मुसीबत में डाला

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रातीबड़ थाना, जिला भोपाल— फाइल फोटो

भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल के स्वास्थ्य सिस्टम कई गंभीर मौकों पर बेनकाब होता रहा है। महकमे में स्टाफ की कमी है यह जानते हैं। लेकिन, जो है वह भी समर्पित भाव से काम नहीं करते हैं। इस कारण उसका खामियाजा जनता को भोगना पड़ता है। ताजा मामला भोपाल (Bhopal News) के रातीबड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। इस स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही के चलते पुलिस विभाग इन दिनों काफी परेशान है। दरअसल, यहां तैनात महिला चिकित्सक ड्यूटी से नदारद रहती है। इतना ही नहीं वे जब रहती भी है तो मैदानी पुलिस कर्मचारियों को घंटों इंतजार के बाद उनके साथ आए मरीजों का इलाज करती है।

इसलिए हो रही है समस्या

भोपाल सीएमओ डॉक्टर प्रभाकर तिवारी (Dr Prabhakar Tiwari) ने पिछले दिनों आदेश निकाला है कि रातीबड़ थाने से संबंधित पीएमएलसी रिपोर्ट जेपी अस्पताल के चिकित्सक नहीं देखेंगे। इसलिए रातीबड़ थाने के स्टाफ को वहां जाना मजबूरी भी है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक अर्चना जिवने (Dr Archna Jiwne) तैनात है। गुरुवार को रातीबड़ थाने से पुलिस कर्मचारी गंभीर रूप से जख्मी नन्नू लाल पाल (Nannulal Pal) को ले गए थे। उस पर जानलेवा हमला हुआ था। अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं मिली तो स्टाफ जख्मी को जेपी अस्पताल (JP Hospital) ले गया। यहां भी चिकित्सकों ने पीएमएलसी लिखने से यह बोलकर इंकार कर दिया कि वह रातीबड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला है। काफी परेशान होने के बाद जख्मी को हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) ले जाया गया। इस समस्या का हर दूसरे—तीसरे दिन पुलिस महकमा सामना कर रहा है। इधर, लापरवाह डॉक्टर अर्चना जिवने से कोई सफाई भी नहीं मांगी जाती है।

सबकुछ सुना फिर नेटवर्क की समस्या बताकर यह किया

इस मामले में सीएमओ प्रभाकर तिवारी से प्रतिक्रिया मांगी गई। उन्होंने पूरी समस्या सुनी फिर उसके बाद संवाददाता की तरफ से नेटवर्क इश्यू बताकर कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्हें जब दूसरे नंबर से कुछ देर बाद कॉल किया गया तो सीएमओ का फोन बंद हो गया था। वहीं इन संगीन आरोपों पर डॉक्टर अर्चना जिवने से भी संपर्क किया गया। उन्होंने भी फोन नहीं उठाया जबकि भेजे गए संदेश का भी जवाब उन्होंने नहीं दिया। इसके अलावा एसीपी टीटी नगर संभाग चंद्रशेखर पांडे (ACP Chandra Shekhar pandey) से इस गंभीर समस्या पर मैदानी कर्मचारियों को लेकर निदान करने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह विषय जेपी अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रबंधन का बताकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया। जब उनसे दूसरा सवाल पूछा गया कि यदि पुलिस कस्टोडियल में फरियादी को कोई जनहानि होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा के जवाब में वे कोई सटीक उत्तर ही नहीं दे सके।

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