MP Cop News: डीसीपी ने रीडर को लाइन हाजिर करके जांच बैठाई, पद का इस्तेमाल करके गवाह को धमकाने नोटिस देकर बुलाया

भोपाल। राजधानी की एक एसीपी कोर्ट में रिश्वत लेकर बैल ऑर्डर देने का संगीन मामला सामने आया है। इन आरोपों को लेकर बकायदा डीसीपी के पास शिकायत भी हुई है। जिसके बाद एसीपी कोर्ट (MP Cop News) के रीडर को लाइन हाजिर करके मामले की जांच करने आदेश दिए गए हैं। वहीं आरोप है कि एसीपी कोर्ट की तरफ से जांच को प्रभावित करने के लिए गवाह को नोटिस देकर धमकाया जा रहा है।
चार आरोपियों में से सिर्फ एक व्यक्ति को जमानत
अयोध्या नगर (Ayodhya Nagar) इलाके में रहने वाले जनार्दन मिश्रा (Janardan Mishra), चिराग मिश्रा (Chirag Mishra), प्रेमनारायण और प्रियांशु मिश्रा (Priyanshu Mishra) के खिलाफ महिला थाने (Mahila Thana) में घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसके बाद गोविंदपुरा एसीपी कोर्ट (Govindpura ACP Court) में भी उन लोगों का प्रकरण चला। प्रकरण के आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता बनवारी शर्मा (Advocate Banwari Sharma) ने जमानत के लिए आवेदन लगाया। लेकिन, एसीपी कोर्ट में तैनात रीडर ने 3 मार्च को अधिवक्ता से सात हजार रुपए की रिश्वत मांगी। प्रकरण के तीनों आरोपियों को जमानत नहीं दी गई। जबकि उसी प्रकरण में एक अन्य आरोपी को जमानत 7 मार्च को दे दी गई। इस भ्रष्टाचार की उसी दिन मौखिक शिकायत अधिवक्ता ने डीसीपी जोन—2 विवेक सिंह (DCP Vivek Singh) से कर दी थी। आदेश की कॉपी 12 मार्च को विरोध दर्ज कराने पर दी गई। लेकिन, आदेश में 7 मार्च को ही उसे स्वीकारने का दबाव अधिवक्ता पर बनाया गया। इस कारण अधिवक्ता ने 12 मार्च को डीसीपी कार्यालय में लिखित में शिकायत दर्ज करा दी। आवेदन के साथ अधिवक्ता ने ऑडियो भी अवतार सिंह (Avtar Singh) की भेजी थी।
एसीपी कोर्ट के दूसरे कर्मचारियों से फोन लगाए
इस मामले में रीडर अवतार सिंह (Reader Avtar Singh) जब फंसते दिखे तो उन्होंने एसीपी कोर्ट के ही अन्य कर्मचारियों के नंबर से प्रकरण में महत्वपूर्ण गवाह को 6 से 9 अप्रैल के बीच कई बार फोन लगाया। उससे पैसा लेकर मामले में समझौता करने के लिए भी बोला गया। पीड़ितों की तरफ से दावा किया गया है कि रीडर का कहना था कि रिश्वत की रकम एसीपी को भी देना होती है। मामले (MP Cop News) में जांच चलने की जानकारी होने के बावजूद प्रकरण में आरोपी से चार हजार रुपए का जबरिया बाउंड भराया गया। ऐसा करने के खिलाफ भी डीसीपी कार्यालय में 11 अप्रैल को लिखित में शिकायत अधिवक्ता की तरफ से दर्ज कराई गई। ऐसा करने पर विरोध करने पर अधिवक्ता के साथ हाथापाई भी की गई। जिसके बाद अधिवक्ता की तरफ से जेपी अस्पताल (JP Hospital) में जाकर मेडिकल कराया गया और गोविंदपुरा थाने में प्रकरण दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया। एफआईआर दर्ज नहीं करने को लेकर भी डीसीपी कार्यालय में आवेदन दिया गया है।
आरोपों को लेकर यह बोले अधिकारी

आरोपों को लेकर हुई शिकायत से संबंधित समस्त दस्तावेज हमारे पास उपलब्ध है। इस मामले में डीसीपी जोन—2 विवेक सिंह (DCP Vivek Singh) से प्रतिक्रिया ली गई। उन्होंने कहा कि मामले की जांच एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी (Additional DCP Gautam Solanki) कर रहें है। रीडर को लाईन हाजिर कर दिया है। इस मामले में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की भी भूमिका संदिग्ध है जिसकी पड़ताल की जा रही है। इधर,आरोपों को लेकर एसीपी गोविंदपुरा अदिति भावसार सक्सेना (ACP Aditi Bhavsar Saxena) ने बताया कि पूर्व में भी रीडर और अधिवक्ता के बीच विवाद हुआ था। मुझे कोई जांच होने से संबंधित बात संज्ञान में नहीं हैं। वरिष्ठ अधिकारी ही इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
यह पहला मामला नहीं, कारोबारी आज भी भयभीत
रिश्वत लेकर बैल करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले लक्की बाथम (Lucky Batham), उसके छोटे भाई रिषभ बाथम (Rishabh Batham) और उसके एक कर्मचारी को भी प्रतिबंधात्मक धाराओं में गिरफ्तार करके तीन दिन जेल भेज दिया गया था। लक्की बाथम ने बताया कि उसे 2025 में गणेश विसर्जन के दिन पिपलानी (Piplani) थाना पुलिस ने प्रतिबंधात्मक धाराओं में कार्रवाई की थी। जमानत के लिए पैसा मांगा गया था। उस वक्त जो भी पैसा था वह मैंने दिया भी था। हम बाउंड ओवर के खिलाफ केस लड़े और जीते भी हैं। लक्की बाथम को भेल (BHEL) के सारंग पाणी तालाब में मछली पकड़ने का ठेका मिला था। उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि उसे शारिक मछली (Shariq Machli) गिरोह का आदमी समझकर जबरिया जेल में डाला गया।
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