Exclusive News: बिल्डर को बचाने जांच कर रही पुलिस ने नियमों की अवहेलना पर कार्रवाई करने से बचने अपनी आंखे मूंदी, पांच लोग हुए थे जख्मी

भोपाल। दो तरह के कानूनी चश्मों को पहनकर मामले की जांच करने के आरोप भोपाल शहर के एमपी नगर पुलिस पर लग रहे हैं। दरअसल, दो दिन पहले जोन—2 स्थित सागर प्लाजा की लिफ्ट गिर गई थी। जिसकी प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि लिफ्ट (Exclusive News) में ऑपरेटर के अलावा ओवरलोड होने पर अलार्म की सुविधा नहीं थी। इसके बावजूद प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस पुलिस के अधिकारी नहीं जुटा पा रहे हैं।
यह है घटना जिसके कारण भूकंप के कंपन जैसा अहसास हुआ था
एमपी नगर (MP Nagar) स्थित जोन—2 में सागर (सेज) प्लाजा (Sagar Plaza) है। इसमें सागर बिल्डर (Sagar Builder) के अलावा कई अन्य कमर्शियल एरिया के दफ्तर भी है। सागर बिल्डर का ऑफिस पहली मंजिल पर है। इसके बाद तीन अन्य मंजिलों पर अलग—अलग दफ्तर है। यहां लगी लिफ्ट (Lift) 29 अप्रैल की शाम लगभग साढ़े पांच बजे तीसरी मंजिल से सीधे बेसमेंट पर आकर गिरी थी। जिसके कारण आस—पास सैकड़ों को लोगों को भूकंप के कंपन आने जैसा अहसास हुआ था। लिफ्ट में चीख—पुकार मच गई थी। काफी संघर्ष के बाद लिफ्ट के भीतर से पत्रकार रिजवान अहमद सिद्दीकी, सुशील कुमार त्रिपाठी, दिलीप सिंह भदौरिया, अनीता चौबे, प्रगति श्रीवास्तव और सादिया खान को बाहर निकाला गया था। लिफ्ट गिरने के कारण रिजवान अहमद सिद्दीकी (Rizwan Ahemad Siddiqui), सुशील त्रिपाठी (Sushil Tripathi) और सादिया खान (Sadiya Khan) के पैरों में फ्रैक्चर हुआ था। घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पत्रकारों का एक समूह विश्व मजदूर दिवस (International Workers’ Day) पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रुपरेखा बनाने पहुंचा था। वहां से लौटते वक्त यह घटना हुई थी।
यह कमियां निकलकर सामने आई
पुलिस के अनुसार प्राथमिक जांच में पता चला है कि जिस लिफ्ट से हादसा हुआ उसका आधिकारिक रुप से रखरखाव 3 अप्रैल को किया गया था। लिफ्ट में पांच लोगों के सवार होने की क्षमता थी। लेकिन, जिस दिन घटना (Exclusive News) हुई उस वक्त सात लोग उसमें सवार थे। पुलिस का कहना है कि अधिक वजन होने के कारण यह हादसा हुआ। नगरीय निकाय नियमों के अनुसार लिफ्ट लगाने से पूर्व संबंधित प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होता है कि वह निगरानी और उसे चलाने के लिए ऑपरेटर रखेगी। इस सरकारी शर्त का उल्लंघन किया गया। दरअसल, हादसे के वक्त ऑपरेटर था ही नहीं। यदि होता तो वह ओवरलोड होने से रोक सकता था। इसके अलावा ओवरलोड होने पर अलार्म सिस्टम लिफ्ट में इंस्टाल नहीं था। लिफ्ट काफी पुराने जमाने की है। जिस कारण उसके रखरखाव की तारीख भी बहुत छोटी होती है। लेकिन, लंबे समय तक उसे टाला गया। इसलिए लिफ्ट के रखरखाव करने वाली कंपनी की बजाय प्रबंधन पर बात आ गई है। जिसमें सागर बिल्डर फंस सकता है। उसे ही बचाने के लिए पुलिस ने दो दिनों से चुप्पी साध ली है।
जिन्हें कार्रवाई करना है वह बचाने वाली बातें करने लगे

इस मामले में थाना प्रभारी जयहिंद शर्मा (TI Jai Hind Sharma) ने बताया कि लिफ्ट क्लासिक एलिवेटर कंपनी (Classic Elevator Company) की है। जिसके इंजीनियरों ने बताया है कि उसमें अत्याधिक वजन हो गया था। इसके अलावा घायलों ने भी कहा है कि वह कार्रवाई नहीं चाहते। जबकि मिसरोद थाना क्षेत्र में हुए एक हादसे में पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एक सोसायटी के अध्यक्ष समेत लिफ्ट कंपनी के संचालकों और जिम्मेदारों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की थी। एमपी नगर थाना पुलिस की दरियादिली से साफ है कि वह सागर बिल्डर को बचाने तकनीकी बिंदुओं को दरकिनार करके दूसरे माध्यमों से राहत पहुंचाने का काम कर रही है। पुलिस ने इस मामले में नगरीय निकाय नियमों को प्रभावी तरीके से जांच में शामिल ही नहीं किया।
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