Bhopal Fraud News: हमीदिया अस्पताल के एक्स सीएमओ की पत्नी के साथ फर्जीवाड़ा

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Bhopal Fraud News: सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट, उनकी पत्नी और बेटी पर फर्जीवाड़े का लगा है आरोप, जीएसटी में अधिकारी बेटे के खिलाफ दर्ज प्रकरण में मदद करने के नाम पर जालसाज ने दो करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए

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ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के एक कथित एडवोकेट पर वयोवृद्ध वृद्धा ने दो करोड़ रुपए से अधिक का फर्जीवाड़ा करने का संगीन आरोप लगाया है। इस मामले में दो महीने की लंबी जांच के बाद भोपाल (Bhopal Fraud News) शहर की पिपलानी थाना पुलिस ने जालसाजी का प्रकरण दर्ज किया है। यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट की तरफ से लिए गए हस्ताक्षर से पीड़ित वृद्धा को फर्जी वसीयत की जानकारी लगी। पीड़ित वृद्धा हमीदिया अस्पताल के पूर्व सीएमओ की पत्नी हैं। पुलिस को इस फर्जीवाड़े में चार खातों के बारे में जानकारी जुटाना अभी बाकी हैं।

इन खातों में जमा हुई थी मोटी रकम

पिपलानी (Piplani) थाना पुलिस के अनुसार रंजना भसीन पत्नी स्वर्गीय डॉक्टर बृजमोहन भसीन उम्र 74 साल ने पुलिस आयुक्त समेत कई अन्य अधिकारियों को दो महीना पूर्व आवेदन दिया था। वह पिपलानी थाना क्षेत्र स्थित जेके रोड (JK Road) के नजदीक नीरजा नगर (Neerja Nagar) में रहती हैं। रंजना भसीन (Ranjana Bhasin) का आरोप था कि उनके हस्ताक्षर से फर्जी वसीयत बनाई गई है। जिसकी जांच की गई तो पता चला कि उनके अलग-अलग खातों से एक करोड़ 93 लाख रुपए की मोटी रकम ट्रांसफर भी की गई है। प्रकरण में आरोपी बृजेंद्र सिंह, उनकी पत्नी रुपम सिंह, बेटी शगुन सिंह, दिव्यांश रियलटो, डीएन बिल्डर्स, अरविंद देवेश और बीना एम.अरविंद बनाए गए हैं। इन सभी के खातों में रंजना भसीन के हस्ताक्षर से जारी चेक से भुगतान हुए थे। दिव्यांश रियलटो (Divyansh Realto) के खाते में 60 लाख, रुपम सिंह (Roopam Singh) के खाते में 20 लाख, डीएन बिल्डर्स (DN Builders) के खाते में 20 लाख, अरविंद देवेश (Arvind Devesh) के खाते में 25 लाख, बीना एम.अरविंद (Beena M. Arvind) के खाते में 25 लाख, शगुन सिंह (Shagun Singh) के खाते में 15 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। चेक से भेजी गई राशि करीब एक करोड़ 65 लाख रुपए थी। इसके अलावा बृजेंद्र सिंह (Brajendra Singh) ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खाते से तेरह लाख 10 हजार रुपए और चार लाख रुपए मीनाल गेट के पास स्थित बैंक की शाखा से चार लाख रुपए नकद भी निकाले गए थे।

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इस कारण एडवोकेट के संपर्क में आई वयोवृद्ध महिला

पीड़िता रंजना भसीन के पति डॉक्टर बृजमोहन भसीन (Dr. Brijmohan Bhasin) हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) के एक्स सीएमओ रहे हैं। उनके दो बेटे हैं जिसमें एक बेटे विकास भसीन (Vikas Bhasin) की बीमारी के चलते 2016 में निधन हो गया था। दूसरा बेटा अंकित भसीन (Ankit Bhasin) है जो कि जीएसटी (GST) में अधिकारी हैं। बेटे ने मां के खाते से पैसा निकाल लिया था। जिसके खिलाफ रंजना भसीन ने भोपाल कोर्ट (Bhopal Court) में याचिका लगाई थी। जिसके बाद 2024 में बेटे के खिलाफ पिपलानी थाना (Bhopal Fraud News) पुलिस ने ही प्रकरण दर्ज किया था। इसी प्रकरण में अधिवक्ता की तलाश करते हुए पीड़िता ने छत्तीसगढ़ के धमतरी में रहने वाले भाई रवींद्र नंदा (Ravindra Nanda) से मदद मांगी थी। उन्होंने ही मुख्य आरोपी बृजेंद्र सिंह से मुलाकात कराई थी। जिसके बाद बेटे के खिलाफ प्रकरण में पैरवी करने के लिए लिखित में एक अनुबंध किया था। इस अनुबंध की फीस प्रतिमाह आठ लाख रुपए तय करते हुए बृजेंद्र सिंह (Brajendra Singh) ने एक साल के लिए 96 लाख रुपए तय की थी।

इस तरह से दिया गया था झांसा

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थाना पिपलानी, जिला भोपाल— फाइल फोटो

रंजना भसीन का आरोप है कि बृजेंद्र सिंह का कहना था कि बेटे ने पिपलानी थाने में लंबी शिकायत की है। जिसमें वह आरोपी बन सकती है। इसलिए पुलिस कर्मियों से सुलह के लिए रिश्वत देनी होगी। यह बोलकर भी उससे तेरह लाख दस हजार रुपए फिर बाद में चार लाख रुपए नकद बैंक से निकालकर लिए थे। वृद्धा को जबलपुर-दिल्ली आना-जाना पड़ सकता है। इसलिए कार (Car) खरीदने की उन्होंने सलाह दी। कार दिल्ली के शोरुम से खरीदी गई। लेकिन, कार बेटी शगुन सिंह के नाम पर खरीदी गई। यह कार अभी नीरजा नगर में स्थित मकान में रखी हैं। इस विषय को लेकर बृजेंद सिंह का कहना था कि कार से दुर्घटना होने पर दर्ज होने वाले प्रकरण में वह फंस जाती। इसलिए वह उसकी मां के समान है बेटा होने के नाते संकट उस पर आने नहीं देगा। इसके अलावा एडवोकेट पर यह भी आरोप है कि उन्होंने वृद्धा को यह बोलकर झांसा दिया कि उनका बेटा अंकित भसीन जेवरात हड़प सकता है। इसलिए वह उन्हें लेकर मुंबई में रहने वाली बहन के बेटे सचिन के पास ले गया। वहां से करीब 35 तोला वजनी जेवरात लेकर दिल्ली में स्थित अपने भाई आनंद के घर ले गया। वृद्धा लगभग वहां एक महीना भी रही। इस दौरान मुंबई से लिए गए जेवरात भी वहां रख दिए गए।

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जांच में कई सबूत जुटाना बाकी

पिपलानी पुलिस ने इस संगीन आरोपों पर 27 अप्रैल को जालसाजी और गबन का आईपीसी की धाराओं में प्रकरण 354/26 दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की शुरुआत बीएनएस कानून लागू होने से पूर्व की है। प्रकरण में अभी जबलपुर और भोपाल में स्थित संपत्ति की वसीयत को लेकर जांच करना बाकी है। जिसमें करोड़ों रुपए की जमीन पर मालिकाना हक बृजेंद्र सिंह ने बनने की तैयारी कर ली थी। इसके अलावा 75 लाख रुपए के तीन चेक भी बाउंस होने पर नोटिस भेजे गए हैं। प्रकरण में बृजेंद्र सिंह एडवोकेट है अथवा नहीं इसके लिए विधिक माध्यमों से सत्यापित करने और जालसाजी में आए तमाम तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए जांच करने में काफी समय लगेगा। इसके अलावा जिन चार खातों में मोटी रकम ट्रांसफर हुई है उसके धारकों को बुलाकर पैसा लेने के पीछे वजह का पता लगाया जाना बाकी है। मामले की जांच पुलिस उपायुक्त की निगरानी में एसआई लोकपाल यादव (SI Lokpal Yadav) कर रहे हैं।

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