Traffic Police News: पुलिस आयुक्त से जनसुनवाई में पीड़ित परिवार ने बताई अपनी आपबीती, उप निरीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा

भोपाल। राजधानी की ट्रेफिक पुलिस का एक असंवेदनशील चेहरा सामने आया है। घटना भोपाल शहर के मिसरोद स्थित ट्रेफिक पुलिस (Traffic Police News) के चैकिंग पाइंट की है। यहां एक कार में आठ महीने की गर्भवती महिला को पीड़ा होने पर ले जाया जा रहा था। जिस तरह की परिस्थितियां थी उसमें कार की रफ्तार धीमी हो ही नहीं सकती। उसी रफ्तार की आड़ में वाहन चैकिंग कर रहे चार पुलिस कर्मियों ने गर्भवती महिला की पीड़ा को नजर अंदाज करके 760 रुपए जुर्माना वसूला। जबकि नियम एक हजार रुपए का था। उसमें भी रसीद नहीं दी गई। यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार को जनसुनवाई में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के पास पहुंचा। जिसके बाद उन्होंने लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की है।
ट्रेफिक पुलिस कर्मचारियों ने की अभद्रता
अपनी पीड़ा बताते हुए आयुष श्रीवास्तव (Ayush Shrivastav) ने कहा कि वे एमपी स्टेट डेटा सेंटर (MP State Data Center) में नौकरी करते हैं। वे मिसरोद (Misrod) स्थित ग्राम दीपड़ी के पास स्टर्लिंग ग्रीन मेंडोज (Sterling Green Meadows) कॉलोनी में रहते हैं। पत्नी सविता मेहरा (Savita Mehra) आठ महीने की गर्भवती है। उन्हें पेट में दर्द की शिकायत होने पर भोपाल एम्स (Bhopal AIIMS) में ऑनलाइन अपाईंटमेंट लेकर वे हुंडई एक्ससेंट कार (Car) एमपी-04-सीपी-9648 से अस्पताल जल्दी जा रहे थे। अभद्रता की घटना 30 मार्च की दोपहर लगभग पौने एक बजे हुई थी। कार में पति-पत्नी के अलावा पांच साल का बेटा अयांश श्रीवास्तव (Ayansh Shrivastav) भी था। मिसरोद के पास यातायात पुलिस (Traffic Police) का चेकिंग पाइंट था। वहां उप निरीक्षक एसएन यादव (SI S.N Yadav), सिपाही महेंद्र (Constable Mahendra) के अलावा दो अन्य कर्मचारी थे। उन्होंने कार को हाथ देकर रोका और बोला कि उनकी रफ्तार काफी अधिक हैं। इसलिए कार का एक हजार रुपए का जुर्माना काटा जाएगा। आयुष श्रीवास्तव ने समझाया कि उनकी पत्नी गर्भवती है और उन्हें पेट दर्द होने पर अस्पताल जाने की जल्दबाजी में वह इस बात का ध्यान नहीं दे सके। यह बोलने पर ट्रेफिक पुलिस कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्रता की और जुर्माना देने पर ही आगे जाने देने की बात बोली। पीड़ित ने बताया कि वे जल्दबाजी में घर से निकले थे। उनके पास एटीएम या कोई अन्य डिजीटल भुगतान करने का साधन उपलब्ध नहीं था। जेब में सिर्फ 760 रुपए थे। वह रकम उनसे ले ली गई और किसी तरह की रसीद भी नहीं दी गई।
पांच हजार रुपए मांगे गए थे
आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि कार का बीमा समाप्त हो गया था। यह बीमा उनके भाई अक्षय श्रीवास्तव (Akshay Shrivastav) की व्यस्तता के चलते कराना भूल गए थे। उन्होंने बीमा भी ऑन लाइन करा दिया। इससे पहले यातायात पुलिस कर्मी की तरफ से पांच हजार रुपए की मांग की जा रही थी। जिसके बाद वह एक हजार रुपए पर राजी हुए। वह रकम भी उनके पास नहीं होने पर उन्होंने अपने भाई से बात कराकर कुछ देर में देने की बात बोली गई थी। फोन पर भी भाई के साथ अभद्रता करने की बातचीत रिकॉर्ड हो गई।
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