सर्वे : कोरोना के डर से बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते अभिभावक, चाहे साल खराब हो जाए

सर्वे में सामने आया चौकाने वाला सच, स्कूल खुलने पर भी 94 फीसदी बच्चों को नहीं भेजेंगे माता-पिता

सांकेतिक चित्र

भोपाल। कोविड-19 (Covid-19) से जुड़ी खबरों के बीच सोशल मीडिया (Social Media) पर लगातार इस तरह की खबरें भी आती रहती हैं, जिसमें कभी जुलाई तो कभी सितंबर तक स्कूल (School) रि-ओपन होने की बात की जाती है। इसे लेकर अभिभावक डर रहे है । हालांकि, इस बीच स्कूल और सरकारें सभी ये कह रहे हैं कि तैयारी पूरी है और स्कूल पूरी प्लानिंग के साथ ही खोले जाएंगे, लेकिन अभिभावक इसके लिए तैयार नहीं है। उनका मानना है कि कम से कम छह महीने और स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए। यहां तक कि कुछ ने कहा कि वह क्लास रिपीट कराने को तैयार हैं, लेकिन बच्चे को लेकर इतना बड़ा रिस्क नहीं उठा सकते। वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन क्लासेस की वजह से बच्चों को आंखों में दिक्कत हो रही है। अभिभावक ऑनलाइन पढ़ाई से भी परेशान होने लगे है।

स्कूल ग्रुप पर भेजा मैसेज तो सबने कहा ना

आलम यह है कि भोपाल के विभिन्न स्कूल ग्रुप्स में जब जुलाई में स्कूल रि-ओपनिंग की संभावना जताते हुए मैसेज डाला गया तो 94 फीसदी अभिभावकों ने इसे मूखर्तापूर्ण फैसला करार देते हुए बच्चों को स्कूल भेजने से साफ इंकार कर दिया। केवल 6 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल शुरू होते ही पूरी सेफ्टी के साथ भेजने की हामी भरी। बता दें,  इन ग्रुप्स में टोटल 336 अभिभावक हैं, जिनके बच्चे अलग-अलग क्लासेस और स्कूलों में हैं। इनमें से 60 फीसदी ऐसे हैं जिनका मानना है कि स्कूल दिसंबर के बाद ही शुरू होने चाहिए। वहीं 35 फीसद को सितंबर में और 5 फीसद को जुलाई में स्कूल खुलने से कोई दिक्कत नहीं।

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होम स्कूल बेहतर

इस ग्रुप पर 58 फीसदी पैरेंट ने कहा कि स्कूल खुलने के तुरंत बाद वह बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगे। वह 15 दिन रूककर स्कूल की तैयारी और अन्य स्कूल जाने वाले बच्चों को वॉच करेंगे और उसके बाद ही अपने बच्चे को भेजेंगे। वहीं 22 फीसद का मानना है कि होम स्कूल और ऑनलाइन क्लासेस इस क्राइसेस भरे दौर में बेहतर विकल्प है।

अभिभावकों की राय

अभिभावक अरविंद श्रीवास्तव (बिजनेसमैन) ने कहा कि जब सरकार लॉकडाउन हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही तो हम बच्चों को स्कूल भेजने की हिम्मत कैसे जुटा लें। इन स्थितियों में मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता यदि मेरे दोनों बच्चों का यह साल रिपीट भी हो तो। वहीं हाउस वाइफ दिव्या गांधी कहती है कि कम से कम सितंबर तक तो स्कूल को ना है। अभी बच्चों को बहुत प्रिपेयर करना होगा। मास्क पहनना बड़ों के बस की बात नहीं, तो बच्चों का क्या। स्कूल के पहले उनकी बहुत सारी आदतें बदलना पड़ेंगी। एक पिता पियूष दीक्षित का मानना है कि स्कूल कम से कम सितंबर तक तो नहीं खोले जाने चाहिए। अभी बुजुर्ग और बच्चों का सबसे अधिक ध्यान रखने की बात है। ऐसे में स्थितियां संभलने तक, स्कूल भेजने का सवाल ही नहीं है। वहीं गृहणी कंचन रघुवंशी ऑनलाइन पढ़ाई के पक्ष में है, उन्होंने कहा कि अभी ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं, यह स्कूल खोलने से बेहतर विकल्प है। कम से कम इस साल स्कूल को यही करना चाहिए। अभी बच्चों की स्कूल में गैदरिंग खतरनाक साबित हो सकती है।

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