भोपाल पुलिस के ‘चेतक’ संजीव कुमार सिंह का अवसान

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क्राइम रिपोर्टर और पुलिस अफसरों ने जताया शोक, उनके कार्यकाल को यादगार बताए उनके प्रयोग

MP Retired IPS News
दिवंगत रिटायर्ड आईपीएस संजीव कुमार सिंह

भोपाल। भारतीय पुलिस सेवा में मध्य प्रदेश कैडर (MP Retired IPS News)  के 1987 बैच के आईपीएस संजीव कुमार सिंह का शु्क्रवार रात लगभग 11 बजे अवसान हो गया। संजीव कुमार सिंह (Sanjiv Kumar Singh) फरवरी, 2020 में स्पेशल डीजी के पद से रिटायर हुए थे। उन्हें गिरने की वजह से ब्रेन हेमरेज हुआ था। निधन के समाचार मिलने पर मध्य प्रदेश के डीजीपी विवेक जौहरी (DGP Vivek Johri) समेत कई सेवानिवृत्त अफसरों ने विभागीय क्षति बताया है। अफसरों ने कहा कि रिटायर होने के बाद भी उनकी नीति—नियमों के निर्माण में मदद ली जा सकती थी। लेकिन, ईश्वर के विधि विधान में कुछ ओर पहले से तय था। द क्राइम इंफो परिवार भी संजीव कुमार सिंह को सादर नमन करता है। पत्रकारों और पुलिस के अफसरों से जानिए (MP IPS News) उनकी खूबियां।

थाना प्रभारियों को आता था पसीना

संजीव कुमार सिंह भोपाल में एसपी और आईजी रहे। एसपी रहने का उन्होंने चार साल का रिकॉर्ड बनाया था। इसी तरह भोपाल आईजी भी वे रहे। इस दौरान उन्होंने भोपाल में कई तरह के नवाचार किए। इस कारण उनका मुखबिरों के बीच बेहतरीन नेटवर्क बन गया था। संजीव कुमार सिंह ने भोपाल शहर में एक अनूठा प्रयोग 1996 में कुर्सी संभालने के बाद किया था। उन्होंने शहर में कई थानों में शिकायत पेटी लगा दी थी। इन पेटी की चाबी थाने के टीआई के पास होती थी। जिसमें आने वाली सूचनाओं पर प्रभारी काम करते थे। कई बार शिकायत पेटी न खुलने पर संजीव कुमार सिंह ने प्रभारियों की जमकर क्लास भी लेते थे।

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प्रदेश ही नहीं दूसरे राज्यों में फैला नेटवर्क

सेवानिवृत्त नगर पुलिस अधीक्षक सलीम खान (Salim Khan) ने बताया कि मैं जब सेवा में था तब वे मेरे डीआईजी और आईजी रहे हैं। संजीव कुमार सिंह के कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जितना नेटवर्क मध्य प्रदेश में था उससे कहीं ज्यादा दूसरे राज्यों में मैंने देखा है। मुझे याद है संजीव कुमार सिंह ने बदमाशों के खिलाफ अलग—अलग दो टारगेट पर दूसरे राज्यों में भेजा था। हम वहां पहुंचे तो स्थानीय पुलिस पहले से हमारे सहयोग के लिए उपलब्ध थी। ऐसी सक्रियता मैंने अपने सेवा काल में दूसरे अफसरों के साथ नहीं देखी थी। इससे साफ है कि नेटवर्क प्रदेश ही नहीं दूसरे प्रदेश के अफसरों के साथ भी उनका जीवंत संपर्क था।

चेतक की परंपरा शुरु की

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दिवंगत रिटायर्ड आईपीएस संजीव कुमार सिंह

वरिष्ठ पत्रकार और तत्कालीन भोपाल क्राइम रिपोर्टर मनोज वर्मा (Manoj Verma) ने बताया ने संजीव कुमार सिंह ने अपने कार्यकाल में नवाचार बहुत से किए थे। आज हम जो डायल—100 देख रहे हैं उसका कंसेप्ट संजीव कुमार सिंह एसपी रहते हुए ले आए थे। उन्होंने चेतक वाहन सड़कों पर उतारा था। यह वाहन दुर्घटना वाले स्थान पर पहुंचकर लोगों को मदद पहुंचाता था। इस वाहन में पुलिस स्टाफ स्ट्रेचर के साथ होता था। इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार और तत्कालीन भोपाल क्राइम रिपोर्टर जुबेर कुरैशी (Zuber Qureshi) ने बताया कि पत्रकारों से संवाद बनाने के लिए संजीव कुमार सिंह ने पुलिस और क्राइम रिपोर्टरों के बीच खेल की परंपरा शुरु की थी। ऐसे ही कई नवाचार उन्होंने किए थे।

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