MP Fraud Case: प्रधानमंत्री के कार्यालय से एनएचडीसी का फर्जी नियुक्ति पत्र जारी

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मेंबर पार्लियामेंट बताकर डॉक्टर के बेटे को 10 लाख रुपए का चूना लगाया, प्रधानमंत्री कार्यालय और मध्यप्रदेश के सीएस का बताया था करीबी, दो लोगों के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज

MP Fraud Case
सांकेतिक चित्र

भोपाल। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में जालसाज (Cheater) अपने आपको मेंबर पार्लियामेंट (Member Parliament) बताने में भी गुरेज नहीं करते। ताजा मामला भोपाल (Bhopal) के अयोध्या नगर थाना क्षेत्र का है। यहां दो व्यक्तियों ने यह रसूख दिखाने के अलावा मध्यप्रदेश के सीएस एसआर मोहंती और पीएमओ (Prime Minister Office) में तैनात अफसरों का करीबी बताकर एनएचडीसी में नौकरी का फर्जी नियुक्ति (Fake Appointment Letter) पत्र थमा दिया। आरोपियों ने डॉक्टर के बेटे को नर्मदा हाईड्रो इलेक्ट्रिक्ल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHDC) में अफसर बनाने का झांसा देकर 10 लाख रुपए ठग लिए थे। पुलिस ने जालसाजी (MP Fraud Case) का मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन, आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला है।
जानकारी के अनुसार मामले का खुलासा तब हुआ जब पैसा लेकर काम नहीं करने वाले जालसाजों का पीएम कार्यालय से सच्चाई का पता लगाया गया। पीड़ित परिवार यहां मिनाल रेसीडेंसी में रहने वाला स्वप्निल कुमार (Swapnil Kumar) हैं। वे भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (ISER) में तैनात हैं। स्वप्निल के पिता बसंत कुमार (Dr Basant Kumar) और मां साधना कुमार (Dr Sadhana Kumar) भेल के रिटायर्ड चिकित्सक हैं। जब साधना भेल की डिस्पेंसरी (BHEL Dispencery) में तैनात थी उसी वक्त रमेश रिछारिया नाम के व्यक्ति से स्वप्निल की पहचान हुई थी। रमेश ने अपने बेटे संदीप के मुंबई में रहने की जानकारी दी थी। उसने दावा किया था कि वह राज्य सभा सांसद (Member Parliament) है और दिल्ली में रहता है। रमेश ने दावा किया था कि उसकी मुख्य सचिव से भी अच्छी पहचान हैं। जब यह मुलाकात हुई थी तब अच्छी स्वप्निल नौकरी तलाश रहा था।

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यह बात स्वप्निल ने रमेश से भी की थी। इसके बाद वह अपना बेटा बताकर संदीप के पास ले गया। संदीप ने उसको राज्यसभा का आईडी कार्ड भी दिखाया। यह देखकर स्वप्निल उसके झांसे में आ गया। यही आईकार्ड उसने माता—पिता को भी दिखाया। इसके बाद एनएचडीसी में नौकरी लगाने के नाम पर 10 लाख रुपए लिए गए। पैसे लेने के बाद पीएमओ के सील—मुहर लगे कागज पर नियुक्ति पत्र जारी किया गया। वह लेकर स्वप्निल जब एनएचडीसी गया तो उसे जालसाज का शिकार होने का अहसास हुआ। वह आरोपियों को तलाशता उससे पहले वह फरार हो गए थे। पुलिस को शुरूआती जांच में मालूम हुआ है कि रमेश और संदीप इसी तरह से प्रदेश के कई युवाओं को झांसा दे चुके हैं। स्वप्निल की तरह ही पुलिस को ईटखेड़ी में रहने वाले कमल नाम के व्यक्ति का भी पता चला है। फिलहाल आरोपी पुलिस को नहीं मिले हैं। जिनकी तलाश के लिए पुलिस कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही है।

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