Bhopal Breaking News: चप्पल पहनकर आए आकाश दुबे ने थाने में बोला कर रहा हूं समर्पण

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Bhopal Breaking News: साथी की मदद से समर्पण का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में भी कराया वायरल

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थाने में कैबिन के भीतर आकाश दुबे डे अधिकारी के सामने

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की ताजा न्यूज (Bhopal Breaking News) कोलार थाने से मिल रही है। थाने में 12 दिन पहले रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में जेके अस्पताल के आईटी मैनेजर ने थाने में समर्पण कर दिया। इस पूरे नाटकीय समर्पण का बकायदा वीडियो भी बनाया गया। जिसको कुछ ही देर में न्यूज वेसाइट और प्रिंट—इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई ग्रुप में प्रसारित भी किया गया। पुलिस ने आकाश दुबे की गिरफ्तारी पर तीन तीन दिन पहले ही साढ़े सात हजार रुपए का इनाम रखा था।

थाना प्रभारी रास्ते में थे

आत्मसमर्पण का वीडियो लगभग 46 सेकंड का है। इसमें वह चप्पल पहनकर टोपी लगाए थाने में घुसता दिख रहा है। इस वीडियो में उसने डबल मास्क पहन रखा है। वह सीधे डे अधिकारी के कैबिन में घुस जाता है। जबकि अधिकारी कोरोना गाडइ लाइन के तहत कांच के सुरक्षा घेरे में बैठकर दूसरे व्यक्ति से उस वक्त बातचीत कर रहे थे। तभीउनके पास फोन आया था। फोन पर बातचीत जैसे ही खत्म हुई तो टोपी पहने व्यक्ति ने अपने आपको आकाश दुबे (Akash Dubey) बताते हुए समर्पण करने की बात बोली। इस बीच दिवस अधिकारी ने वीडियो बना रहे व्यक्ति पर आपत्ति जताई तो वह वहां से चला गया। कोलार थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल (TI Chandrakant Patel) ने आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए बताया कि अभी वे रास्ते में हैं। थाने पहुंचकर विस्तृत जानकारी देंगे।

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सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में देखिए कैसे पहुंचा था थाने

यह है पूरा मामला

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कोलार थाने में सरेंडर के लिए घुसता आकाश दुबे

कोलार थाना पुलिस ने 13 मई को तीन आरोपियों दिलप्रीत सलूजा (Dilprit Saluja), अंकित सलूजा और आकर्ष सक्सेना को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के कब्जे से पुलिस को पांच रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद हुए थे। आरोपी आकर्ष सक्सेना और अंकित सलूजा (Ankit Saluja) ने इंजेक्शन को आकाश दुबे से खरीदना बताया था। आकाश दुबे ने इस प्रकरण में बचने के लिए अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी। लेकिन, वह अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए खारिज कर दी थी। इस पूरे प्रकरण में आकर्ष सक्सेना (Akarsh Saxena) को क्राइम ब्रांच के एसआई एमडी अहिरवार और हरिशंकर वर्मा ने दबोच लिया था। उस वक्त आकर्ष सक्सेना ने ढ़ाई लाख रुपए दिए थे। इन आरोपों की अलग से जांच की जा रही है।

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