Nashik Oxygen Leak Tragedy: 30 मिनट में 24 मरीजों की मौत, टैंकर से गैस रिसाव बनी वजह

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Nashik Oxygen Leak Tragedy: सरकारी अस्पताल में हुई हृदय विदारक घटना के बाद लोग अपने रिश्तेदारों को तड़प—तड़पकर होती मौत देखते रहे

Oxygen Tank Leak Tragedy
घटना की भयावहता को बयां करती यह तस्वीर— साभार डीएनए इंडिया

नासिक। महाराष्ट्र जिले के नासिक (Nashik Oxygen Leak Tragedy) शहर में स्थित डॉक्टर जाकिर हुसैन सरकारी अस्पताल में बुधवार सुबह आधा घंटा के भीतर 24 मरीजों की मौत हो गई। यह सारे मरीज कोरोना संक्रमित थे जो कि ऑक्सीजन सपोर्ट में थे। यह हादसा उस वक्त हुआ जब ऑक्सीजन टैंकर गैस सप्लाई करने के लिए प्लांट पर खाली हो रहा था। तभी टैंकर में रिसाव हो गया। हादसे के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने घटना में मृत परिवारों को सांत्वना दी है। इधर, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मृत व्यक्ति के परिजनों को पांच—पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

क्षमता से अधिक थे मरीज

घटना का पता चलने पर निगम आयुक्त कैलाश जाधव, महापौर सतीश कुलकर्णी, डीएम सूरज मंधारे, पुलिस कमिश्नर दीपक पांडे समेत कई अन्य अफसर पहुंच गए थे। अस्पताल में चारों तरफ चीख—पुकार मची हुई थी। जिन मरीजों की सांस उखड़ रही थी उन्हें दूसरों के सिलेंडर लगाने का प्रयास किया जा रहा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि हादसा टैंकर में ऑक्सीजन भरने के कुछ देर बाद सॉकेट टूटने की वजह से हुआ है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि अस्पताल में 90 मरीजों की क्षमता थी। लेकिन, वहां 150 मरीज भर्ती थे। अस्पताल के अंदर मरीजों के परिजन चीख रहे थे। वहीं अस्पताल के बाहर टैंकर से रिसाव के लिए कर्मचारियों में अफरा—तफरी मची हुई थी। यह पूरी घटना सुबह 11 बजे हुई थी।

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हादसा सबके लिए सबक

देश में चारों तरफ से ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही है। मध्य प्रदेश के दमोह में ऑक्सीजन लूटने के भी समाचार है। मतलब साफ है कि नाशिक की घटना से देशभर के अफसरों को सबक लेने की आवश्यकता है। कोविड के लिए जरुरी सामानों पर विशेष निगरानी और उसके इस्तेमाल के वक्त प्रशिक्षित कर्मचारी को निगरानी के लिए तैनात किया जाना चाहिए।

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