Political Crime: कभी मोदी सरकार की धड़कने बढ़ाने वाले आलोक वर्मा अपने हक के लिए खा रहे धक्के

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सीबीआई के पूर्व चीफ के सेवानिवृत्ति बाद दिए जाने वाले लाभ को सरकार ने रोका

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सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा जो इस वक्त अपनी सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के लिए परेशान चल रहे हैं

दिल्ली। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की धड़कने बढ़ाने वाले भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अफसर आलोक वर्मा (Alok Verma) दर—दर की धक्के खा रहे हैं। दरअसल, सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद दी जाने वाली सुविधाएं उन्हें अब तक नहीं मिली हैं। उनकी सामान्य भविष्य निधि (GPF) समेत अन्य राशि का भुगतान नहीं हुआ हैं।
सीबीआई के पूर्व निदेशक (Former CBI Director) रहे आलोक वर्मा भारतीय पुलिस सेवा (Indian Police Service) में 1979 बैच के अफसर हैं। उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए मुश्किल उस वक्त खड़ी की थी जब उन्हें हटाने को लेकर वे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) चले गए थे। इस मामले में विपक्ष (Opposition) ने मोदी सरकार की जमकर घेराबंदी की थी। सु्प्रीम कोर्ट में उन्हें फौरी राहत तो दी लेकिन, सरकार ने उनको फायर सर्विस (Fire Service) का डीजी बना दिया था। यह पद उन्होंने न स्वीकारते हुए वीआरएस (VRS) ले लिया था। अब एक बार फिर आलोक वर्मा ने केंद्र में मोदी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
दरअसल, सरकार ने उनकी सामान्य भविष्य निधि (Genral Provident Fund) की राशि का भुगतान नहीं किया है। इस बात को लेकर आलोक वर्मा कई बार पत्राचार कर चुके हैं। उनके आवेदन पर अब ​तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह आवेदन अब मीडिया में लीक हो गया। जिसके बाद एक बार फिर वर्मा मीडिया की सुर्खियों में आ गए। वर्मा के संबंध में लीक पत्र से पता चला है कि जीपीएफ रोके जाने से वे अवकाश पर चले गए थे। इसी बात को गंभीर चूक बताकर राशि रोकी गई है। अवकाश को ब्रेक बताकर उन्हें रिटायरमेंट लाभ से वंचित होने की संभावना जताई जा रही है। आलोक वर्मा ने डीजी फायर सर्विस का पद स्वीकारने से इंकार किया था। उन्होंने कहा था कि इस पद की पेंशन को वे पार कर चुके हैं। इसलिए यह पद स्वीकार नहीं करेंगे। वर्मा सीबीआई में जनवरी, 2019 तक निदेशक रहे थे। वर्मा दिल्ली में पुलिस कमिश्नर (Delhi Police Commissioner) रह चुके हैं।

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क्यों मचा था हल्ला
आलोक वर्मा केन्द्र में मोदी सरकार के निशाने पर कांग्रेस (Congress) की वजह से निशाने पर आए थे। दरअसल, विपक्ष का एक प्रतिनिधि मंडल (Opposition Delegation) उनसे मुलाकात करने पहुंचा था। इस मुलाकात से ज्यादा मोदी सरकार (Modi Government) के लिए वह विषय था जिसके लिए सरकार अपने आपको संकट में महसूस कर रही थी। विपक्ष संसद में रफाल (Rafale) को लेकर सरकार की घेराबंदी कर रहा था। इसी मुद्दे पर विपक्षी दल सीबीआई निदेशक से मुलाकात करने पहुंचा था। इसी मुलाकात के बाद सीवीसी (CVC) की बैठक बुलाकर आलोक वर्मा को सीबीआई से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। हालांकि केन्द्र में मोदी सरकार ने कहा था कि बैठक में नेता प्रतिपक्ष खडगे भी शामिल​ थे।

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