MP Cop Gossip: थाने में ट्रैप हो गए अफसर

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MP Cop Gossip: मीडिया, महकमा और अफसर हुए मौन, पांच दिनों से दबी कहानी बाहर आने लगी, तीस हजार रुपए का सौदा दस हजार में पटा, विधायक के लिए अफसरों की साख लगा देते हैं दांव पर एक प्रभारी

MP Cop Gossip
सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस (MP Cop Gossip) महकमा बहुत बड़ा होता है। उसमें भीतर ही भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। कुछ बातें सामने आ जाती है जो नहीं आ पाती वह हमारे लिए एमपी कॉप गॉसिप (MP Police Gossip) का किस्सा होते हैं। इस बार एक विषय पर हम नाम उजागर कर रहे हैं। दरअसल, उस सिलसिले में हमारे पास सबूत भी है। बाकी दो विषयों को लेकर एक किरकिरी वाली है तो दूसरी सामुदायिक वाली कहानियां हैं। हमारा मकसद किसी विभाग, संस्था अथवा व्यक्ति को कम—ज्यादा आंकना नहीं हैं।

हर कहानी की पटकथा बता देते हैं एक थाना प्रभारी

राजधानी के एक थाने में तैनात अफसर की तैनाती विधायक के जरिए हुई। दोनों के बीच यह गठबंधन इतना अटूट है कि विधायक ने छह महीने तक किसी अन्य अफसर को अपने चहेते को बैठाने के लिए कुर्सी खाली रखी। आलम यह है कि विधायक की थाने में तूती इतनी बोलती है कि कोई भी शिकायत अफसरों को पहुंचने की बजाय पहले विधायक के पास होती हैं। अपना—पराया और कम—ज्यादा का निचोड़ निकालने के बाद आलाकमान को सूचित किया जाता है। फिलहाल खाकी और खादी का यह गठबंधन तब तक ही अटूट है जब तक कोई बड़ी आफत नेता जी तक नहीं आ जाती। जिस दिन थाने से उनकी फाइलें बाजार में उछली उस दिन नेता जी चारों खाने चित होने वाले हैं।

बिछड़े तो हैं लेकिन मिलते हर साल शान से हैं

एमपी पुलिस में एसआई से भर्ती होने वाला एक बैच अपने आदर्शों के चलते काफी सुर्खियों में रहता है। यह 19वीं शताब्दी का आखिरी बैच हैं। इसके कई अफसर अब राजपत्रित पुलिस अधिकारी भी हो गए हैं। इस बैच में करीब 300 अफसर थे। इसमें से कुछ नौकरी छोड़कर दूसरी जॉब में चले गए। कुछ दुनिया छोड़ गए। बाकी जो बचे वह दो हिस्सों में बंट गए। यानि कुछ साथी मध्यप्रदेश तो कुछ छत्तीसगढ़ चले गए। लेकिन, यह बैच हर बार उस तारीख को जमा होता है जिस दिन उन्हें फील्ड पर भेजा गया था। इस बार चुनाव के चलते यह बैच एक जगह पर उस दिन जमा नहीं हो पाया। हालांकि चुनाव बाद इस बैच के अफसरों ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपना डेरा जमाया। पुराने दिनों की याद और ताजा अनुभव यह बैच के अफसर आपस में साझा करने के बाद कुछ दिन पहले ही अपनी—अपनी तैनाती वाली जगहों पर पहुंचे हैं।

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मंत्री के विधानसभा में स्थित थाना क्षेत्र में क्या चल रहा है

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

पुलिस मुख्यालय और मंत्रालय के गलियारों में स्थित अफसरों के केबिन में इन दिनों भोपाल (Bhopal Cop Gossip) शहर का अशोका गार्डन बहुत चर्चा में हैं। यहां पिछले दिनों एक हवाला कारोबारी के घर दबिश दी गई थी। जिसमें लाखों रुपए की रकम घटना स्थल से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट की गई थी। इस मामले में थाना प्रभारी समेत कई अन्य कर्मचारी जांच के लपेटे में आ गए थे। यहां थाना प्रभारी की कुर्सी अभी भी खाली है। अब इसी थाने में एक ओर चर्चित घटना हो गई है। यह मामला 14 जून का है जो मैन स्ट्रीम मीडिया की आंखों के सामने आने से रह गया। दरअसल, यहां थाने में 08 जून को जालसाजी का एक प्रकरण दर्ज किया गया था। इसी दर्ज प्रकरण को लेकर पीड़ित से 30 हजार रुपए की घूस मांगी जा रही थी। पैसा यह बोलकर मांगा जा रहा था कि प्रकरण दर्ज करने में काफी मेहनत उन्हें करना पड़ी थी। जिसकी बकायदा लिखित में शिकायत लोकायुक्त पुलिस संगठन (MP Lokayukta Police News) में की गई थी। इसी शिकायत की जांच में अशोका गार्डन थाने में तैनात एएसआई संजय सिसोदिया (ASI Sanjay Sisodiya) दस हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप हो गए। इससे पहले उनकी करीब सात मिनट की रिकॉर्डिंग भी हो चुकी थी। लोकायुक्त पुलिस संगठन ने 15 जून की रात लगभग पौने दस बजे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण भी दर्ज कर लिया। इस पूरे वाक्ये और घटनाक्रम (Bhopal Bribe News) को लेकर मीडिया ही नहीं महकमे के अफसर भी मौन हैं। लेकिन, इस प्रकरण की एफआईआर और उससे जुड़े आवेदन पिछले तीन दिनों से कई रिपोर्टरों के व्हाट्स एप पर पहुंच रहे हैं। एएसआई संजय सिसोदिया भोपाल (Bhopal Trapped News) शहर के कई प्रमुख थानों टीटी नगर, एमपी नगर समेत अन्य थानों में तैनात रहे हैं।

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