Bhopal News: लंबे तर्क-वितर्क सुनने के बाद जज ने निरस्त की जमानत याचिका,जमानत के आवेदन में लगाए हैं कई संगीन आरोप,चकाचौंध की आदत इसलिए सांस्कृतिक मूल्यों का निर्वहन नहीं कर पा रही थी

भोपाल। न्यायाधीश पल्लवी त्रिवेदी ने पूर्व डीजे और भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह के एडवोकेट पुत्र समर्थ सिंह की जमानत (Bhopal News) याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले पति ने गांजा पीने और चकाचौंध आदत के कारण तनाव में होने का दावा करके दस्तावेज लगाकर जमानत के लिए आवेदन किया गया था।
डॉक्टर की सलाह पर कराया गया था गर्भपात
जानकारी के अनुसार समर्थ सिंह (Samarth Singh) की तरफ से तर्क करने अधिवक्ता इनोश जॉर्ज कारलो की तरफ से याचिका लगाई गई थी। यह याचिका उन्होंने राजेश सिंह के आवेदन पर लगाई। राजेश सिंह (Rajesh Singh) को आवेदन में सगा भाई बताया गया है। समर्थ सिंह का कहना था कि 9 दिसंबर, 2025 को डेंटिंग एप के जरिए पहचान होने के बाद शादी हुई थी। इससे पहले ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma ) फिल्म कलाकार और मॉडलिंग करती थी। उन्होंने तेलगू के अलावा अन्य भाषाओं की फिल्म में काम किया है। पति ने आवेदन में आरोप लगाया कि मां गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) को शक हुआ था कि वह गांजा सेवन करती है। उसके 17 अप्रैल, 2026 को गर्भवती होने की जानकारी मिली थी। जिसके बाद उसे हजेला अस्पताल (Hajela Hospital) में भी ले जाया गया था। उसकी गर्भवती होने पर पता चला तो वह परेशान रहने लगी। वह नोयडा जाने की जिद करने लगी। वह भारतीय संस्कृति के हिसाब से घरेलू महिला होकर रहने के लिए तैयार नहीं थी। वह 17 अप्रैल को नोयडा जाने का कहकर चली गई थी। लेकिन, वह सीधे घर भी नहीं पहुंची थी। समर्थ सिंह ने अपने आवेदन में कहा कि उसके गांजा लेने के कारण डॉक्टर निधि शर्मा (Dr Nidhi Sharma) की सलाह पर उसका गर्भपात कराया गया था। जिसके बाद उसे मनोचिकित्सक कोकिला राय (Psychiatrist Kokila Rai) के पास भी भेजा गया था। घटना वाले दिन वह ब्यूटी पार्लर भी गई थी। वह शाम को अपने माता-पिता से बात कर रही थी। फोन बंद होने के बाद उनके परिजनों ने फोन लगाया। जिसके बाद वह उसे छत पर देखने पहुंचे तो व्यायाम करने छत पर लगी रस्सी के फंदे से लटकी मिली थी। इन आरोपों को लेकर आवेदन के साथ उन्होंने न्यायाधीश पल्लवी त्रिवेदी की कोर्ट में सारे दस्तावेज भी पेश किए थे। इधर, पुलिस की तरफ से आरोपों को झूठा और भ्रामक बताते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने प्रकरण में आरोपी मां-बेटे के प्रभावशाली होने और जांच जारी होने की बात बोलते हुए जमानत याचिका का विरोध किया। जिसके बाद जमानत को निरस्त किया गया। इससे पहले इसी कोर्ट ने प्रकरण में आरोपी सास गिरिबाला सिंह की पूर्व के रिकॉर्ड को देखते हुए जमानत का लाभ दे दिया था।
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