Bhopal News: गौशाला के नजदीक जामुन के पेड़ पर लगाई थी हत्या के मामले में सजायाफ्ता बंदी ने फांसी

भोपाल। सेंट्रल जेल के सामने गौशाला के नजदीक जामुन के पेड़ पर हत्या के मामले के आजीवन कारावास के बंदी ने फांसी लगा ली। यह मामला भोपाल (Bhopal News) शहर के गांधी नगर थाना क्षेत्र का है। जेल और पुलिस प्रशासन ने संपर्क करके बेटी और दामाद को 20 अप्रैल को बुलाया। जिन्होंने शव देखने के बाद उसको अपने साथ ले जाने और अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। जिस कारण शव को हमीदिया अस्पताल के मॉर्चुरी रुम में सुरक्षित रखा गया है।
गौशाला को संभालने का काम करता था
गांधी नगर (Gandhi Nagar) थाना पुलिस के अनुसार गुड्डू आदिवासी पिता बल्ला आदिवासी उम्र 53 साल ने 2016 में हत्या की थी। वह रायसेन (Raisen) जिले के बाडी बरेली का रहने वाला है। गुड्डू आदिवासी (Guddu Adiwasi) को अदालत (Court) ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह गौशाला को संभालने का काम करता था। वह प्रतिदिन डेढ़ दर्जन बंदियों के साथ जेल के सामने स्थित गौशाला में दूध निकालने, चारा डालने से लेकर खेती के लिए ट्रेक्टर चलाने का काम करता था। गुड्डू आदिवासी 2017 से केंद्रीय जेल (Central Jail) गांधी नगर में बंद था। वह 19 अप्रैल को भी नियमित दिनचर्या करने चला गया। शाम को बोरिंग चलाने का बोलकर वह बाकी बंदियों को जाने का बोलकर पीछे रह गया। जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो जेल प्रहरी एक्टिवा लेकर मौके पर पहुंचा। उसने देखा कि वह जामुन के पेड़ पर फांसी पर लटका हुआ है। यह जानकारी तुरंत जेल प्रबंधन को देकर एक्टिवा में ही अपने साथियों के साथ जेल आया। यहां से उसे हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) ले जाया गया। डॉक्टर ने शाम लगभग पौने सात बजे मृत घोषित करके गांधी नगर पुलिस को सूचना दी। गांधी नगर थाना पुलिस ने मर्ग 41/26 कायम करके शव पीएम के लिए भेज दिया। खुदकुशी की इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश भी हो गए हैं।
कभी पैरोल पर भी नहीं गया
गुड्डू आदिवासी की सजा होने के बाद पत्नी छोड़कर चली गई। उसके रिकॉर्ड में बेटी और दामाद का नाम और फोन नंबर था। जिनसे 19 अप्रैलको संपर्क करके बुलाया गया। बेटी और दामाद ने आकर शव को देखा और उसको लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अंत्येष्टि भी नहीं करेंगे। इसके अलावा उसने कभी पैरोल नहीं ली थी। उससे जेल में मुलाकात करने कोई अन्य रिश्तेदार भी नहीं आता था। इसलिए जेल प्रबंधन ने शव को गांधी मेडिको लीगल संस्थान के मॉर्चुरी रुम में सुरक्षित रख दिया है। उसकी अंत्येष्टि को लेकर 21 अप्रैल को निर्णय लिया जाएगा। जेल अधीक्षक राकेश भांगरे (Rakesh Bhangre) ने बताया कि यदि किसी बंदी के परिजन शव को नहीं स्वीकारते हैं तो ऐसी दशा में भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में बिजली शवदाह गृह में जेल प्रबंधन की तरफ से अंत्येष्टि कराने का प्रावधान हैं। जिसके लिए सभी वैधानिक कार्रवाई के लिए अनुमति जिला प्रशासन और जेल मुख्यालय से ली जाती है।
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