Bhopal News: जिस युवक को चाकू के साथ एक दिन पहले दबोचकर सौंपा उसे बिना कार्रवाई थाने से भगाया,अगले दिन जिस परिवार ने सौंपा वहां दोबारा पहुंचा तो अपनी रक्षा में आरोपी का चाकू छीनकर मारा

भोपाल। थाने की एक असंवेदनशीलता के चलते रिटायर्ड एएसआई का पोता पुलिस रिकॉर्ड में एक गंभीर मामले का अपराधी बन गया। पुलिस कर्मचारियों की यह लापरवाही का मामला भोपाल (Bhopal News) शहर के छोला मंदिर थाने का है। जिसमें थाने के सारे अधिकारियों और कर्मचारियों ने चुप्पी साध ली है। दरअसल, एक आटो चालक का बेटा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के घर लघुशंका कर रहा था। विरोध किया तो उसने चाकू निकालकर वार किया। उसे जनता की मदद से पकड़कर थाने को चाकू के साथ सौंपा गया। लेकिन, पुलिस ने कार्रवाई करने की बजाय उसे छोड़ दिया। जिसके बाद वह उसी घर में अगले दिन फिर धमक गया। यहां अपनी जान बचाने के प्रयास में चाकू का वार उस युवक को लग गया जिसको एक दिन पहले थाने को सौंपा गया था।
यह है मामला जिसमें अफसर ने चुप्पी साधी
जानकारी के अनुसार छोला मंदिर (Chhola Mandir) थाना पुलिस ने 10 फरवरी को गाली—गलौज, धमकाने, मारपीट के साथ जानलेवा हमला करने का प्रकरण दर्ज किया था। वारदात नव जीवन कॉलोनी (Nav Jeevan Colony) में हुई थी। जिसमें दीपक पांडे (Deepak Pandey) पिता मुन्नालाल पांडे उम्र 22 साल की पीठ पर चाकू का वार लगा था। इस मामले में पुलिस ने नमन उर्फ संस्कार पांडे और गौरव माहोर (Gaurav Mahor) को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा प्रकरण में अभी अन्य आरोपी है जिनकी गिरफ्तारी पुलिस की तरफ से की जाना है। संस्कार पांडे (Sanskar Pandey) ने वेल्डर का कोर्स आईटीआई से किया है। वह फिलहाल पॉलीटेक्निक का छात्र है। मामले की जांच एएसआई प्रेम नारायण पांडे (ASI Prem Narayan Pandey) कर रहे है। हमले के पीछे जांच अधिकारी ने पुरानी रंजिश बताकर सारी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ लिया। जबकि थाना प्रभारी सरस्वती चौहान (TI Saraswati Chauhan) ने कुछ देर बाद बातचीत का बोलकर तीन दिनों तक संपर्क ही नहीं किया।
यह है असली कहानी
गिरफ्तार संस्कार पांडे की बहन संस्कृति पांडे (Sanskriti Pandey) ने बताया कि वह बी.फार्मा का कोर्स कर रही है। मेरे भाई को पुलिस वालों ने अपराधी बनाकर उसका कैरियर दांव पर लगा दिया। दीपक पांडे हमारे घर के बाहर लघुशंका कर रहा था। उसको ऐसा करने से 9 फरवरी को रोका गया था। उसने चाकू निकालकर दो बार वार किया। वह वार शटर में भी लगा। जिसके बाद कॉलोनी वालों की मदद से उसको पकड़कर उसी दिन छोला मंदिर थाने को सौंप दिया था। उसके पास जो चाकू था वह भी थाने को दिया गया था। लेकिन, अगले दिन वह दोबारा मेरे भाई पर हमला करने आया। उसने अपनी जान बचाने के लिए आरोपी का चाकू छीनकर वार किया था। यदि वह ऐसा नहीं करता तो उसकी जान चली जाती। यह सबकुछ पुलिस थाने की लापरवाही से हुआ। हमारे परिवार में पुलिस थाने की असंवेदनशीलता के चलते यह संकट पैदा हुआ है।
थाना सीसीटीवी दिखाने तैयार नहीं
इस मामले में गिरफ्तार संस्कार पांडे की मां वंदना पांडे (Vandna Pandey) ने पुलिस कमिश्नर संजय कुमार (Police Commissioner Sanjay Kumar) को आवेदन दिया है। पति संजय पांडे (Sanjay Pandey) का बीमारी के चलते तीन साल पूर्व ही निधन हुआ। घर पर दो बेटे के अलावा बेटी है। वहीं वृद्ध ससुर रामनरेश पांडे (Ramnaresh Pandey) हैं। वह राजधानी के आधा दर्जन से अधिक थानों में पदस्थ रहे हैं। घटना के वक्त वे वैवाहिक समारोह में शामिल होने रीवा (Rewa) गए थे। आरोपी संस्कार पांडे के परिवार ने 12 फरवरी को पुलिस कमिश्नर के समक्ष उपस्थित होकर आवेदन दिया है। जिसमें मांग की गई है कि 9 फरवरी की रात थाने के सीसीटीवी फुटेज निकालकर मामले की जांच की जाए। इसमें दीपक पांडे को बिना कार्रवाई छोड़ने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच करके हटाया जाए। परिजनों का यह भी आरोप है कि दीपक पांडे के पिता मुन्नालाल पांडे (Munnalal Pandey) हैं जो कि आटो चलाते हैं। वह पुलिस के लिए कई प्रकरणों में गवाह बनते हैं। इसलिए उसके बेटे को रात को छोड़ा गया था।
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