MP Cop News: नौ करोड़ लोगों को राहत देने वाली सेवा अब 112 डायल करने पर आएगी

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MP Cop News: मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन सेंटर से 1200 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर पूरे प्रदेश में करेंगे रवाना

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मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव जी ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन सेंटर में डायल 112 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर पूरे प्रदेश में रवाना किया।

भोपाल। मध्यप्रदेश में लगभग एक दशक पूर्व शुरु हुई डायल—100 की व्यवस्था अब नए नंबर और कलेवर के साथ जनता की सेवा के लिए आ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव (MP Cop News) इस नई प्रणाली को स्वतंत्रता दिवस के पूर्व जनता को समर्पित करने जा रहे हैं। आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री 1200 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगें।

एमपी पुलिस ने किया नवाचार

जानकारी के अनुसार प्रदेश की स्थापना दिवस यानि 01 नवबंर से डायल—100 व्यवस्था लागू की गई थी। उस वक्त एक हजार वाहनों के साथ इसे संचालित किया गया था। अब उसमें सुधार करते हुए नई प्रणाली में डायल—112 (Dial-112) सेवा की गई है। इसमें जनता से जुड़ी कई सेवाओं के लिए यह वाहन मौके पर पहुंच सकेंगे। पुलिस मुख्यालय के अनुसार 1200 वाहनों में 600 स्कार्पियो और इतनी ही संख्या में बोलेरो वाहन को डायल—112 बनाया गया है। एमपी पुलिस के इस नवाचार को देखकर दूसरे कई अन्य राज्यों ने अपने यहां इसको लागू किया है। अब एमपी इस व्यवस्था में नए सुधार के साथ उसे और अधिक जनता के लिए कारगर बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री (CM DR Mohan Yadav) 14 अगस्त की दोपहर लगभग सवा बारह बजे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस मौके पर डीजीपी कैलाश मकवाना (DGP Kailash Makwana) , एडीजी रेडियो एवं दूरसंचार संजीव शमी समेत कई अन्य अधिकारी इस अवसर पर मौजूद होंगे।एडीजी दूरसंचार ने बताया कि जन-सुरक्षा की दिशा में यह ऐतिहासिक बदलाव है। डायल-100 का गौरवशाली इतिहास रचा है। अब डायल-112 को एकीकृत, स्मार्ट और बहु-एजेंसी आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा। अब पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन, महिला हेल्पलाइन, साइबर क्राइम, रेल मदद, हाईवे एक्सिडेंट रिस्पॉन्स, प्राकृतिक आपदा और महिला एवं चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी तमाम टोल फ्री नंबर के स्थान पर काम करेगा। तेज़ी से बदलते तकनीकी परिदृश्य और सेवा गुणवत्ता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, डायल-112 को अधिक कुशल, बुद्धिमान और नागरिक-जागरूक प्रणाली के रूप में पुनः डिज़ाइन किया गया है। नई तकनीकों—डेटा एनालिटिक्स, रीयल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और IoT—के साथ डायल-112 अब सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि खतरे का पूर्वानुमान कर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सक्षम है।

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डायल—112 की वह खूबियां जिसका लाभ जनता उठा सकेगी

डायल—112 में प्रत्येक शिफ्ट में 100 एजेंट की क्षमता वाला नया कॉन्टैक्ट सेंटर, जिसमें 40 सीटों का डिस्पैच यूनिट रहेगा। यह PRI लाइनों से SIP आधारित ट्रंक लाइन पर माइग्रेशन, जिससे 112 पर कॉल एक्सेस अधिक सहज हो सकेगी। उन्नत बिज़नेस इंटेलिजेंस (BI) और MIS रिपोर्टिंग टूल्स के साथ यह वाहन काम करेंगे। नागरिकों और FRV के बीच संपर्क (MP Cop News) को बेहतर बनाते हुए गोपनीयता बनाए रखने हेतु नंबर मास्किंग समाधान है। एफआरवी के रख-रखाव को ट्रैक करने हेतु समग्र फ्लीट मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर इंस्टाल किए गए हैं। चैटबॉट जैसे नॉन-वॉयस माध्यमों से नागरिकों से संवाद और शिकायतों की ट्रैकिंग होगी। नागरिकों और पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष मोबाइल ऐप्स के जरिए निगरानी होगी। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) सॉफ़्टवेयर, बायोमेट्रिक उपस्थिति के साथ यह लैस होगा। डायल—112 में डैशबोर्ड कैमरा और बॉडी वॉर्न कैमरा की व्यवस्था की गई है। इससे विवाद और पारदर्शिता बढ़ेगी।

यह है डायल—100 का ऐतिहासिक इतिहास

सेंट्रल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए डायल—100 (Dial-100) सेवा शुरु हुई थी। टोल-फ्री नंबर 100 पर कॉल करते थे, जहां प्रशिक्षित कॉल-टेकर कंप्यूटर-सहायता प्राप्त डिस्पैच सॉफ़्टवेयर के माध्यम से निकटतम उपलब्ध डायल-100 की पहचान कर तुरंत रवाना करते थे। एक हजार वाहनों में जीपीएस लैस थे। इसके अलावा डेढ़ सौ बाइक भी डायल—100 में थी। इन्हें मोबाइल फोन और मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) से लैस किया गया था। डायल-100 कॉल सेंटर में आपात स्थिति में कॉलर की लोकेशन ट्रेस करने के लिए लोकेशन बेस्ड सिस्टम (LBS) स्थापित था।

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अब तक इतनी लोगों तक पहुंची थी डायल—100

प्रदेश में 01 नवंबर, 2015 से डायल—100 की सेवाएं शुरु हुई थी। इस सेवा के जरिए जून-2025 तक आठ करोड़ 99 लाख लाख से अधिक लोगों ने इस नंबर पर मदद मांगी। इसमें से दो करोड़ से अधिक कॉल सही पाई गई। डायल—100 ने अब तक करीब सवा दो लाख वरिष्ठ नागरिकों को सहायता पहुंचाई है। इसके अलावा 19 लाख 71 हजार से अधिक महिलाओं को मदद की। बच्चे के जन्म के बाद फेंकने के 1300 मामलों में डायल—100 पहुंची थी। सड़क दुर्घटनाओं के 12 लाख 48 हजार से अधिक मामलों में डायल—100 ने पहुंचकर अपनी सेवाएं दी थी। इसी तरह 27 हजार से अधिक लापता बच्चों की खोजबीन में मदद पहुंचाई। आत्महत्या से जुड़े दो लाख, 64 हजार से अधिक सूचनाओं में पहुंचकर डायल—100 ने अपनी सेवाएं दी है।

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