Bhopal News: महादेव जैसा रूद्र डायमंड एप का खुलासा

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Bhopal News: छत्तीसगढ़ से आकर डेरा जमाए सात आरोपियों को पुलिस ने दबोचा, दो कार, साढ़े तीन लाख रुपए नकदी के अलावा डेढ़ करोड़ का हिसाब मिला

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। छत्तीसगढ़ से संचालित महादेव सट्टा जैसा ही एक अन्य नेटवर्क रूद्र डायमंड एप (Rudra Diamond App) का गिरोह भोपाल पुलिस के हत्थे लग गया है। भोपाल शहर की अयोध्या नगर पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को दबोचा है। इनसे दो कार, 40 मोबाइल, 80 सिम, 177 एटीएम कार्ड, पांच लैपटॉप के अलावा तीन लाख 54 हजार रुपए नकद मिले हैं। अधिकांश आरोपी छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के रहने वाले हैं। आरोपियों के कब्जे से करीब डेढ़ करोड़ रूपए का लेन-देन से संबंधित रजिस्टर पुलिस के हाथ लगा है।

एशिया कप के फायनल मुकाबले पर सट्टा बुक करते दबोचा

यह जानकारी देते हुए एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी (ADCP Gautam Solanki) ने बताया कि मुख्य आरोपी अरुण वर्मा (Arun Verma) है। वह मिसरोद (Misrod) थाना क्षेत्र स्थित आरआरजी कैंपस (RRG Campus) में रहता है। यहां से रूद डायमंड वेबसाइट (Rudra Diamond Website) के जरिए एक्सिस लेकर यह गिरोह काम कर रहा था। उसका साथ डिगेश्वर प्रसाद वर्मा (Digeshwar Prasad Verma) देता था। यह दोनों अयोध्या नगर (Ayodhya Nagar) थाना क्षेत्र स्थित मीनाल (Minal) के पास कार के भीतर भारत-पाकिस्तान के बीच एशिया कप (Asia Cup) के फायनल मुकाबले पर सट्टा (Satta) बुक करते हुए दबोचा था। इसके बाद पुलिस दोनों को लेकर मिसरोद पहुंची तो यह सारा सामान वहां से बरामद किया गया। प्राथमिक जांच में पता चला है कि सिम फर्जी नाम-पते पर लिए गए थे। पुलिस इनके अलावा गिरफ्तार पांच अन्य आरोपी गोपी मणिकपुरी, अंकित दास, तरुण वर्मा और सुनील वर्मा से पूछताछ कर रही है। तरुण वर्मा रायपुर शहर का रहने वाला है। जबकि दिव्यांशु पवार छिंदवाड़ा जिले का रहने वाला है। बाकी सारे आरोपी बलौदा बाजार जिले के रहने वाले हैं।

मास्टर माइंड जीजा-साले ने नोट गिनने की लगा रखी थी मशीन

यह गिरोह पिछले छह महीने से लंबे पैमाने पर सट्टा बुक करने का काम कर रहा था। डिगेश्वर की पत्नी को अरुण वर्मा अपनी बहन मानता है। इसलिए दोनों जीजा-साले बोलते हैं। दोनों  ने बकायदा नोट गिनने की मशीन भी लगा रखी थी। पुलिस ने इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय गिरोहों से जुड़े होने की अटकलों से इंकार नहीं किया है। अब इन्हें खाता और मोबाइल सिम मुहैया कराने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। फर्जी पहचान पत्रों से खुले खातों में जमा 15 लाख रुपए फ्रीज कराए गए जिसके लिए पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश करके पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। टेलीग्राम के जरिए यह पूरा नेटवर्क चल रहा था।

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हर दिन पासवर्ड और लॉग इन नया मिलता था

अयोध्या नगर थाना पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अरुण वर्मा (Arun Verma) पिता खिलेश्वर राव वर्मा उम्र 28 साल बलोदा (Baloda) बाजार जिले के पलारी (Palari) थाना क्षेत्र का रहने वाला है। आरोपी ने ही टेलीग्राम के जरिए वेबसाइट की एक्सिस लिंक हासिल की थी। उससे हुई पूछताछ के बाद पासवर्ड समेत अन्य जानकारियां पुलिस (Bhopal News) को पता चली है। अरुण वर्मा का करीबी दोसत डिगेश्वर प्रसाद वर्मा (Digeshwar Prasad Verma) पिता राम प्यारे वर्मा उम्र 33 साल है। वह भी बलोदा बाजार के भाटापारा (Bhatapara) थाना क्षेत्र का रहने वाला है। डिगेश्वर प्रसाद वर्मा भोपाल में मिसरोद (Misrod) थाना क्षेत्र में रहता है। उसने ही अपने घर में बकायदा कॉल सेंटर बना रखा था। डिगेश्वर की पत्नी को अरुण वर्मा अपनी बहन मानता है। इसलिए दोनों जीजा-साले बोलते हैं। आरोपी सट्टे से मिली रकम के जरिए भारी-भरकम निवेश भी कर रहे थे। उसके दस्तावेज भी मिले है जिसका खुलासा अभी पुलिस ने नहीं किया है। आरोपियों ने अलग-अलग दो कारें भी खरीदी हैं। तीसरा आरोपी दिव्यांशु पवार (Divyanshu Pawar) पिता कैलाश पवार उम्र 26 साल है। वह छिंदवाड़ा (Chhindwara) के चंदनगांव का रहने वाला है। पांचवां आरोपी अंकित दास (Ankit Das) पिता सोहन दास उम्र 23 साल है। वह शहडोल (Shahdol) जिले के अमलई का रहने वाला है। इसी तरह छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के तिल्ला थाना क्षेत्र में रहने वाला आरोपी तरुण वर्मा (Tarun Verma) पिता परशुराम वर्मा उम्र 24 साल भी कॉल सेंटर में सहयोग करता था। सातवां आरोपी सुनील वर्मा (Sunil Verma) पिता लेखराम वर्मा उम्र 35 साल है। वह भी बलोदा बजार के पलारी थाना क्षेत्र का रहने वाला है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि एक्सिस के लिए हर दिन पासवर्ड और लॉग इन नया मिलता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बरामद लैपटॉप (Laptop) और मोबाइल (Mobile) को सायबर क्राइम के पास फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। इनके नंबरों को निकालने के बाद दूसरे राज्यों और जिलों में चल रहे नेटवर्क के साथियों को दबोचा जा सकेगा। आरोपियों के पास से 180 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इन सभी बैंक खातों में हुए लेन-देन और उनके मालिकों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अभी तक 50 एटीएम में जमा रकम को ब्लॉक कर चुकी है। इस संबंध में बैंक के अधिकारियों को पुलिस की तरफ से पत्राचार भी कर दिया गया है।

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