MP Cop Gossip: पुलिस मौके पर पहुंचती उससे पहले शराब की पेटियां तालाब में फेंकी, वीडियो भी रातोंरात हुआ गायब, एफआईआर से बचने दो लाख की डिमांड, टीआई चर्चित मुकदमे के बीच एक घटना को लेकर बैचेन, कांस्टेबल को महंगा पड़ा निरीक्षक को गरियाना

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग के भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। उन्हीं के बीच कुछ बातें ऐसी होती है जो मीडिया के सामने नहीं आती। वह एक कान से दूसरे कान और बंद जुबान में दबी रह जाती है। ऐसे ही बातों का हमारा साप्ताहिक कॉलम एमपी कॉप गॉसिप (MP Cop Gossip) है। इसमें हमारा मकसद सिर्फ चुटकी लेना है। किसी व्यवस्था को कम—ज्यादा या व्यक्ति अथवा पद को छोटा—बड़ा बताना नहीं हैं।
सफेदपोश माफिया हो जाते बेनकाब
घटना लगभग एक पखवाड़ा पुरानी है। घटना स्थल शहर के एक तालाब किनारे का है। इस मामले का वीडियो (Video) बना था जो कुछ जगहों पर चला उसके बाद गायब भी हो गया। दरअसल, मामला यह है कि एक ट्रेडिंग का काम करने वाले राष्ट्रीय दल के एक नेता का लग्जरी वाहन तालाब किनारे पलट गया। उसके पलटने के बाद उसमें भारी शीशी की आवाजें गूंजी। कुछ चटकी और टूटी भी। वह सबकुछ तो ठीक था। लेकिन, जब वाहन पलटा तो उसमें सवार लोग अस्पताल जाने की बजाय बदहवास होकर पिछले हिस्से में रखी शराब की पेटियों को उठा—उठाकर तालाब मेें फेंकने लगे। इस घटना का एक जागरूक नागरिक ने रात को वीडियो भी बनाया। यह वाहन जिस व्यक्ति का था वह एक विधायक के खास है और उनकी दिनरात सेवा करने के बाद बड़े मुश्किल से करीबी होने का मुकाम पा सके थे। हालांकि जिस इलाके में यह पूरा वाक्या हुआ वहां के थाना प्रभारी ने भी राहत की सांस ली। उन्होंने कोई हलचल ही नहीं की क्योंकि पता था कि कुछ करेंगें तो आगे क्या होने वाला है।
थाने में दो दिन तक चलता रहा सौदा
यह वाक्या शहर के एक ऐसे थाने का है जो सड़क किनारे हैं। यहां से भारीभरकम वाहन भी गुजरते हैं। कोई भी वाहन यदि थाने (MP Cop Gossip) के नजदीक आकर जरा भी यहां—वहां हुआ तो सीधे रोजनामचे अपनी एंट्री वह स्वयं करा लेगा। उस थाने के भीतर पिछले दिनों एक खेल चल रहा था। दरअसल, एक कुंवारी दुल्हन ने बच्चे को जन्म दिया। जिसके बाद उसे गुपचुप एक व्यक्ति को सौंप दिया गया। उस बच्चे के मालिकाना हक को लेकर दो परिवारों में तब जंग छिड़ी जब उसको आधिकारिक रुप से अपनाने की बात आई। इधर—उधर होते हुए मामला थाने पहुंचा। महिला व्यस्क थी तो सीडब्ल्यूसी ने बच्चा उसे ही सौंपने के आदेश दे दिए। यहां तक तो सबकुछ ठीक था। लेकिन, उसके बाद थाने के भीतर पूरे मामले में सैटलमेंट के लिए दो लाख रुपए की असहाय परिवार पर डिमांड रख दी गई। बेचारा गरीब परिवार काफी गिड़गिड़ाता रहा और जेवरात गिरवी रखकर 50 हजार रुपए का इंतजाम कर सका। इसके बावजूद मामला तब तक नहीं सुलटा। जिसको सैटलमेंट करना था वह इस कारण दो दिनों तक अवैध तरीके से थाने के एक गोपनीय कक्ष में पड़ा रहा।
मुंशी की जेब में पड़ी मार

शहर का एक थाना इन दिनों भारी चर्चा में हैं। मीडिया भी दिन—दोपहर, सुबह—शाम कभी भी धमक जा रहा है। सभी खबरनवीस एक ही बात जानना चाहते हैं कि आरोपियों के मामले में अब नया क्या। इन कवायदों के बीच थाने के स्टाफ एक—दूसरे के कान में मंत्र फूंक रहे हैं। इसमें पीड़ा थी और भय भी है। इसके बावजूद हसल रैपर का गीत ‘मैं नहीं तो कौन बे’ वाली थीम पर थाने के भीतर हरकतें चल रही है। वहां जाने वाले दर्जनों खबरनवीस भी इतनी बड़ी सूचना को सूंघ ही नहीं पाए। यह बात थाने के लिए अच्छी है लेकिन खबरनवीस के लिए अपनी कार्यशैली की समीक्षा वाली है। दरअसल, पिछले दिनों एक संदेही को पूछताछ के लिए थाने में लाया गया। उसके पहने हुए जेवरात उतारकर थाना प्रभारी के कक्ष में सुरक्षित रख दिए गए। चर्चित मामले के बीच आते—जाते लोगों में से किसी एक ने चांदी की चेन टीआई के कैबिन से उड़ा दी। जिसके बाद हर कोई थाने में परेश रावल की कॉमेडी फिल्म हेराफेरी के डॉयलॉग ‘अरे देवा ये गड़बड़ है बाबा’ स्टाइल में मीम वाला चेहरा बना रहा है। हालांकि इस मीम की सजा एक हवलदार को उठाना पड़ रही है। क्योंकि उसकी जेब में बोझ पड़ा और वह अपने खर्च में चांदी की चेन का इंतजाम कर रहा है।
महंगा पड़ा नशे की हालत में भूत चढ़ना
शहर का एक थाना जो किराए केे भवन में चलता है वहां का एक हैरान करने वाला किस्सा सामने आ रहा है। यहां एक कांस्टेबल पिछले दिनों बाहुबली बन बैठे। उन्होंने भांग पिया था या गांजा लेकिन जो हरकत उनसे हुई वह उनकी तबाही का कारण बन गई। कांस्टेबल रोज झोला उठाकर डीसीपी अधिकारी के दफ्तर में चक्कर काट रहे हैं। वह चाहते हैं कि पहली और अंतिम भूल मानकर कांस्टेबल को संभलने का अवसर दिया जाए। घर से रोज दीपक और आरती करके इसी मुराद में वह साहब के दरबार में अरदास लगाने जाते हैं। हालांकि डीसीपी साहब का दिल अब तक नहीं पसीजा। कांस्टेबल कई नेताओं और रसूखदार संपर्क वालों के पास भी जाकर गिड़गिड़ा चुके हैं। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई ही नहीं हो रही। दरअसल, उन्होंने नशे की हालत में थाना प्रभारी को जमकर नसीहत दे डाली। उन्होंने कान में बोले जा रहे थाना प्रभारी के किस्सों को नशे की हालत में उजागर करते हुए कान में अश्लील शब्दों का बोध कराने वाली रचनाओं को जोर—जोर से सुनाते हुए उनके लेन—देन वाले किस्सों को भी उजागर कर दिया। जितने भी किस्से नशे की हालत में उसने बताए वह थाने के ही कई साथियों ने उसे बताए थे। इसलिए उन साथियों ने भी अपनी जान बचाने के लिए उसकी हरकतों से किनारा कर लिया और निरीक्षक के पक्ष में हो गए। निरीक्षक ने भी बिना देरी किए किस्सों को किनारे करके अश्लील शब्दों को आधार बनाकर अफसरों से कांस्टेबल की शिकायत कर दी। जिसकेे बाद कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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