Bhopal Gang Rape: डीसीपी को अधूरी कहानी बताने पर फटकार पड़ी, दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर अब सक्रिय हुई पुलिस

भोपाल। साढ़े सत्रह साल की दलित नाबालिग से गैंगरेप मामले में कई लापरवाहियां उजागर होने लगी है। भोपाल (Bhopal Gang Rape) शहरकी बागसेवनिया थाना पुलिस ने इस मामले मुख्य आरोपी महिला के बिल्डर दोस्त को सबसे पहले थाने बुलाया था। लेकिन, एक फोन आने के बाद उसे जाने दिया गया। अभी भी इस मामले से जुड़े दो आरोपी फरार है। जिनके संबंध में थाना पुलिस की तरफ से चुप्पी साध ली गई है। हालांकि डीसीपी विवेेक सिंह ने इस पूरे प्रकरण में की गई लापरवाहियों को लेकर सख्त नाराजगी जता दी है। जिसके बाद पूर्व में छोड़े गए आरोपियों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई शुरु कर दी गई है।
इनकी हुई गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार पुलिस ने निखिल सिंह कछवाहा पिता सूर्यभान सिंह कछवाहा उम्र 32 साल, अतुल मेडेकर पिता भोजराज मेडेकर उम्र 30 साल को गिरफ्तार किया है। यह दोनों गिरफ्तारियां पूर्व में गिरफ्तार मोनिका इंदौरकर पिता शिवचरण इंदौरकर उम्र 26 साल और रेणुका बुनकर पिता दशरथ बुनकर उम्र 24 साल के बयानों के आधार पर की गई है। निखिल सिंह कछवाहा (Nikhil Singh Kachwaha) और अतुल मेडेकर (Atul Medekar) मूलत: बालाघाट (Balaghat) जिले के रहने वाले हैं। भोपाल के ऐशबाग (Aishbag) थाना क्षेत्र स्थित एक अपार्टमेंट में किराए से रहते हैं। दोनों बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। मोनिका इंदौरकर (Monika Indorekar) और रेणुका बुनकर (Renuka Bunkar) मूलत: छिंदवाड़ा (Chhindwara) जिले की रहने वाली है। यहां बागसेवनिया (Bagsewania) स्थित विद्या नगर (Vidya Nagar) मल्टी में किराए से रहती है। पुलिस ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी 29 मार्च को दर्शाई है। जबकि यह पूरा प्रकरण 27 मार्च को दर्ज किया गया था।
यह है मुख्य कहानी जिस पर पर्दा है

पुलिस सूत्रों के अनुसार मोनिका इंदौरकर का ब्यॉयफ्रेंड है जो कि विदिशा (Vidisha) जिले का रहने वाला है। उसका मोनिका के यहां सबसे ज्यादा आना जाना था। वह विदिशा में बिल्डर का काम करता है। यह प्रकरण एफआईआर दर्ज होने से पहले कई पुलिस कर्मचारियों के संज्ञान में था। सबसे पहले बिल्डर को ही थाने में लाया गया था। जिसके बाद अफसरों को फोन आने लगे। जिस कारण बिल्डर को थाने से जाने दिया गया। इसके बाद आनन—फानन में मोनिका इंदौरकर और रेणुका बुनकर के आस—पास कहानी बनाकर एफआईआर दर्ज की गई। जिन आरोपियों ने गैंगरेप किया उन्हें एफआईआर में अज्ञात बताया गया। अफसरों को जब पता चला कि कई तरह की लापरवाहियां इस प्रकरण में की गई है तो मामले से जुड़े सारे जांच अधिकारियों को बदल दिया गया। इसके बाद आनन—फानन में सबसे पहले दोनों युवतियों की गिरफ्तारी की गई। जिनके बाद बिल्डर के लिए काम करने वाले पेटी ठेकेदारों को दबोच लिया गया। लेकिन बिल्डर की गिरफ्तारी पर अफसरों ने चुप्पी साध ली है। जिन दो युवकों को गिरफ्तार किया गया वह बीयर और शराब लेकर आने वालों में शामिल थे।
यह है पूरी कहानी जिसमें हो रही है किरकिरी
पीड़िता छिंदवाड़ा जिले की रहने वाली है। उसने कक्षा बारहवीं तक पढ़ाई की है। उसकी बड़ी बहन एक निजी अस्पताल में स्टाफ नर्स है। उसकी ही एक सहेली इस पूरे प्रकरण की मुख्य सूत्रधार है। आरोपियों ने पीड़िता को झांसा दिया था कि उसे कॉलेज की पढाई के अलावा जॉब दिलाया जाएगा। पीड़िता 18 मार्च को पंचवेली ट्रेन से भोपाल पहुंची। उसे रेपिडो के जरिए विद्या नगर बुलाया। यहां उसके साथ बीयर फिर नीट शराब पिलाकर उसके साथ गैंगरेप किया गया था।
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