Bhopal News: घटना स्थल पर थाने का हर बड़ा अफसर पहुंचा लेकिन सात लाख रुपए की चोरी पर एफआईआर में हुई देरी पर कुछ नहीं बोला

भोपाल। पुलिस विभाग में जागरुकता और मैदान में खोती उसकी साख की यह झकझोर देने वाली कहानी हैं। इस कहानी की असली वजह अभी तक मैन स्ट्रीम मीडिया में आई ही नहीं हैं। घटना भोपाल (Bhopal News) शहर के स्टेशन बजरिया थाना क्षेत्र की है। राजधानी की जनता को 11 सितंबर की सुबह समाचार पत्रों के जरिए मालूम हुआ कि माली के घर सात लाख रुपए से ज्यादा की चोरी हुई है। घटना को कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया गया कि वारदात एक दिन पहले ही हुई है। लेकिन, सच्चाई यह है कि वारदात चौबीस दिन पहले हुई थी। घटना के बारे में हर अधिकारी को पता था। लेकिन, पड़ताल शुरु ही नहीं की गई। अब एफआईआर दर्ज करके पुलिस अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है।
घर की पूरी जमा पूंजी लुटने के कारण परिवार ही सदमे में चला गया
जानकारी के अनुसार वारदात 15 अगस्त की रात लगभग साढ़े आठ बजे से साढ़े नौ बजे के बीच हुई थी। मकान नंद किशोर माली (Nand Kishore Mali) पिता मदनलाल माली उम्र 43 साल का है। वे कोच फैक्ट्री हनुमान मंदिर के पास ग्राम करारिया में रहते हैं। परिवार का पुश्तैनी धंधा फूल—माला का है। पुलिस ने नंद किशोर माली से आवेदन मांगा था। नंद किशोर माली के घर से तीन लाख रुपए नकदी के अलावा करीब चार लाख रुपए के जेवरात चोरी चले गए। इतनी भारी मात्रा में चोरी उस वक्त हुई जब शहर स्वतंत्रता दिवस के कारण अलर्ट मोड पर था। वारदात की जानकारी थाना प्रभारी शिल्पा कौरव (TI Shilpa Kaurav) को उसी दिन लग गई थी। एफएसएल से लेकर समस्त प्रक्रियाएं पड़ताल के लिए की गई। लेकिन, एफआईआर इसलिए दर्ज नहीं हुई कि परिवार सामने नहीं आया। दरअसल, नंद किशोर माली की सारी जमा पूंजी लूट जाने के बाद उसके पिता, भाई और पत्नी सदमे में चले गए थे। वह उनके इलाज में जुट गया और जान बचाने में लगा रहा। इसके बावजूद मैदानी अफसरों का स्वविवेक नहीं जागा। अफसरों ने सक्रियता के साथ गिरोह के बारे में सुराग लगाना ही छोड़ दिया और चुप हो गए। थाने का हर कर्मचारी इस वारदात पर पर्दा डला रहे उसमें ही जुटा रहा। अब एफआईआर उसके बाद जांच के नाम पर संदेहियों से पूछताछ की कपोल कहानियां पुलिस की तरफ से बताई जा रही है। बहरहाल पुलिस ने मीडिया से आधिकारिक रुप से 10 सितंबर को प्रकरण 215/25 दर्ज करने के बाद बातचीत की है। इससे पहले स्टेशन बजरिया थाने के सारे अधिकारी इस घटना को लेकर एक—दूसरे के कान में ही बता पा रहे थे।
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