Exclusive News: प्रकरण दर्ज करके गुपचुप जेल दाखिल लाइव स्टॉक कंपनी के संचालकों में शामिल असलम कुरैशी रिमांड पर, पार्टनरशिप से लेकर स्लॉटर इंस्टालमेंट में हुए निवेश का स्रोत पता लगाने का काम शुरु, खरीददार और गौमांस की सप्लाई चेन में शामिल अन्य किरदारों की जानकारी जुटना शुरु, मैनेजर समेत अन्य करीबी के मोबाइल कॉल डिटेल खोलेंगें राज

भोपाल। गौमांस मामले की जांच में लापरवाही बरतने पर भोपाल (Bhopal News) शहर के जहांगीराबाद एसीपी बिट्टू शर्मा को तीन दिन पूर्व हटा दिया गया। जिसके बाद नई एसआईटी (SIT) बनाई गई थी। ऐसा करते ही एसआईटी ने गुपचुप जेल भेजे गए लाइव स्टॉक कंपनी के पार्टनरों में शामिल असलम कुरैशी और कंटेनर ड्रायवर को पूछताछ (Exclusive News) के लिए रिमांड पर ले लिया गया है। यह पूछताछ गुप्त स्थान पर की जा रही है। ताकि असलम कुरैशी पर किसी तरह का कोई आते—जाते हमला न कर सके। दरअसल, राजधानी में एक पखवाड़े से इस कांड को लेकर हिंदू संगठन उग्र हैं। वह महापौर मालती राय के बंगले में कालिख पोतने के अलावा कई तरह के प्रदर्शन कर चुका है।
आय स्रोत का पता लगा रही पुलिस
सूत्रों के अनुसार एसआईटी चीफ हबीबगंज एसीपी उमेश तिवारी (ACP Umesh Tiwari) है। उनके साथ जहांगीराबाद (Jahangirabad) थाना प्रभारी (TI Maan Singh Chaudhry) मान सिंह चौधरी और शाहपुरा (Shahpura) थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह ठाकुर (TI Lokendra Singh Thakur) को शामिल किया गया है। जांच दल में सारे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्कता के साथ काम करने की ताकीद दी गई है। उमेश तिवारी ने लगभग दो दर्जन बिंदुओं पर पूछताछ के पाइंट बना लिए हैं। जिसके बाद जहांगीराबाद थाने की तरफ से फिर पूछताछ के लिए जिला अदालत में आवेदन लगाया गया था। पुलिस ने 8 जनवरी को गिरफ्तार लाइव स्टॉक कंपनी (livestock Company) के संचालकों में शामिल असलम कुरैशी (Aslam Qureshi) और ड्रायवर शोयब को 25 जनवरी तक पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। पुलिस की जांच में सबसे पहला प्रश्न असलम कुरैशी के आय स्रोत का पता लगाना है। इसके अलावा लाइव स्टॉक कंपनी के मूल संचालक की जानकारी जुटाना है। क्योंकि इस प्रकरण में तीन अन्य लोगों पर एसीपी बिट्टू शर्मा (ACP Bittu Sharma) ने दरियादिली दिखाई थी। इसी बात को लेकर हिंदू संगठन उग्र हैं। जानकारी के अनुसार लाइव स्टॉक कंपनी मई, 2022 में ग्वालियर (Gwalior) में पंजीकृत हुई थी। इससे पहले कंपनी में मोहम्मद मुर्शलीन कुरैशी (Mohammed Murshleen Qureshi) के अलावा अमीन उद्दीन (Ameen Uddin) और जावेद रहमान (Javed Rehman) पार्टनर थे। इनकी भोपाल में नगर निगम (Nagar Nigam) की तरफ से सितंबर, 2025 में मिले पीपीपी मोड पर काम करने के ठेके में भूमिका का पता लगाया जा रहा है। मोहम्मद मुर्शलीन कुरैशी की तीन अन्य फर्म फलक फ्रोजन फूड एक्सपोर्टर्स (Falak Frozen Food Exporters) , अल नवेद एग्रो फूड इंडस्ट्रीज (Al Naveed Agro Food Industries) दो फर्म है। जिसमें मोहम्मद मुर्शलीन कुरैशी शामिल है। यह फर्म शुरु से स्लॉटर का काम करती आई है। फर्म को काम देने से पहले भोपाल नगर निगम ने स्लॉटर (Slaughter) के करीब पांच करोड़ रुपए के उपकरण खरीदे थे। यह उपकरण तत्कालीन निगम कमिश्नर गुलशन बामरा (Gulshan Bamra) के कार्यकाल में खरीदे गए थे। हालांकि राजनीतिक खींचतान के चलते स्लाटर हाउस का टेंडर लटक रहा था। लेकिन, महापौर मालती राय के मौन इशारे पर इसे अमलीजामा दिया गया। जिस कारण मालती राय (Mayor Malti Rai) हिंदू संगठन के निशाने पर हैं।
निगम से भी जवाब तलब करेगी पुलिस
एसआईटी (SIT) इस मामले में निगम के अधिकारियों से भी जवाब तलब करने जा रही है। वह यह पता लगा रही है कि स्लॉटर हाउस (Slaughter House) में 50 प्रतिशत की निगम की भागीदारी है तो उसे किन कर्मचारियों के भरोसे जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन कर्मचारियों का प्रोटोकॉल और उसकी गाइड लाइन भी निगम से मांगी जा रही है। इस काम में एसआईटी निगम के पूर्व सेवानिवृत्त अफसरों से भी राय ले रही है। पुलिस की तरफ से खरीदी—बिक्री के संबंध में भी डेटा लिया जा रहा है। जिसके बाद इस सनसनीखेज मामले में बच गए अन्य आरोपियों का जेल की सलाखों के पीछे जाना तय है।
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