Exclusive News: दस दिन के भीतर में लूट की तीन वारदात और आधा दर्जन डकैती की योजना बनाते गिरफ्तार,पुलिस के रुटीन चेक पाइंट अब बदमाशों के लिए रणनीति का हिस्सा बने
सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई
भोपाल। राजधानी में सिलसिलेवार हो रही लूट की वारदातों से हर नागरिक सहमा हुआ है। उसकी वजह थानों के अनुसार अलग—अलग है। पिछले दस दिनों के भीतर में दो संगीन लूट की वारदातें हुई। पहली वारदात भोपाल (Exclusive News) शहर के श्यामला हिल्स में तो दूसरी वारदात गोविंदपुरा इलाके में हुई। इन घटनाओं में चिकित्सक समेत तीन लोगों की जान पर बन आई है। सभी अलग—अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।
यह है वह कमियां जिसकी समीक्षा नहीं कर रहे अफसर
शहर में पुलिस के चैकिंग पाइंट स्थायी है। इसके अलावा चीता पेट्रोलिंग का पुराना फॉर्मूला लगभग खत्म हैं। जिसका फायदा कुख्यात लुटेरे और बदमाश उठा रहे हैं। जबकि अलग—अलग निर्माण कार्य के चलते शहर का यातायात का स्वरुप ही बदल चुका है। अयोध्या बायपास में फ्लाई ओवर और सिक्स लेन रोड निर्माण के चलते यहां का सारा यातायात डायवर्ट रास्तों पर है। इसी तरह रत्नागिरी से भदभदा के बीच बन रहे ब्ल्यू लाइन मेट्रो (METRO) निर्माण के चलते यहां का यातायात भी बदले रुट पर ही चल रहा है। आम नागरिक भेल की वीरान और अंधेरी सड़कों को वैकल्पिक मार्ग बना रहे है। इस बात से पुलिस बेखबर है। उसका नियमित रुट पर ही चैकिंग पाइंट अभी भी चल रहा है। जबकि भीतरी हिस्सो में चीता—चार्ली की निगरानी शून्य है।
शून्य की यह है वास्तविक वजह
चीता—चार्ली के पास भीतरी इलाकों में घुमने का समय नहीं है। क्योंकि एक तरफ ड्रग फ्री का टारगेट भोपाल पुलिस को मिला हुआ है। वहीं गोविंदपुरा (Govindpura) थाना प्रभारी के आम सड़कों पर शराब पीने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी टारगेट है। नतीजतन, चीता—चार्ली की निगाहें इन्हीं दो बिंदुओं पर फोकस होने के चलते वह लूट करने वालों को चिन्हित करने और निगरानी करने का काम नहीं कर पा रहे। यह हाल श्यामला हिल्स (Shyamla Hills) इलाके में भी है। यहां टारगेट की खोज में लगी थाने की पुलिस बस्तियों में फोकस करती रह गई। नतीजतन, कुख्यात बदमाश ने मेन रोड पर वारदात करके डॉक्टर मनोज वर्मा (Dr Manoj Verma) को मिर्च झोंककर लूट लिया।
इस महीने गोविंदपुरा में हुई वारदातें
छात्र अनिल यादव से 1 अप्रैल की रात लगभग नौ बजे मोबाइल झपटकर लुटेरे भागे
सागर के किसान को आईएसबीटी से बैठाकर भेल के खंडहरनुमा इलाकों में ले जाकर लूटा
कुनाल त्रिपाठी और उसके दोस्त को भेल के खंडहर मकान के भीतर लूटा। वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस को पता चला।
भेल सबसे ज्यादा चुनौती
गोविंदपुरा थाना, जिला भोपाल — फाइल फोटो
भेल के आस—पास और भीतर ही भीतर घनी बस्ती बस गई है। यहां लगभग एक हजार से ज्यादा घर चिन्हित नहीं हो सके हैं। यह बात पीएम की यात्रा के दौरान समीक्षा बैठक (Exclusive News) में उजागर भी हो चुकी है। बस्तियों में निगरानी का कोई फॉर्मूला भी नहीं है। जिसका फायदा बाहरी बदमाश उठा रहे हैं। इस इलाके से क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने कई बार भारी मात्रा में चरस, गांजा (Ganja) से लेकर तमाम मादक पदार्थ भी जब्त किए है। गोविंदपुरा थाना पुलिस ने ही 3 अप्रैल को डकैती की योजना बनाते आधा दर्जन आरोपियों को दबोचा है। भेल (BHEL) की तरफ से जर्जर मकानों पर निगरानी के लिए प्रायवेट सिक्योरिटी गार्ड लगाए है। लेकिन, उनकी भी संख्या अपर्याप्त होने के चलते भेल अपराधियों के लिए मुफीद अड्डा बनते जा रहा है।
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