Bhopal Cyber Fraud: लाखों रुपए का लेन-देन हुआ था बैंक ने पहुंचाया था नोटिस, पुलिस ने जालसाजी का प्रकरण दर्ज करके दो संदेहियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया

भोपाल। राजधानी में नौकरी लगाने के नाम पर अशिक्षित मजदूर के नाम पर खुले खातों से लाखों रुपए का लेन-देन करने का चौंका देने वाला मामला उजागर हुआ है। इस मामले में भोपाल (Bhopal Cyber Fraud) शहर की गोविंदपुरा थाना पुलिस ने जालसाजी का प्रकरण दर्ज करके दो संदेहियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
गारंटी के नाम पर चेक बुक और एटीएम रखवाते थे
गोविंदपुरा (Govindpura) थाना पुलिस के अनुसार शुभम परमार पिता रामबाबू परमार उम्र 20 साल एमपी नगर (MP Nagar) थाना क्षेत्र स्थित शिवाजी नगर (Shivaji Nagar) में पीडब्ल्यूडी स्टोर के पास रहते हैं। वे एमपी नगर स्थित एक टाइल्स की दुकान में नौकरी करते हैं। उनके पास पिछले दिनों बैंक की तरफ से नोटिस आया था। बैंक का नोटिस मिलने के बाद वह शाखा में पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें बैंक ने लाखों रुपए के लेन-देन पर सुरक्षा बरतने के लिए बोलने बुलाया था। वहां पता चला कि उनके खातों से लाखों रुपए का पैसा इधर-उधर हो रहा है। यह मालूम होते ही वे पुलिस थाने में पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में शुभम परमार (Shubham Parmar) की शिकायत पर प्रकरण 230/26 दर्ज करके जांच शुरु की। जिसमें पता चला कि पीड़ित की पहचान आईएसबीटी (ISBT) पर जनवरी के पहले सप्ताह में बसंत पटेल (Basant Patel) नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। उससे नौकरी लगाने की बातचीत उसने की थी। जिसके बाद उसका मोबाइल नंबर से कॉल आया। वह उसको लेकर चूना भट्टी (Chuna Bhatti) थाना क्षेत्र स्थित रिलायंस मार्केट के ऊपर पीएनबी बैंक (PNB Bank) ले गया। यहां उसका खाता खोलने के बाद उसके हस्ताक्षर कराकर चेक बुक और एटीएम को नौकरी में गारंटी के लिए रख लिया। जिसने बैंक खाता खुलवाने में उसका सहयोग किया उसने अपना नाम गौतम बताया था। बसंत पटेल ने ही उसका दूसरा खाता कोलार रोड (Kolar Road) स्थित मंदाकिनी के पास सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank Of India) में खुलवाया। उसके भी पासबुक चेकबुक और एटीएम रख लिए थे। पुलिस ने इस मामले में दोनों संदेहियों को हिरासत में ले लिया है। शुरुआती जांच में उनके नाम फर्जी पता चल रहे हैं। आरोपी अक्सर मुलाकात करने के लिए आईएसबीटी पर ही बुलाते थे। पुलिस ने दोनों संदेहियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस को शुरुआती जांच में आरोपियों के सायबर (Cyber) गिरोह के नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है। इस मामले में 09 अप्रैल को पुलिस की तरफ से आधिकारिक खुलासा किया जा सकता है।
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