Exclusive Story: राज्य सरकार की नाराजगी के बावजूद पुलिस कर्मचारियों के मामलों का पहाड़ खड़ा हुआ,दिवंगत पुलिस कर्मचारी की पत्नी ने दिखाया सिस्टम को आईना

भोपाल। पुलिस का कोई कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहा है। लेकिन, वेतन ले रहा है। पुलिस के किसी कर्मचारी को बीमारी में तनख्वाह ज्यादा दे दी गई। अब रिकवरी की बारी आई तो मालूम हुआ कि उसका निधन ही हो गया। ऐसे ही दर्जनों मामलों (Exclusive Story) का पहाड़ पुलिस विभाग में खड़ा हो गया। जिसको लेकर राज्य सरकार की तरफ से गृह विभाग ने कई बार आपत्ति जता दी है। इसके बावजूद पुलिस के अफसर इन संख्याओं को कम करने में नाकाम हैं।
अफसरों की लापरवाही का नतीजा भोग रही हवलदार की विधवा पत्नी
जानकारी के अनुसार भोपाल पुलिस में हवलदार प्रमोद मेहतो (HC Pramod Mehto) थे। वे सरकारी सेवा में बीमार हुए। तब पुलिस विभाग (Bhopal Cop News) की तरफ से बकायदा उनके खाते में वेतन का भुगतान होता रहा। इसी बीच प्रमोद मेहतो का निधन हो गया। जिसके बाद उन्हें सरकारी सेवा के अनुसार उनके कार्यकाल की प्रतिभूतियों का भुगतान विभाग को करना था। उसकी समीक्षा की गई तो पता चला कि विभाग ने प्रमोद मेहतो को सेवा काल के दौरान ही सात लाख रुपए का अतिरिक्त भुगतान कर दिया। उनके निधन के बाद पुलिस विभाग ने विधवा पत्नी सविता मेहतो (Savita Mehto) को ही रिकवरी का नोटिस थमा दिया। पति की ग्रेज्युटी और अनुकंपा नियुक्ति मिलने की बजाय मामला अतिरिक्त वेतन भुगतान का बना दिया। जिस कारण परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
अभी भी अपनी गलती को नहीं मान रहे अफसर
प्रमोद मेहतो के मामले को उसकी पत्नी ने हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती दी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पुलिस विभाग (Police Department) उसके पति से ही रिकवरी करने का अधिकार रख सकता था। यह दायित्व उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। फैसले के खिलाफ पुलिस विभाग सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) चला गया। वहां भी पुलिस विभाग के अफसरों को पटखनी खानी पड़ी। अफसरों की इस मामले में भारी लापरवाही रही। इसलिए दबाव बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों ने हाईकोर्ट में मूलधन माफ के फैसले को छोड़कर उसके ब्याज भुगतान के लिए याचिका लगा दी। इस मामले में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मूलधन माफ के साथ ही ब्याज के अस्तित्व को ही प्रश्न चिन्ह बना दिया। इसलिए वह ब्याज वाले मामले की लगाई याचिका में पुलिस विभाग के अफसर हार गए। इसके बाद वे ब्याज पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे। वहां भी अफसरों को हार का सामना करना पड़ा और कोर्ट का फैसला प्रमोद मेहतो की पत्नी के पक्ष में आया। परिवार से पुलिस विभाग 21 लाख रुपए की रिकवरी चाहता है। परेशान होकर सविता मेहतो ने फिर न्यायालय का दरवाजा यह बोलकर खटखटाया है कि यह अदालत की अवमानना का विषय है। जिसके संबंध में भोपाल पुलिस के अधिकारियों को नोटिस थमाया गया है।
बिना काम कांस्टेबल बारह साल से ले रहा था वेतन
वेतन विसंगति को लेकर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भोपाल पुलिस (Bhopal Cop News) का ही एक कांस्टेबल घर बैठकर बारह साल तक वेतन ले रहा था। उसके कार्य में उपस्थित नहीं होने का पता चला तो उसे नोटिस देकर उसे दिए गए वेतन भुगतान की रिकवरी का नोटिस दिया गया है। इस प्रकरण की जांच एसीपी टीटी नगर अंकिता खातरकर (ACP Ankita Khatarkar) के पास है। जांच रिपोर्ट तीन महीना पूर्व डीसीपी मुख्यालय को भेज दी गई है। इस प्रकरण को भी एक साल बीत चुका है लेकिन कोई निराकरण पुलिस विभाग के अफसर नहीं कर पा रहे हैं।
यह बोले जिम्मेदार अधिकारी

दिवंगत पुलिस कर्मचारी प्रमोद मेहतो के मामले में डीसीपी मुख्यासलय श्रद्धा तिवारी (DCP Shraddha Tiwari) से प्रतिक्रिया ली गई। इसके अलावा सरकार की नाराजगी के बावजूद वेतन भुगतान की बढ़ती लापरवाही के मामले को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में न्याय के सिद्धांत पर कार्य किया जाता है। इसलिए एसपी की सजा, डीआईजी, आईजी फिर डीजीपी तक अपील की जाती है। इसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला (Exclusive Story) पहुंचता है। यह सारे प्रकरण बहुत पुराने हैं जिसमें हमारी तरफ से मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाते हैं। डीसीपी ने बताया सेवा संबंधित विषय वित्त विभाग से भी जुड़े होते हैं। इसलिए कई बार वहां से भी अभिमत आने पर विलंब होता है।
खबर के लिए ऐसे जुड़े

हमारी कोशिश है कि शोध परक खबरों की संख्या बढ़ाई जाए। इसके लिए कई विषयों पर कार्य जारी है। हम आपसे अपील करते हैं कि हमारी मुहिम को आवाज देने के लिए आपका साथ जरुरी है। हमारे www.thecrimeinfo.com के फेसबुक पेज और यू ट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें। आप हमारे व्हाट्स एप्प न्यूज सेक्शन से जुड़ना चाहते हैं या फिर कोई घटना या समाचार की जानकारी देना चाहते हैं तो मोबाइल नंबर 7898656291 पर संपर्क कर सकते हैं।