Bhopal News: संपत्ति विवाद में कर दी थी भाभी की जलाकर हत्या, चौदह साल की हुई थी सजा

भोपाल। हत्या के मामले में सजा मिलने के बाद जेल से पैरोल पर आए बंदी को भोपाल (Bhopal News) शहर की निशातपुरा थाना पुलिस ने दबोचा है। वह चौदह साल से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ गांधी नगर थाने में प्रकरण भी दर्ज था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम महाराष्ट्र और गुजरात शहर में डेरा जमाए थी। आरोपी की गिरफ्तारी पर 15 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था।
पैरोल खत्म होने के बाद जेल वापस नहीं गया
निशातपुरा (Nishatpura) थाना पुलिस के अनुसार निशातपुरा थाना क्षेत्र में 2006 में अनीता मौर्य (Anita Maurya) की आग से जलाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने उमेश चंद्र मौर्या (Umesh Chandra Maurya) पिता स्वर्गीय पतिराज मौर्या उम्र 54 साल को आरोपी बनाया था। प्रकरण में उसकी पत्नी भी सह आरोपी थी। अदालत ने सुनवाई के बाद 2006 में चौदह साल की उमेश चंद्र मौर्या को सजा सुनाई थी। वहीं उसकी पत्नी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। पत्नी फिलहाल अशोका गार्डन (Ashoka Garden) स्थित दशमेश नगर (Dashmesh Nagar) में रहती हैं। आरोपी उमेश चंद्र मौर्य को 2012 में पैरोल मिली थी। वह बाहर आया लेकिन उसके बाद जेल (Jail) वापस नहीं गया। जिस कारण जेल प्रबंधन ने उसके खिलाफ गांधी नगर (Gandhi Nagar) थाने में प्रकरण दर्ज कराया। डीसीपी मयूर खंडेलवाल (DCP Mayur Khandelwal) ने फरार चल रहे आरोपी के प्रकरण को देखा तो विशेष दस्ता बनाया। जिसका नेतृत्व एसआई अशोक शर्मा (SI Ashok Sharma) को सौंपा गया। पड़ताल से पहले उन्होंने आरोपी उमेश चंद्र मौर्य के पूरे परिवार की कुंडली निकाली। इसके बाद उसकी पहले लोकेशन मुंबई में मिली। वहां रिश्तेदार पर निगाह रखने के बाद पता चला कि वह गुजरात (Gujrat) के अहमदाबाद (Ahmadabad) शहर में रहता है। पुलिस ने वहां डेरा डाला तो आरोपी कॉस्मैटिक सामान बेचता पाया।
सजा से बचने लगाई थी याचिका
आरोपी उमेश चंद्र मौर्य ने सजा के खिलाफ जबलपुर हाईकोर्ट (High Court) में याचिका लगाई थी। वह उस मामले में भी उपस्थित नहीं हो रहा था। तमाम नोटिस देने के बावजूद उसकी हाजिरी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। जिस कारण पुलिस (Bhopal News) के अधिकारियों ने फरारी को गंभीरता से लिया। जानकारी के अनुसार आरोपी ने फरारी के दौरान मुबई (Mumbai) जाकर 2012 से 2016 तक कोरियर का काम किया था। वहां आस-पास उसके पुश्तैनी गांव के लोग ज्यादा रहते थे। इसलिए पकड़ाने के डर से वह 2016 में गुजरात रहने चला गया। घनी आबादी वाले क्षेत्र में कपड़ा बांधकर फेरी लगाता था। उसने बताया है कि उसकी एक दुकान भी थी। जिसे विधि क्षेत्र के एक व्यक्ति को बेची है। इसके बदले में उसको पैसा मिला था। पुलिस इस संबंध में उस व्यक्ति से भी पूछताछ कर सकती है।
राजधानी में तीन प्रणाली बदल गई तब आई सुध
उमेश चंद्र मौर्य पुलिस विभाग के भीतर ही भीतर चल रहे बंदरबाट की कहानी भी बयां करता है। ऐसे सैंकड़ों अभियुक्त हत्या, अपहरण जैसे मामले में फरार चल रहे हैं। बागसेवनिया (Bagsewania) थाने में वृद्धा की हत्या के मामले में संदेही बेटा फरार है। इसी तरह गोविंदपुरा (Govindpura) में गर्ल्स हॉस्टल की छात्रा पर कार चढ़ाकर हत्या करने वाला आरोपी फरार चल रहा है। वहीं शाहजहांनाबाद (Shahjahanabad) में चार साल के बच्चे को अगवा करने वाले आरोपियों का सुराग नहीं मिला है। ऐसे ही दर्जनों मामलों की नस्तियां धूल के ढ़ेर में पड़ी हैं। जिनकी सुध सिस्टम ने नहीं ली। उमेश चंद्र मौर्य जब फरार हुआ था तब डीआईजी प्रणाली चल रही थी। डीआईजी कार्यालय से पांच हजार रुपए और उत्तर एसपी की तरफ से दस हजार रुपए का इनाम घोषित था।
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