MP Cop Gossip: राजधानी पुलिस की अपनी शैली के चलते किरकिरी कराने में व्यस्थ निरीक्षक, सुपर विजन करने वाले अफसर मौन, तबादले में अचानक चमक गई किस्मत

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग बहुत बड़ा है। उसके भीतर ही भीतर बहुत कुछ चल रहा होता है। इनमें से कुछ बातें मीडिया में आ जाती हैं तो कुछ दबी रह जाती है। ऐसे ही बातों का साप्ताहिक कॉलम एमपी कॉप गॉसिप (MP Cop Gossip) है। इस बार कुछ चुटीली बातों के साथ मजेदार किस्से आपके लिए। इसमें हर संभव कोशिश होती है कि जिस व्यक्ति का है उसकी पहचान गुप्त रखी जाए। हमारा मकसद किसी व्यवस्था, व्यक्ति अथवा पद को कम—ज्यादा आंकना नहीं हैं।
संजय महाभारत का रण बनाकर ही मानेंगें
आपको महाभारत ग्रंथ याद ही होगा। इसमें एक पात्र है संजय जिन्हें दिव्यदृष्टि होने का लाभ था। लेकिन, शहर के एक थाना प्रभारी इससे मरहूम हैं। उनकी एक सामान्य शैली रही है कि वे मूल अपराध के तत्व को पहले मार देते हैं। ताकि मीडिया में सनसनीखेज होते हुए समाचार सामने न आए। अपने इस तरकीब के रास्ते सनसनीखेज लूट को झपटमारी, गैंगरेप को झांसा देकर अगवा कर ले जाने समेत कई अन्य कारनामों को बखूबी अंजाम भी दे चुके हैं। यह बातें किसी से छुपी भी नहीं हैं। लेकिन, इन साहब की निगरानी करने वाले या कहे सुपरविजन अफसरों ने गांधारी की तरह अपनी आंखों में पट्टी बांध रखी हैं। बहरहाल जब तक यह बातें ढंकी हैं तब तक ही इन महोदय की खैरियत हैं। जिस दिन यह बड़ा मुद्दा बनेगी उस दिन तय है कि कई सुपरविजन अफसरों की शैली भी उजागर हो जाएगी।
इस कहते हैं मार्केंटिंग का चमत्कार
पिछले दिनों डायल 100 बदलकर 112 हो गई। यह वाहन अभी तक भोपाल पुलिस (MP Cop Gossip) को नहीं मिले हैं। लेकिन, पेट्रोल—डीजल भराने के लिए जाते वक्त यह सारे वाहन एक साथ समूह में जिस तरह से हूटर बजाकर चलते हैं उससे आम जनता में कुछ बड़ा होने की दहशत समा जाती है। पूर्व की व्यवस्था में जो वाहन प्रदेश को मिलने थे वह तो स्वीकृत ही नहीं हुए और एजेंसी बदल गई। अब सिर्फ दो सौ वाहन की संख्या बढ़ाकर पुलिस मुख्यालय की तरफ से जमकर उसकी मार्केटिंग करा दी गई है। अभी इन वाहनों के मैदान में चलने की खबर भी नहीं कि उनके बंद होकर धक्का मारने की तस्वीरें वायरल होने लगी हैं।
कई साल से मायूस निरीक्षक का चेहरा खिला

शहर के एक थाना प्रभारी का पिछले दिनों बड़े थाने में तबादला हो गया। वे जिस थाने की कुर्सी संभालने पहुंचे वहां के स्थानीय विधायक के हालात इन दिनों खराब चल रहे हैं। उनसे जुड़े कई लोगों पर कानूनी शिकंजा कस रहा है। उनके आदमियों को चुन—चुनकर जमींदोज किया जा रहा है। हालांकि विधायक महोदय का चाल—चरित्र—चेहरा तीनों दशकों से विवादित रहा है। लेकिन, सिस्टम में नए बदलाव के चलते उन्हें सरेंडर होने की कला सिखाई जा रही हैं। जिसमें महत्वपूर्ण योगदान दो निरीक्षक इन दिनों कर रहे हैं। इन्हें बकायदा एक मिशन मोड पर कुर्सी संभालने के लिए भेजा गया है। वे कंबल ओढ़कर पूरी स्क्रिप्टि लिखते हैं जो आला अधिकारियों के जरिए वॉर रूम में बैठे निर्देशकों तक पहुंचाई जाती है। वहां से जो डायरेक्शन होता है उसमें दूसरे क्षेत्र के थाना प्रभारी डंडा चलाने का काम करते हैं। पुलिस विभाग के आला अधिकारी यह अनुराग अपनी कुर्सी बचाने के लिए कर रहे हैं।
बंद कमरे में लताड़ा उसके ही बाद पति का आ गया फोन
यह उस जिले की कहानी है जहां किला और मजार के कारण काफी कानून व्यवस्था की स्थिति बनती रहती हैं। इस जिले की महिला निरीक्षक को कुछ आरक्षकों के साथ कप्तान ने कैबिन में बुलाया। यहां महिला निरीक्षक को कप्तान से फटकारते हुए बोला कि उसका चेहरा उन्हें पसंद नहीं है। इसलिए वह उसको जब मुंह उठाए लेकर उनके पास मत आया करो। दरअसल, महिला निरीक्षक का रंग उतना साफ नहीं हैं। यह बात सुनने के बाद वह बिलख पड़ी और तभी उनके पति का कॉल आ गया। वह आर्मी में तैनात हैं। उन्होंने रूंधे गले के साथ फोन उठाया तो पति समझ गए कुछ हुआ है। पति ने बात पूछी तो पूरा घटनाक्रम कप्तान के साथ जो हुआ वह बता दिया। इसके बाद पति ने उन्हें ताकीद कर दिया है कि अगली बार यदि ऐसा वाक्या दोबारा हो तो जूता मारकर उन्हें रिपोर्ट करना। बाकी वह अपने स्तर पर अधिकारियों से निपट लेगा।
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