Bhopal Property Fraud: बिल्डर ने बैंक में बंधक और कुर्क फ्लैट को फर्जी तरीके से बेचा

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Bhopal Property Fraud : चार महीने के भीतर में सात किस्त में ली गई 12 लाख पंद्रह हजार रुपए की रकम हड़पी, जालसाजी का पता चलने पर फर्जी एग्रीमेंट भी किया

Bhopal Property Fraud
सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

भोपाल। आईसीआईसीआई बैंक में बंधक और कुर्क फ्लैट को एक बिल्डर और उसके पांच साथियों की मदद से बेच दिया गया। इस मामले में जीरो पर प्रकरण दर्ज किया गया था। जिसकी केस डायरी भोपाल (Bhopal Property Fraud ) शहर के बागसेवनिया थाने को भेजी गई। पुलिस को प्राथमिक जांच में बारह लाख, 15 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा करने की जानकारी मिली है। प्रकरण में आरोपियों की संख्या भी बढ़ेगी।

पजेशन दिलाने का झूठा वादा करते रहे

बागसेवनिया (Bagsewania) पुलिस के अनुसार राहुल देव गौतम पिता गोपीराम गौतम उम्र 28 साल कोलार रोड (Kolar Road) स्थित नयापुरा में ज्योति हाईट्स (Jyoti Heights) में किराए से रहते हैं। वह मूलत: दतिया (Datia) जिले के रहने वाले हैं। वे भोपाल में 2021 में भोपाल आए थे। उनकी वहां रहते हुए प्रशांत मानेश्वर पिता श्रीचंद्र मानेश्वर से पहचान हुई थी। राहुल देव गौतम (Rahul Dev Gautam) ने उससे ज्योति हाईट्स में फ्लैट खरीदने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद प्रशांत मानेश्वर (Prashant Maneshwar) ने बिल्डर मनोज अग्रवाल पिता ओम प्रकाश अग्रवाल से मुलाकात कराई। उसका दफ्तर बागसेवनिया थाना क्षेत्र स्थित विद्या नगर (Vidya Nagar) इलाके में हैं। राहुल देव गौतम को वह जहां रहता है वहां फ्लैट नंबर 105 पसंद आया। सौदा बारह लाख रुपए में तय किया गया। अप्रैल, 2025 में राहुल देव गौतम ने दो किस्त में 70 हजार रुपए दिए जो प्रशांत मानेश्वर ने लिए। फिर अगले महीने बिल्डर मनोज अग्रवाल (Builder Manoj Agrawal) को नौ लाख रुपए का भुगतान दो चेक से किया गया। यह चेक बिल्डर ने अंकुर कुमार दत्ता (Ankur Kumar Dutta) पिता राकेश कुमार दत्ता के बैंक खाते में जमा कराया। वह बिल्डर के साथ कारोबार में पार्टनर भी है। पीड़ित से फ्लैट की रजिस्ट्री कराने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए मांगे गए। यह दो बैंक खातों से जुलाई, 2025 में दिया गया था। इसके बाद आरोपियों ने बोला कि फ्लैट में बिजली मीटर के लिए 15 हजार रुपए देना होंगे। यह रकम उससे प्रशांत मानेश्वर ने ली थी। रजिस्ट्री कराने के लिए मनोज कुमार सिंह पिता संतप्रसाद सिंह आया था। उसे बिल्डर ने अपना पार्टनर बताकर हकीम सेल्स कंपनी (Hakeem Sales Company) की तरफ से संपति का कस्टोडियन बताया था। उसी दिन मनोज कुमार सिंह (Manoj Kumar Singh) ने उसे पजेशन लैटर दिया था।

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कई अन्य संदेहियों की भूमिका है संदिग्ध

यह पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब पीड़ित खरीदे गए फ्लैट पर पहुंचा। उसे मालूम हुआ कि यह फ्लैट तो जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) को बिल्डर ने बेच दिया था। उसने आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) से लोन लेकर निर्माण किया था। जिसका भुगतान नहीं करने के कारण उसके अधिकांश फ्लैट कुर्क कर लिए गए थे। इस कारण मनोज अग्रवाल और प्रशांत मानेश्वर से विरोध किया तो आरोपी बोले कि वह दिसंबर, 2025 तक पजेशन दिला देगा। यकीन दिलाने के लिए उसने सितंबर, 2025 में एग्रीमेंट भी किया। जिसकी शर्त के तहत उक्त संपत्ति पर प्रतिमाह पंद्रह हजार रुपए महीना किराया देने का भी वादा किया था। लेकिन, सभी आरोपी आज-कल बोलकर उसे घुमाते रहे। नतीजतन उसने ई-एफआईआर जीरो में करा दी। बागसेवनिया थाना पुलिस ने इस मामले में 8 अप्रैल को आरोपी मनोज अग्रवाल, मनोज कुमार सिंह, प्रशांत मानेश्वर, अंकुर कुमार दत्ता और हकीम सेल्स कंपनी को बनाया गया है। आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, गबन, गाली-गलौज, धमकाने के अलावा कई अन्य धाराओं में प्रकरण 193/26 दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि उक्त प्रकरण में कई अन्य संदेहियों की भूमिका संदिग्ध है। जिनके खिलाफ तथ्य मिलने पर एफआईआर में नाम जोड़ा जाएगा। इसके अलावा जिस कॉलोनी के फ्लैट कुर्क उनके संबंध में भी जानकारी बैंक से मांगी जाएगी।

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