Fake Cop News: पूर्व विधायक के रिश्तेदार को बचाने की कोशिश

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Fake Cop News: नकली पुलिस बनकर लूटपाट करने वाले मामले में घिरे थाने के अधिकारी, पीड़ित से समझौते के लिए छह लाख रूपए का दिया था प्रस्ताव, पीएचक्यू के क​थित पुलिस कांस्टेबल की भूमिका संदिग्ध

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सांकेतिक चित्र

भोपाल। फिल्म “Special 26” ​की तर्ज पर पुलिस अधिकारी बनकर 70 हजार रूपए की लूट करने वाले आरोपियों में एक पूर्व विधायक का रिश्तेदार भी शामिल है। यह वारदात भोपाल (Fake Cop NBews) शहर के हबीबगंज थाना क्षेत्र की है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय (PHQ) के एक कांस्टेबल की भी कथित भूमिका सामने आ रही है। इन्हीं दोनों को बचाने के लिए पुलिस थाने की तरफ से कई लापरवाहियां एफआईआर दर्ज करने में बरती गई है।

ब्लॉक अध्यक्ष है पिता

इस मामले में पीड़ित के दोस्त से अदनान नाम के एक व्यक्ति ने संपर्क किया था। वह विदिशा (Vidisha) जिले के एक ग्रामीण तहसील में रहता है। वह पूर्व विधायक का रिश्तेदार भी है। उसने पीड़ित और उसके दोस्तों को प्रकरण में समझौता करने के लिए छह लाख रुपए का भी लालच दिया था। यह काम उस वक्त किया गया जब पुलिस ने एफआईआर दर्ज तक नहीं की थी। इस मामले में पुलिस अधिकारियों की तरफ से आधिकारिक बयान अभी तक नहीं दिया गया है। वहीं पुलिस मुख्यालय (PHQ) में तैनात विनायक नाम के एक पुलिस कर्मचारी की भी संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है। जिसके संबंध में पुलिस के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। सभी आरोपियों के वीडियो (Video) फुटेज पुलिस के पास उपलब्ध है।

क्या है पूरा मामला जिसको पुलिस ने दबा रखा है

क्रिप्टो करंसी का काम करने वाले राहुल गुप्ता (Rahul Gupta) पिता अरुण गुप्ता मूलत: नर्मदापुरम (Narmadapuram) जिले के रहने वाले हैं। यहां हबीबगंज (Habibganj) स्थित ई-7 में लाला लाजपत राय सोसायटी (Lala Lajpatrai Society) में रहते हैं। वे 11 जनवरी को अपने दोस्त अनिमेष वर्मा (Animesh Verma) , अनुराग और नरेंद्र परमार (Narendra Parmar) के साथ बैठे थे। तभी जोरदार तरीके से दरवाजे पर दस्तक हुई। राहुल गुप्ता ने जैसे ही दरवाजा खोला उसके बाद भीतर घुसे आरोपियों ने उसको पीटना शुुरु कर दिया। आरोपियों ने चुपचाप अपनी जगह पर बैठे रहने की सलाह देते हुए पूरे घर की तलाशी यह बोलकर लेने लगे कि यह पुलिस का छापा है। आरोपियों ने घर में रखी नकदी और पीड़ितों के पास रखा पैसा छीन लिया। युवकों को किसी तरह का शक न हो इसलिए बकायदा आरोपियों ने वीडियो (Video) भी बनाया। इससे पहले आरोपी गांजा कहां रखा है बोलकर छानबीन कर रहे थे। इसके बाद आरोपियों ने जेब से बहुत सारे एटीएम कार्ड और गांजा (Ganja) निकालकर टेबल पर रखा और उसके सामने युवकों को बैठाकर वीडियो बनाया।

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थाने के सामने तक दबंगई दिखाकर ले गए

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सांकेतिक ग्राफिक डिजाइन टीसीआई

वारदात करने वाले आधा दर्जन स्वीफ्ट डिजायर और सियाज कार से आए थे। राहुल गुप्ता, अनिमेष वर्मा, अनुराग और नरेंद्र परमार को बंधक बनाकर इसके बाद वे मिसरोद (Misrod) थाने तक ले गए। इसके बाद आरोपी (Fake Cop News) एनडीपीएस (NDPS) प्रकरण से बचने के लिए प्रत्येक से पांच-पांच लाख रुपए का इंतजाम करने की बात बोली। इस दौरान राहुल गुप्ता के करीबी नर्मदापुरम निवासी आनंद रघुवंशी (Anand Raghuvanshi) से कई बार कॉल लगाने को बोला। फोन पर राहुल गुप्ता ने एक लाख रुपए का इंतजाम करके शिवाजी नगर (Shivaji Nagar) स्थित पांच नंबर बस स्टॉप के पास शराब दुकान के सामने बुलाया। जब यह बातचीत चल रही थी तब चारों युवक कार (Car) के भीतर मिसरोद थाने के सामने थे।

बहन और कर्जदारों के फोन भी आए

आनंद रघुवंशी नर्मदापुरम से अपनी थार (Thar) लेकर भोपाल पहुंचे। यहां वे शिवाजी नगर में आए। उन्होंने नकली पुलिस (Fake Police News)  कर्मचारियों से बातचीत भी की। वे पेशे से अधिवक्ता भी है। आनंद रघुवंशी से बोला गया कि वे एक लाख रुपए फुटपाथ पर रखकर निकल जाए। आरोपियों की इस बातचीत से वे समझ गए कि यह असली पुलिस नहीं हैं। उन्होंने राहुल गुप्ता के आने पर ही पैसा देने की शर्त रखी। शिवाजी नगर में स्वीफ्ट कार से पहुंचे एक आरोपी को पैसा देने के बहाने उन्होंने झांसा देकर अपनी थार में बुला लिया। यहां उसे दबोचा तो वह छूटकर भाग गया। लेकिन, ऐसा करते वक्त वह अपना मोबाइल (Mobile) छोड़ गया। इस मोबाइल पर आरोपी की बहन के फोन आए थे। वहीं एक कर्जदार ने पैसा न चुकाने पर धमकी भी दी थी। इधर, शिवाजी नगर में विवाद होने पर उसके बंधक अन्य दोस्तों के साथ राहुल राजपूत (Rahul Rajput) को आरोपियों ने टीटी नगर स्थित गैमन मॉल (Gammon Mall) के सामने छोड़ दिया। जिन्हें लेकर आनंद रघुवंशी ने डायल-112 को फोन लगाकर पूरा घटनाक्रम बताया। इसके बाद सभी पीड़ितो को डायल-112 ने ही थाने में भी पहुंचाया। वहां आरोपियों का छूटा मोबाइल भी पुलिस को सौंपा गया था।

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पुलिस पर संगीन आरोप

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हबीबगंज थाना, जिला भोपाल— फाइल फोटो

इस मामले में हबीबगंज (Habibganj) थाना पुलिस ने 11-12 जनवरी की दरमियानी रात कोई कार्रवाई नहीं की। सभी युवकों को अगले दिन सुबह आने के लिए बोला। दिनभर थाने में बैठाए रखा गया जबकि वहां पर वारदात में शामिल आरोपी भी लॉकअप के पास कमरे में बैठे हुए दिखाई दे रहे थे। यह बात आनंद रघुवंशी को पता चली तो वे 13 जनवरी को थाने में पहुंचे। उन्होंने विरोध करते हुए अधिकारियों से शिकायत करने की बात बोली तो रात आठ बजे गुपचुप तरीके से छद्म पुलिस बनकर जालसाजी करने का प्रकरण 0029/26 दर्ज कर लिया गया। जबकि इस मामले में बंधक बनाने, मारने-पीटने, पैसा लूटने, अपहरण करके ले जाने और डकैती जैसी धाराओं को शामिल ही नहीं किया गया। वारदात को लेकर पीड़ितों ने दैनिक स्वदेश समाचार पत्र को बकायदा सीसीटीवी फुटेज भी सौंपे हैं।

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